facebookmetapixel
Advertisement
Infosys Q1 Results: अनिश्चित वैश्विक माहौल से इन्फोसिस ने घटाया ग्रोथ आउटलुक, मुनाफा 12.2% बढ़ासुधारों में देरी से अधर में लटक जाएगा हमारे युवाओं का भविष्य: मोंटेक सिंह आहलुवालिया1991 के आर्थिक सुधारों के 35 साल: उपलब्धियां बड़ी, लेकिन अधूरे एजेंडे अब भी भारत के सामनेफूड डिलिवरी बाजार में उतरेगी फ्लिपकार्ट, अगस्त-सितंबर में ONDC के जरिए होगी शुरुआतसरकार ने ई-कॉमर्स FDI नियमों में दी बड़ी राहत, निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मंजूरीInfosys में नेतृत्व परिवर्तन: आशिष कुमार दास होंगे नए सीईओ, 1 अप्रैल 2027 से संभालेंगे कमानतेल में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका, सोना 2 फीसदी टूटाहूती हमलों से तेल बाजार में उथल-पुथल, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचाकच्चे तेल में उछाल से शेयर बाजार की बिगड़ी चाल, सेंसेक्स 364 अंक टूटाSEBI का बड़ा प्रस्ताव: ऑनलाइन विवाद निपटान प्रणाली होगी तेज, MII संभालेंगे ओडीआर की जिम्मेदारी

यूपी में सरकारी मरहम ठुकराया

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 9:20 PM IST

पहले बारिश और अब गिरते दामों के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों के आंसू पोंछने का फैसला किया है।


हालांकि सरकार के इस कदम से किसानों को कोई राहत मिलती नही दिख रही है। किसानों को राहत पहुंचाने का सरकार का फैसला खुद किसानों के गले नही उतर रहा है।  उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कृषि विभाग के प्रमुख सचिव हरमिंदर राज सिंह की अध्यक्षता में हुयी बैठक में किसानों से सीधे आलू खरीदने का फैसला लिया गया।


सरकार ने आनन-फानन में इस काम के लिए 10 लाख रुपये की रकम जारी भी कर दी। सरकार मे औद्योगिक विपणन विभाग और प्रादेशिक कोऑपरेटिव विभाग को 30 अप्रैल तक 11000 मीट्रिक टन आलू खरीदने का लक्ष्य दिया है। किसानों की मुश्किलें तब बढ़ गयीं, जब सरकार ने आलू की दर 2.50 प्ति किलो तय की और वह भी उत्तम क्वालिटी के लिए।


बीते दो दिनों से सरकारी एजेंसियां खरीद केंद् खोल कर बैठी हैं जबकि किसान आस-पास फटक भी नही रहे हैं।  किसानों का कहना है कि 2.50 प्ति किलो की दर पर आलू बेचना घाटे का सौदा है। किसानों की नाराजगी की बड़ी वजह आलू की ग्रेडिग करना है, जिसके चलते छंटनी के बाद बचे आलू को बेचना मुश्किल होगा। किसानों की नाराजगी के चलते अभी सरकारी खरीद का खाता भी नही खुला है। लखनऊ के मंडी परिसर में खरीद केंद्र पर एक भी किसान ने अपना माल नही बेचा।

Advertisement
First Published - April 12, 2008 | 1:16 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement