facebookmetapixel
Advertisement
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के अगले चरण की तैयारी, 10,000 सर्किट किमी ट्रांसमिशन नेटवर्क बनेगापश्चिम एशिया संकट से सबक, भारत को मजबूत करने होंगे तेल भंडार और घरेलू उत्पादनकैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ की गोबरधन योजना को दी मंजूरी, CBG उत्पादन बढ़ाने पर जोरविकसित भारत के लिए 21 साल तक 9.25% विकास दर जरूरी: अशोक लाहिड़ी भारत के ई20 लक्ष्य पर ब्राजील का भरोसा, जैव ईंधन को बताया पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरीउदारीकरण के 35 साल: भारत ने चीन से पहले दवा बनानी शुरू की लेकिन अब चीन वर्षों आगेतकनीक के सहारे बाजार सुधार पर जोर, सेबी लाएगा सेतु पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टमनजारा टेक्नॉलजीज ने तरजीही इश्यू से 733.5 करोड़ रुपये जुटाए, नए CEO रेमंड स्टॉफर करेंगे सबसे बड़ा निवेशम्युचुअल फंड कंपनियों की नई रणनीति, अलग-अलग थीम पर फोकस करेंगी नई स्कीमेंरक्षा शेयरों का जलवा: जून तिमाही में 2.5 लाख करोड़ रुपये बढ़ा मार्केट कैप, लंबी अवधि में ग्रोथ की उम्मीद

उत्तर प्रदेश : शराब बिक्री में कमी से राजस्व को झटका

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 5:11 AM IST

कोरोना संकट ने उत्तर प्रदेश के साल दर साल बढ़ते आबकारी राजस्व में जबरदस्त सेंध लग दी है। शराब बिक्री में इस साल आबकारी राजस्व में कम से कम 25 से 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा सकती है। योगी सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 35,000 करोड़ रुपये के आबकारी राजस्व का लक्ष्य रखा है। लॉकडाउन के चलते मई से शुरू हुए आबकारी सत्र के पहले ही पखवाड़े में 4,000  करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि 12 महीने के बजाय अब राजस्व लक्ष्य 11 महीने से भी कम समय में पाना होगा जो असंभव है। प्रदेश में 22 मार्च से लेकर 3 मई तक शराब की दुकानें बंद रहीं और आबकारी सत्र पहली बार अप्रैल की जगह मई में शुरू हुआ। मई में शराब की बिक्री की अनुमति मिलने के बाद दुकानों तक माल पहुंचने में भी एक सप्ताह लग गया। आबकारी विभाग का कहना है कि पूरे एक महीने तक दुकाने खुलने का समय भी कम रहा और रात 10 बजे के बजाय 7 बजे ही बंद करने का आदेश था। इसके चलते भी राजस्व पर असर पड़ा। उनका कहना है कि कोरोना संकट और कुछ महीनों तक जारी रहा तो राजस्व के मामले में खासी चपत लग जाएगी।
उत्तर प्रदेश में लाकडाउन के 45 दिनों के बाद खुली शराब की दुकानों पर शुरुआती तेजी के बाद बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है। बड़ी तादाद में मजदूरों व रोज कमाई वालों की बेकारी का असर देसी शराब की दुकानों पर देखा जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में देशी शराब की बिक्री में 45 फीसदी तक कमी दर्ज की जा रही है तो ग्रामीण इलाकों और कस्बों में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी जा रही है। देशी शराब ही नही, बीयर की बिक्री पर भी बुरा असर दिख रहा है। बड़े शहरों में बीयर की बिक्री में मई और जून में भारी गिरावट देखी गयी है। बीयर की बिक्री शहरों में 45 से 50 फीसदी घटी है तो गावों में यह 50 फीसदी के पार निकल गई है। हालात यह है कि अब देसी शराब व बीयर के कई कारोबारी अपना लाइसेंस सरेंडर करने की बात करने लगे हैं।
अंग्रेजी शराब की बिक्री पर उतना असर तो नहीं पड़ा है, लेकिन बार, मॉडल शॉप बंद होने और देर शाम दुकानें न खुलने के कारण बड़े शहरों में इसकी बिक्री 25 से 30 फीसदी तक घट गई है। ग्रामीण इलाकों व कस्बों में तो अंग्रेजी शराब की बिक्री 35 फीसदी तक कम हो गई है। शराब कारोबारियों का कहना है कि कोरोना काल में लोगों की आमदनी घटी है, ऊपर से दाम भी बढ़ गए हैं। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि त्योहारी सीजन शुरू होते ही और पाबंदियां घटने के साथ बिक्री फिर सुधर सकती है।

Advertisement
First Published - July 6, 2020 | 11:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement