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बिजली संकट से जूझता जालंधर का एमएसएमई क्षेत्र

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Last Updated- December 11, 2022 | 7:02 PM IST

पंजाब में जालंधर का सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) वाला औद्योगिक क्षेत्र दो साल तक परेशान करने वाले कोविड के झटकों से उबरा तो बिजली ने उसे और तगड़ा झटका देना शुरू कर दिया है। यहां के एमएसएमई को उम्मीद थी के राज्य में नई सरकार आने के बाद आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी। लेकिन तेज गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण बिजली की किल्लत होने से उन्हें लग रहा है कि अभी लंबी लड़ाई लडऩी होगी।
जालंधर निर्यात का बहुत बड़ा केंद्र है और चमड़े के सामान के अलावा खेलकूद का सामान तथा विभिन्न उपकरण भी यहां से बाहर भेजे जाते हैं। चूंकि यहां कारखानों और मजदूरों के बल पर होने वाले काम का ही बोलबाला है, इसलिए उद्यमियों ने अभी कामगारों के लिए दरवाजे खोलने शुरू ही किए थे। मगर अप्रैल में लू चलने और कोविड के बाद आर्थिक स्थिति तेजी से सुधरने के कारण बिजली की मांग सरकार के अनुमानों से कहीं तेज बढ़ गर्ठ। इससे जालंधर के औद्योगिक क्षेत्र फोकल पॉइंट में एक साथ कई दिक्कतें खड़ी हो गईं।
अनियमित बिजली कटौती के कारण कुछ कारखानों की उत्पादन क्षमता पर खासा असर पड़ रहा है। कुछ उद्यमियों ने बिजली किल्लत के कारण अपनी उत्पादन योजना में बदलाव किया है। कारखाना मालिकों का कहना है कि बिजली अचानक जाने से कई बार कम उत्पादन होता है और किसी दिन तो नहीं के बराबर उत्पादन होता है। मगर मजदूरों को पूरा पैसा देना पड़ता है। इससे लागत पर असर पड़ा है और बिजली कटने पर महंगे डीजल जेनरेटरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो खर्च और बढ़ा रहे हैं।
देश में निर्यातकों के महासंघ फियो के उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन अश्वनी कुमार कहते हैं, ‘अनिश्चितता के बावजूद हमने किसी तरह उत्पादन पहले जैसे स्तर पर बनाए रखा। पिछले शुक्रवार को सरकार ने हमें शनिवार को कारखाने नहीं चलाने के लिए कहा मगर बाद में आदेश वापस ले लिया गया। इस बीच हम मजदूरों को अगले दिन की छुट्टी दे चुके थे। उन्हें अचानक वापस बुलाना पड़ा और 75 फीसदी क्षमता के साथ कारखाने चलाए गए।’
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को हर कीमत पर खुद को बचाना है और वह अपनी लड़ाई खुद लड़ रहा है। कुमार विक्टर टूल्स के मालिक हैं जो हैंड टूल्स की बड़ी निर्माता और निर्यातक कंपनी है। उन्होंने कहा कि उनके कारखाने में लगी सभी भारी मशीनें एक साथ जनरेटर से नहीं चल सकतीं। कुमार ती तकलीफ है कि जिन दिनों में बिजली नहीं रहने से काम नहीं होता है, उन दिनों में भी मजदूरों को दिहाड़ी देनी पड़ती है और उत्पादन में नुकसान की भरपाई के लिए बाद में उन्हें बुलाना पड़ता है।कुछ अन्य ने कहा कि उन्हें हर साल गर्मियों में बिजली कटौती की आदत पड़ गई है और उसी के मुताबिक उन्होंने अपनी योजना भी बना ली थी। कई कारखाना मालिक यह भी कहते हैं कि पिछले कुछ हफ्ते हालत बिगडऩे के बाद भी उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है मगर कामगारों तथा स्थानीय बाशिंदों की राय अलग है। दिहाड़ी मजदूरों को गर्मी में भी मशीनें चलानी पड़ती हैं और ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में काम करने के बाद भी उनहें अप्रैल से दिहाड़ी में नुकसान झेलना पड़ रहा है। बिहार से आए सुनील कुमार यादव कहते हैं, ‘मैं रोज 400 रुपये कमाता हूं और पिछले महीने के आखिर में एक दिन हमसे कहा गया कि अगले दिन आने की जरूरत नहीं है। घर में बिजली न हो तो काम चल सकता है मगर दिहाड़ी नहीं मिलेगी तो घर कैसे चलेगा।’            
