संप्रभुता, व्यावहारिकता और विकल्प: भारत के लिए जोखिम और समझदारी के बीच का संतुलन
अभी 2026 की शुरुआत ही हुई है और ‘संप्रभुता’ शब्द खूब चर्चा में आ चुका है। भारतीय राजनीति में यह चर्चा का विषय है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत के संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं तब तो यह विस्फोटक ही हो जाता है। या तब भी जब उनके राजदूत सर्जियो गोर […]
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Editorial: ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘हथौड़ा’ और आगे की राह
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्कों को लेकर जो निर्णय दिया है उसे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल मे अब तक का सबसे बड़ा झटका करार दिया जा सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि जरूरी नहीं कि प्रशासन द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को न्यायिक मंजूरी […]
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सुरक्षा के नाम पर अव्यवस्था और ‘चीनी’ रोबोडॉग का स्वदेशी दावा, AI इम्पैक्ट समिट पर उठे गंभीर सवाल
एआई इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य उभरते हुए भारत की प्रतिभा को प्रदर्शित करना था। देश को अपनी संगठनात्मक क्षमता और वर्तमान में चर्चित इस उद्योग में अपनी बहुआयामी भूमिका का प्रदर्शन करना था। लेकिन यह गलत कारणों से चर्चा में रहने वाली एक ऐसी घटना साबित हुई जिसमें बार-बार सफाई देनी पड़ी। अनेक प्रतिनिधियों और […]
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Editorial: शहरी निकायों को रिकॉर्ड फंडिंग, लेकिन संस्थागत सुधार के बिना असर सीमित
सोलहवें वित्त आयोग ने शहरी स्थानीय निकायों या प्रशासनों (यूएलजी) को राजकोषीय आवंटन बढ़ाया है। उसने यूएलजी के समग्र अनुदान में 130 फीसदी इजाफा किया है। पंद्रहवें वित्त आयोग के 1.55 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर यह राशि 2026 से 31 तक की अवधि के लिए 3.56 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके […]
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