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उप्र और केंद्र की तनातनी ने ली किताब की शक्ल

Last Updated- December 06, 2022 | 10:00 PM IST

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार और केंद्र के बीच चल रही तनातनी ने अब किताब की शक्ल हासिल कर ली है।


भरपूर धन देने और केंद्रीय संसाधनों का समुचित उपयोग न कर पाने के केंद्र सरकार के आरोपों की हवा निकालने के लिए मायावती सरकार ने ‘राज्यों का विकास, केंद्रीय सहायता का सच’ के नाम से एक पुस्तिका तैयार की है।


तमाम केंद्रीय योजनाओं और सहायता का कच्चा-चिट्ठा खोलती इस पुस्तक को समूचे प्रदेश में बांटा जाएगा। किताब के ज्यादातर भाग में प्रदेश सरकार के खर्चों का ब्यौरा देने के साथ ही केंद्र की यूपीए सरकार पर जम कर हमला बोला गया है। पुस्तक के जरिए एक बार फिर मायावती का केंद्र सरकार से मांगे गए 80,000 करोड़ रुपये के पैकेज के न मिलने का दर्द सामने आया है।


उत्तर प्रदेश की मुखिया के मुताबिक अभी तक पैकेज पर कोई फैसला नही लिया गया है। स्पेशल एरिया इन्सेन्टिव पैकेज का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि उत्तराखंड, हिमांचल व कुछ अन्य राज्यों को यह पैकेज दे कर वहां लगने वाले उद्योगों को करों में छूट दी गयी है जबकि बुंदेलखंड की हालत इन राज्यों से कहीं ज्यादा खराब है। राज्य सरकार ने बुंदेलखंड के लिए भी इस पैकेज की मांग की है।


उपरोक्त किताब में मायावती ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार से मिले धन का पूरा उपयोग किया गया है और सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय औसत से भी कम पैसा दिया गया है। केंद्र के भेदभाव का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा है कि राज्यों को केंद्रीय राजस्व का अंश संवैधानिक व्यवस्था के तहत मिलता है और यह कोई खैरात नही है।


माया सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के मुताबिक केंद्र लगातार उत्तर प्रदेश के साथ पक्षपात कर रहा है। उन्होंने बताया कि गरीबों के आवास, जेएनयूआरएम आदि योजनाओं में भी प्रदेश को कम धन दिया गया है साथ ही कई परियोजनाओं के लिए भी कम धन दिया गया है।

First Published - May 7, 2008 | 9:55 PM IST

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