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विदेशियों को मोह लियो रे आगरा के जूते

Last Updated- December 07, 2022 | 12:45 AM IST

इस वक्त बाजार में आगरा के जूते सातवें आसमान पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगरा में बने जूतों की मांग बढ़ने के साथ ही विदेशी आयातकों और जूतों से संबंधित उत्पादों (कंपोनेंट) के निर्माता इस ओर टकटकी लगाए हुए हैं।


यही वजह है कि आयातकों व निर्माताओं ने इस क्षेत्र में कारोबार संबंधी संभावना की तलाश के लिए अपने अधिकारियों को आगरा भेजना शुरू कर दिया है। आगरा में जूतों का 1,500 करोड़ रुपये का निर्यात बाजार है।

उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह सोमवार को ब्राजीलियाई एसोसिएशन ऑफ शू एंड लेदर कंपोनेंट इंडस्ट्रीज की नेतृत्व वाली ब्राजीलियन एक्सपोर्ट एंड इंवेस्टमेंट प्रोमोशन एजेंसी (एपेक्स-ब्राजील) की प्रतिनिधि मंडल और आगरा के जूता निर्यातकों की एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक के दौरान जूते और जूते संबंधी सामग्रियों की द्विपक्षीय कारोबार पर चर्चा की गई।

इसी दौरान आगरा जूता निर्यातक और निर्माता चैंबर (एएफएमईसी) के सदस्यों ने साल 2010 में आयोजन किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय फूटवेयर फैशन के आगामी ट्रेंड्स का भी संक्षेप परिचय दिया। वासन ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रदीप वासन ने बिजनैस स्टैंडर्ड से बताया कि ब्राजीलियन कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी की प्रतिनिधि मंडल और उनके सहयोगी अगरा में अपने उत्पादों की मार्केटिंग को लेकर काफी उत्साहित हैं।

वासन ने यह भी बताया कि जूते से संबंधित सामग्री का सबसे ज्यादा आयात आगरा के जूता निर्माताओं द्वारा ही किया जाता है। यही नहीं शहर में जूता बनाने में सबसे ज्यादा खर्च इन्हीं सामग्रियों पर लग जाता है। लिहाजा यहां के जूता निर्माता जूते की आवश्यक सामग्री पर होने वाली खर्च को कम करने की जुगत में हैं। लेकिन इस सब के बीच निर्यातक जूते की गुणवत्ता से साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं।

बैठकों के दौरान प्रतिनिधि मंडल द्वारा जूते से जुड़े आवश्यक उत्पादों मसलन सोल्स और अस्तर आदि की प्रदर्शनी दिखाई गई, जो किफायती और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर थी। वासन ने बताया कि एएफएमईसी से जुड़ी कुछ कंपनियों ने ब्राजीलियन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के साथ समझौता करने के लिए अपनी इच्छा प्रकट की है। वासन ने बताया कि आगरा स्थित चमड़ा जूता उद्योग की निर्यात क्षमता करीब 10,000 करोड़ रुपये की है।

चमड़े के उत्पादों का निर्यात

देश – राशि (डालर में) – हिस्सेदारी
                                    (प्रतिशत में)
हांगकांग – 19.2 करोड़ – 34.79
इटली – 9.4 करोड़ – 16.97
जर्मनी – 2.15 करोड़ – 3.89
अमेरिका – 58 लाख – 1.05
इंग्लैंड – 18.3 लाख – 0.33

First Published - May 21, 2008 | 11:18 PM IST

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