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अरबों डॉलर वाले स्टार्टअप बाजार में उतरने की कर रहे तैयारी

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Last Updated- December 14, 2022 | 11:01 PM IST

देश में इंटरनेट आधारित प्रमुख कंपनियां अगले दो-तीन सालों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी में हैं जिनमें ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट, शिक्षा प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप बैजूस, फूड डिलिवरी कंपनी जोमैटो और कैब एग्रीगेटर कंपनी ओला शामिल हैं। आईपीओ से इन कंपनियों का कुल मूल्यांकन 100 अरब डॉलर तक रहने की उम्मीद है।
उद्योग के अंदरूनी सूत्रों और विश्लेषकों के अनुसार ये कंपनियां मुनाफे की राह तैयार करने के साथ ही नए कारोबारी क्षेत्रों में विविधता लाकर अपने वित्त और कानूनी टीमों के साथ परामर्श करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि भारत या विदेश में सूचीबद्ध कराया जा सके। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे  2022 तक अमेरिका में सार्वजनिक निर्गम लाने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि फ्लिपकार्ट की नजर आईपीओ के लिए करीब 40 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर है। उन्होंने कहा कि फोनपे एक अलग इकाई के रूप में सार्वजनिक निर्गम लाने की योजना बना रही है और वह करीब 10 अरब डॉलर के मूल्यांकन को लक्षित करने की योजना में है। जुलाई में दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया था जिससे ई-कॉमर्स कंपनी की वैल्यू 24.9 अरब डॉलर हो गई थी। 2018 में जब वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में बहुमत हिस्सेदारी के लिए 16 अरब डॉलर का निवेश किया तब बेंगलूरु की कंपनी का मूल्य 21 अरब डॉलर से भी कम था।
इसकी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया, ‘वॉलमार्ट के नेतृत्व ने फ्लिपकार्ट और फोनपे को मुनाफे का रास्ता बनाने के बारे में ताकीद दी है और कहा है कि वह चाहती है कि ये कंपनियां अपना सार्वजनिक निर्गम लाएं और इसके लिए सभी तरह का समर्थन दिया जा रहा है।’ सूत्रों ने कहा कि मुनाफे का रास्ता बनाने के लिए ई-कॉमर्स के अलावा फ्लिपकार्ट भारतीय वित्तीय सेवा बाजार में अपना दायरा बढ़ा रहा है जिसका मूल्यांकन अगले कुछ सालों में 340 अरब डॉलर तक हो सकता है। फ्लिपकार्ट की वित्तीय तकनीक श्रेणी 2019 में बढ़कर 40 फीसदी तक हो गई जिसमें उपभोक्ता क्रेडिट कंस्ट्रक्ट, उपकरण बीमा और विक्रेता फाइनैंसिंग शामिल है। कंपनी करीब 20 करोड़ उपभोक्ताओं को ऑनलाइन जोडऩा चाहती है और इसका मकसद वित्तीय तकनीक उत्पादों और सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या को बढ़ाना है। इसमें मझोले और छोटे शहर भी शामिल हैं।
कोविड-19 महामारी की वजह से ई-कॉमर्स की तरफ  लोगों का ध्यान ज्यादा बढ़ा है क्योंकि उपभोक्ता बड़ी तादाद में ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। फ्लिपकार्ट पर बेचे जाने वाले उत्पादों की सकल मर्केंडाइज वैल्यू (जीएमवी) कोविड के पहले स्तर को पार कर चुकी थी। आगामी त्योहारी बिक्री से ई-कॉमर्स कंपनियों का वार्षिक जीएमवी करीब 38 अरब डॉलर तक हो सकता है जिसमें पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी तक की वृद्धि है। ई-कॉमर्स के त्योहारी सीजन की बिक्री ही 7 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है। यह सीजन उपभोक्ता खर्च और फ्लिपकार्ट के सार्वजनिक निर्गम लाने की क्षमता का बड़ा संकेतक होगा।
फॉरेस्टर रिसर्च के एक वरिष्ठ पूर्वानुमान विश्लेषक सतीश मीणा ने कहा, ‘सवाल यह है कि क्या फ्लिपकार्ट वह मूल्यांकन पाने में सक्षम होगी जो वह चाहती है क्योंकि एमेजॉन और रिलायंस के जियोमार्ट के प्रवेश के कारण उनकी प्रतिस्पर्धा मुश्किल होती जा रही है।’ मीणा का कहना है कि वे बैजूस के आईपीओ को लेकर ज्यादा आशान्वित हैं।
