facebookmetapixel
अश्लील AI कंटेंट पर सरकार सख्त: Grok की व्यापक समीक्षा करें X, 72 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का आदेशमहिंद्रा समूह के CEO अनिश शाह का जरूरी संदेश: बड़ा सोचो, कम करो लेकिन उसे अच्छे से क्रियान्वित करोAdani Total ने घटाई CNG और PNG की कीमतें, आम उपभोक्ताओं को मिलेगी सीधी राहतछोटे निर्यातकों को बड़ी राहत: सरकार ने ₹7,295 करोड़ का निर्यात सहायता पैकेज और ऋण गारंटी योजना का किया ऐलानदेवयानी-सफायर के विलय को मिली मंजूरी, भारत में केएफसी-पिज्जा हट के नेटवर्क को करेगा मजबूतसुप्रिया लाइफ साइंसेज ने अंबरनाथ में नई इकाई से विनियमित वैश्विक बाजारों में दांव बढ़ायाECMS के तहत 22 और प्रस्ताव मंजूर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में ₹41,863 करोड़ का निवेश!2026 में भारतीय विमानन कंपनियां बेड़े में 55 नए विमान शामिल करेंगी, बेड़ा बढ़कर 900 के करीब पहुंचेगाIndia manufacturing PMI: नए ऑर्डर घटे, भारत का विनिर्माण दो साल के निचले स्तर पर फिसलाभारत में ऑटो पार्ट्स उद्योग ने बढ़ाया कदम, EV और प्रीमियम वाहनों के लिए क्षमता विस्तार तेज

मंदी की कालिख से हीरा बना कोयला

Last Updated- December 09, 2022 | 3:57 PM IST

भारतीय हीरों की मांग कम होने की वजह से हीरों के कटिंग, फिनिशिंग और पैकिंग का काम कम हो गया है।


नतीजतन इस वर्ष लाखों कारीगारों को काम से निकाला गया, कई बड़ी दिग्गज कंपनियों के हाथ से डायमंड ट्रेडिंग कंपनी (डीटीसी) का काम निकल गया।

साल के अंतिम महीनों में लगभग 90-100 दिन पूरी तरह से हीरा कारखाने बंद पड़े रहे और हीरा उद्योग का काम घटकर सिर्फ 30-40 फीसदी ही बचा ।

वर्ष 2008 में बुरी तरह से परेशान होने वाले इस उद्योग के लिए वर्ष 2009 एक नई उम्मीद लेकर जरूर आ रहा है लेकिन पूरे देश में लगभग 22 से 25 लाख लोगों को काम देने वाले इस उद्योग में काम करने वालों की संख्या सिर्फ 10 से 15 लाख लोगों की ही रहने वाली है।

दुनिया में 10 बिकने वाले हीरों में से 9 भारत में तराशे जाते हैं।  कारोबार सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा था, लेकिन वर्ष 2008 की मंदी ने इसकी चाल को पलट दिया। इसमें सबसे मुख्य वजह अमेरिकी मंदी से पैदा हुई वैश्विक आर्थिक तंगी रही।

भारतीय हीरों में से 70 फीसदी हीरे अमेरिका जाते थे। मुंबई में हीरा उद्योग के विकास के लिए स्थापित सीप्ज (सांताक्रु ज इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन)में मंदी की मार और कंपनियों के बेवफाई के कारण कारीगारों के बेरोजगारी की कहानी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

सीप्ज में कुल 181 डायमंड कंपनियों के कारखाने हैं। औसतन एक कंपनी में 600 कारीगर काम करते हैं। यहां लगभग 50 फीसदी से ज्यादा डायमंड इकाइयों में ताला लग चुका है। यही हाल मुंबई के दूसरे जगहों जैसे दहिसर, घाटकोपर, गोरेगांव, कांदिवली, अंधेरी और विरार जैसे मुख्य केन्द्रों पर हुआ है।

डायमंड मार्केट के जानकार हार्दिक हुंडिया कहते हैं कि अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों से मांग पिछले 6 महीनों में कम होने या कहे लगभग बंद होने, कच्चे हीरों की कीमतों में बढ़ोतरी और जरूरत से ज्यादा लोगों को काम देने की वजह से हुआ है।

महेन्द्र सी डायमंड लिमिटेड के चेयरमैन संजय शाह मानते हैं कि 2009 हमारे लिए एक आशा की किरण जरूर है, कारोबार में सुधार होगा लेकिन मजदूरों की संख्या कम जरुर करनी पड़ेगी। भारतीय हीरा उद्योग में इस बार लगभग 40 फीसदी की गिरावट हुई है।

First Published - December 30, 2008 | 8:52 PM IST

संबंधित पोस्ट