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कोरोना के लिए विशेष अस्पताल

सोहिनी दास, गिरीश बाबू और समरीन अहमद /  03 18, 2020

देश में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और त्वरित जांच से देश में कोविड-19 के संदिग्ध मामलों में बढ़ोतरी की आशंका है। भारत में अभी इस महामारी का तीसरा चरण यानी समुदाय में संक्रमण शुरू नहीं हुआ है, लेकिन सरकार उस स्थिति की भी तैयारी कर रही है। 

सूत्रों का कहना है कि सरकार देश में कोरोनावायरस के लिए कम से कम चार से पांच बड़े अस्पताल स्थापित करने के बारे में विचार कर रही है ताकि मरीजों को सफलतापूर्वक अलग-थलग रखा जा सके और उनका इलाज किया जा सके। एक बड़ी निजी अस्पताल शृंखला के सीईओ ने कहा कि इन अस्पतालों के लिए संभावित इमारत तलाशी जा रही हैं। ये इमारत सैटेलाइट हॉस्पिटल (छोटे केंद्र), बंद या शुरू होने वाले अस्पताल या शैक्षणिक संस्थाओं के हॉस्टल आदि हो सकते हैं, जिन्हें कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज के लिए 250 से 300 बेड के विशेष अस्पताल में तब्दील किया जा सके। 

सीईओ ने कहा, 'चालू अस्पतालों में आइसोलेशन वॉर्ड बनाने में जोखिम है क्योंकि इससे अन्य मरीजों पर जोखिम पैदा हो जाता है। इसके अलावा विभिन्न जगहों पर भी आइसोलेशन वार्ड बनाने से संसाधन जुटाने के लिए लॉजिस्टिक चुनौती पैदा हो जाती है।'

उन्होंने कहा कि सभी बड़े निजी अस्पतालों में प्रत्येक अस्पताल में करीब 15 से 20 बेड का ही आइसोलेशन वार्ड हैं। ये स्वाइन फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियों के लिए रखे जाते हैं। इनमें अलग वातानुकूलन प्रणाली होती है, जो पूरे अस्पातल की वातानुकूल प्रणाली से अलग होती है ताकि रोगाणुओं को फैलने से रोका जा सके। 

आम तौर पर कोरोनावायरस हवा के जरिये नहीं फैलता है, लेकिन किसी भी आइसोलेशन वार्ड में पहले से सतर्कता बरतना जरूरी है। अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा अस्पातल अपने आइसोलेशन वार्डों का विस्तार करने के लिए अपने एयर-कंडीशनिंग डक्ट्स को रेट्रोफिट कर सकते हैं, लेकिन इन मरीजों के लिए अलग अस्पताल बेहतर समाधान है।'

अधिकारी ने बताया कि इस दिशा में काम पहले से ही चल रहा है। दक्षिण के किसी राज्य में 500 बेड का अस्पताल स्थापित करने की योजना है। इन्फोसिस फाउंडेशन और नारायण हेल्थ के चेयरमैन डॉ. देवी शेट्टी जैसे निजी उद्यमी पहले ही कर्नाटक सरकार से कह चुके हैं कि कोविड-19 के मरीजों के लिए 500 से 700 बेड के किसी सरकारी अस्पताल को खाली किया जाए। इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, 'मैं आपसे आग्रह करती हूं कि इस उद्देश्य के लिए कम से कम 500 से 700 बेड के एक सरकारी अस्पताल को खाली किया जाए, जिसमें ऑक्सिजन लाइन और पाइप की जरूरत होती है। इन्फोसिस फाउंडेशन नागरिक कार्य करेगा और डॉ. देवी शेट्टी ने चिकित्सा उपकरण जैसे संसाधन मुहैया कराने पर सहमति जताई है।' एक ईमेल के जवाब में इन्फोसिस फाउंडेशन ने कहा कि वह फिलहाल इस बारे में और कोई टिप्पणी नहीं कर सकता है। 

एक अन्य अस्पताल के सीईओ ने कहा कि एक बार जब सुविधा केंद्र की पहचान कर ली जाएगी तब निजी क्षेत्र इसमें उतर सकते हैं और वे अस्पताल को कम वक्त में ही सभी सुविधाओं से लैस कर सकते हैं। राज्य सरकारें और बड़े शहरों के नगर निगम भी अपने काम में जुट चुके हैं। मुंबई में 700 बेड वाले सेवन हिल्स हॉस्पिटल वृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की जमीन पर बना है जो अंधेरी में है। उसे पिछले हफ्ते से ही कोविड 19 के मरीजों के लिए खासतौर पर तैयार कर दिया गया है। यह अस्पताल 2017 से ही वित्तीय कुप्रबंधन और संपत्ति कर के भुगतान न होने की वजह से बंद कर दिया गया था। राज्य के स्वास्थ्य विभाग और बीएमसी ने इस अस्पताल को खोल कर संदिग्ध मरीजों को रखना शुरू किया है और जिन लोगों में कोविड-19 से संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है उन लोगों को दक्षिण मुंबई में कस्तूरबा हॉस्पिटल में रखा गया है।