महामारी की वजह से बैजूस इस साल 10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली कंपनी बन गई। विश्लेषकों के मुताबिक बैजूस के पास सार्वजनिक निर्गम लाने का बेहतर मौका है  क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 में अपने राजस्व को लगभग दोगुना कर दिया जो 1,430 करोड़ रुपये से 2,800 करोड़ रुपये हो गई। अब यह 1 अरब डॉलर के राजस्व को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु स्थित कंपनी जिसका मूल्य 11.1 अरब डॉलर है वह अमेरिका में सूचीबद्धता के लिए करीब 25 अरब डॉलर तक के मूल्यांकन का लक्ष्य रख सकती है। बैजूस के आईपीओ को इस वजह से भी मदद मिलेगी कि इसने वाइटहैट जूनियर का अधिग्रहण किया है जो बच्चों को कोडिंग सिखाता है और इसके अलावा अमेरिका की शैक्षणिक गेमिंग कंपनी ओस्मो का अधिग्रहण किया है। हाल ही में एक साक्षात्कार में कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) बैजू रवींद्रन ने कहा कि आईपीओ कंपनी के लिए एक स्पष्ट विकल्प है। उन्होंने कहा, ‘भारत से बाहर कंपनी को एक बड़ी सार्वजनिक कंपनी बनाना एक बड़ी महत्वाकांक्षा है।’
सलाहकार कंपनी ईवाई इंडिया में ई-कॉमर्स और उपभोक्ता इंटरनेट के पार्टनर और नैशनल लीडर पाहवा ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति में निवेशकों की धारणाएं स्टार्ट-अप के लिए उच्च वृद्धि, तेज गति वाले नवाचार के वातावरण में पूंजी तक पहुंच बनाने के लिए बाधाएं पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘आईपीओ के सूचीबद्ध होने से निवेशकों और उद्यमियों दोनों को ही वृद्धि क्षमता को भुनाने का अवसर मिलेगा।’ कोविड-19 महामारी की वजह से फूड डिलिवरी कंपनी जोमैटो की मुनाफे की राह में भी तेजी आई है। हाल ही में जोमैटो के सह.संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने कर्मचारियों को ईमेल के जरिये कहा था कि कंपनी अगले साल आईपीओ लाने की योजना बना रही है। गोयल ने कहा कि कंपनी के पास बैंक में करीब 25 करोड़ डॉलर नकदी है जो उसके इतिहास में सबसे ज्यादा है। टाइगर ग्लोबल, टेमासेक, बैली गिफ्फ ॉर्ड और ऐंट फ ाइनैंशियल जैसे प्रमुख निवेशकों ने मौजूदा दौर में भाग लिया और उनका अनुमान है कि बैंक की नकदी 60 करोड़ डॉलर तक हो जाएगी।
लॉकडाउन से प्रभावित हुए जोमैटो ने मई में कहा कि यह अपने 13 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाएगी जिससे करीब 520 कर्मचारी प्रभावित होंगे। लेकिन जुलाई में कंपनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 के लिए उसका राजस्व 105 फ ीसदी बढ़कर 39.4 करोड़ डॉलर हो गया जबकि घाटा करीब 6 फ ीसदी बढ़कर 29.3 करोड़ डॉलर तक हो गया। एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च ने हाल ही में जोमैटो का आकलन 5 अरब डॉलर तक रहा जो पहले के 3.5 अरब डॉलर के पहले मूल्यांकन के हिसाब से यह एक बड़ी वृद्धि है। विश्लेषकों ने कहा कि जोमैटो अपनी सूचीबद्धता के लिए करीब 7 अरब डॉलर के मूल्यांकन का लक्ष्य रख सकती है। मीणा ने कहा कि विदेश में सूचीबद्धता के लिए भारतीय कंपनियों के लिए पैमाना चीन और अमेरिका जैसे बाजारों की कंपनियां हो सकती हैं। इनमें चीन की ई-कॉमर्स कंपनी पिंडुओडुओ (पीडीडी) और फूड डिलिवरी कंपनी मीटुआन डियनपिंग शामिल हैं।
सॉफ्टबैंक समर्थित कैब एग्रीगेटर कंपनी ओला भी भारत में अगले कुछ वर्षों में अपना आईपीओ लाने की योजना बना रही है। बेंगलूरु की कंपनी का मुकाबला अमेरिका की प्रतिद्वंद्वी कंपनी उबर से है जिसने पिछले साल आईपीओ की धीमी रफ्तार देखी थी। लॉकडाउन के दौरान ओला में भारी मंदी की स्थिति देखी गई। मई में ओला ने 1,400 कर्मचारियों को कंपनी से निकाल दिया जो उसके कार्यबल का 33 फ ीसदी से अधिक हिस्सा था क्योंकि कोविड-19 की वजह से परिवहन उद्योग ठप पड़ गया था।
लेकिन अब हालात में सुधार नजर आ रहा है। कंपनी कोविड से पहले के दौर की तुलना में ज्यादातर प्रमुख शहरों में 50 फीसदी से अधिक सवारियों को सेवाएं दे रही है। ओला का आखिरी मूल्यांकन करीब 6 अरब डॉलर तक था। विश्लेषकों ने कहा कि सूचीबद्धता के लिए यह करीब 12 अरब डॉलर के मूल्यांकन को लक्षित कर सकती है।
ईवाई के पाहवा ने कहा, ‘विदेशी बाजारों में सूचीबद्धता से भी व्यापक निवेशक आधार को अपील करने में मदद मिलेगी और इससे मौजूदा निवेशकों को बाहर निकालने के लिए और अधिक रास्ते उपलब्ध होंगे।’

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First Published - October 7, 2020 | 11:00 PM IST

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