जालंधर के फोकल पॉइंट इलाके में चाय बेचने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पहले उसकी दुकान पर कामगारों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन पिछले एक महीने से काम बहुत घटा है क्योंकि मजदूरों की तादाद बहुत कम हो गई है। खाने-पीने का सामान बेचने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उसके ठेले पर नियमित रूप से आने वाले मजदूरों की संख्या अप्रैल में कम हो गई और इलाके में काम के दिन बदलने से भी उसकी मुश्किलें बढ़ीं।
कई कारोबारियों ने कहा वे अतीत में बिजली संकट और यहां तक कि कोविड से भी निपटने में कामयाब रहे मगर इस साल बिजली की किल्लत बहुत गलत वक्त पर हुई है। धान की रोपाई का मौसम आ रहा है और ज्यादातर बिजली कृषि क्षेत्र को दे दी जाएगी। कई लोगों को डर है कि इसका उद्योग जगत और घरेलू उपभोक्ताओं पर बुरा असर होगा।
इंजीनियरिंग निर्यात संवद्र्धन परिषद (ईईपीसी) के पैनल के समन्वयक तुषार जैन कहते हैं, ‘धान रोपाई के मौसम में खेत के पंपों को बहुत अधिक बिजली की जरूरत होती है। मुझे लगता है कि हालात ढंग से नहीं संभाले गए तो उस वक्त बिजली की भारी कमी होने वाली है।’
उद्योग जगत के कुछ भागीदार मानते हैं कि मूंग की दाल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की पंजाब सरकार की घोषणा के कारण किसान धान की बुआई कुछ देर से करेंगे। हो सकता है उस समय तक कोयले की कमी दूर हो जाए और मॉनसून का आगमन होने के कारण कृषि पंपों के लिए बिजली की मांग कम हो जाए। फोकल पॉइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के अध्यक्ष नरिंदर सग्गू कहते हैं कि वह राज्य सरकार के साथ चर्चा में शामिल रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मैंने हाल ही में सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि बिजली की हालत स्थिर रहेगी। हम उनकी बात पर भरोसा कर रहे हैं।’
लेकिन इससे औद्योगिक क्षेत्र के बाहर की इकाइयों को लाभ नहीं होगा। ग्रामीणों और एमएसएमई को पिछले महीने कई दिनों तक 8-9 घंटे की बिजली कटौती झेलनी पड़ी। चमड़े के सामान के कारोबारी सुरेश रुद्र कहते हैं कि बिजली विभाग नकदी की तंगी से जूझ रहा है और हताश हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘भुगतान में एक दिन की भी देर होने पर रोज 50 से अधिक कनेक्शन काटे जा रहे हैं। हम लोग कैसे बचेंगे? पहले उन्होंने नियमित बिजली नहीं दी, जिसे हमारे धंधे और मजदूरी का नुकसान हुआ और अब उन्होंने अचानक बिजली काट दी जिससे हमारा नुकसान और बढ़ा।’ उन्होंने कहा कि छोटे कारखाने डीजल जेनरेटर नहीं लगा सकते क्योंकि इससे उनकी उत्पादन लागत चार गुना तक बढ़ जाएगी।
फोकल पॉइंट में एक वाहन कलपुर्जा निर्माता ने कहा, ‘जालंधर में 30-35 साल से कोई नया औद्योगिक क्षेत्र नहीं बना है और यहां जमीन बहुत महंगी है। इसलिए छोटे कारोबारी तीन पुराने क्षेत्रों में चले गए हैं, जहां उन्हें बुनियादी ढांचे की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस औद्योगिक क्षेत्र को बिजली मिलने का फायदा छोटे कारोबारियों को नहीं होता।’ पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। उसने घरेलू उपभोक्ताओं को ‘मुफ्त बिजली’ देने का वादा भी किया था। मगर उद्योगों के लिए उसने कोई बड़ा वादा नहीं किया। इसलिए फिलहाल तो किसानों की तरह उद्यमियों को भी इंद्रदेव की ओर ही टकटकी लगानी होगी।

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First Published - May 13, 2022 | 12:31 AM IST

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