दूसरे सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों को भी फिलहाल सेवन हिल्स अस्पताल में लाया गया है। हालांकि उद्योग के लोगों का कहना है कि कई अन्य राज्यों की सरकारों ने भी संकेत दिया है कि अगर यह महामारी तीसरे चरण में आती है तब निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की मदद भी ली जाएगी।

तमिलनाडु में कोविड 19 के मरीजों की तादाद कम है लेकिन यहां पहले से ही 400 अलग निजी वॉर्ड मौजूद हैं। तमिलनाडु में कुल 1121 आइसोलेशन वॉर्ड हैं। राज्य के स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश कहते हैं, 'हमने निजी अस्पतालों से संपर्क साधा है और करीब 400 वॉर्ड की पहचान की गई है। इसके अलावा हम उनके साथ समन्वय कर रहे हैं।'

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानिस्वामी ने सीमा क्षेत्रों में भी अगल रखने की जगह पहचान करने को कहा है ताकि अगर किसी संक्रमण के पुष्ट मामले की जानकारी मिलती है तो उन्हें अन्य केंद्रों पर ले जाने के बजाय वहीं रखा जा सके। उन्होंने कहा कि महामारी की आपदा गंभीर होने की स्थिति के लिए पुराने इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टलों की पहचान भी कर ली जाए। राजेश ने बताया कि शहर के बाहरी इलाके में मौजूद पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों को मिलाकर करीब 500 जगहों को ध्यान में रखा जा रहा है जहां मरीजों को अलग रखा जा सके। 

देश के सबसे बड़े निजी अस्पताल की श्रृंखला, तमिलनाडु के अपोलो हॉस्पिटल्स ने भी तैयारी कर ली है। अपोलो हॉस्पिटल्स के कार्यकारी वाइस चेयरपर्सन शोभना कामिनेनी ने बताया, 'हम पूरी तरह तैयार हैं। अगर जरूरत पड़ी तो जांच और कोविड-19 के मरीजों का इलाज हमारे अस्पतालों में करने को लेकर बातचीत चल रही है। यह हमारे दौर की युद्ध जैसी स्थिति है और हम सब इस स्थिति को संभालने के लिए तैयार हैं।'

राज्य सरकार को महसूस हो रहा है कि अब तक जो कदम उठाए गए हैं वह अगले दो से तीन हफ्ते तक मरीजों के आने तक जारी रहने चाहिए। देश के अस्पतालों में प्रति व्यक्ति बेड की कमी है और अगर यह महामारी फैलती है तब अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे को तैयार करने का वकत भी नहीं रहेगा।

वहीं केरल में जहां देश में पहले कोरोनावायरस मामले की पुष्टि की गई थी वहां अब भी 18,000 लोगों की निगरानी की जा रही है। ज्यादातर लोगों की घर में ही निगरानी की जा रही है। इस बीच एर्णाकुलम जिले में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टलों में उपलब्ध जगहों, होटलों, अस्पतालों के खाली कमरों को लेने का आदेश जारी किया गया है ताकि संक्रमित लोगों को अलग रखा जा सके। 

बेंगलूरु में 225 बेड वाले विक्रम हॉस्पिटल के सीईओ सोमेश मित्तल ने बताया, 'अगले 10-12 दिन अहम हैं। निजी क्षेत्र के सभी लोग तैयार हैं। अगर हालात गंभीर होते हैं तब हम एक फ्लोर को अलग कर वहां 25-30 मरीजों को अलग रख सकते हैं।' हालांकि उनका यह मानना है कि सरकारों को नई सोसायटी या 200-500 कमरे वाले होटलों को चुनकर कम वक्त में कोविड-19 के मरीजों के लिए उसे आइसोलेशन सेंटर में तब्दील कर दिया चाहिए। कर्नाटकर सरकार ने विदेश से राज्य में आ रहे सभी यात्रियों को केंपेगौड़ा इंटरनैशनल एयरपोर्ट के नजदीक प्राइवेट कॉलेजों, अस्पतालों, बजट होटलों और रिजॉर्ट में 15 दिनों तक रखने की घोषणा की है।

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