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नकली एजेंटों का नया जाल: इंश्योरेंस रिफंड के बहाने करोड़ों की लूट, व्हाट्सएप पर जाल बिछाकर दे रहे धोखा

साइबर ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर इंश्योरेंस रिफंड के नाम पर एक बुजुर्ग से करोड़ों की ठगी की, जिससे इंश्योरेंस स्कैम के नए तरीकों का खुलासा हुआ है।

Last Updated- June 27, 2025 | 8:49 PM IST
Fake Alert
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Freepik

मुंबई के 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति ने ऑनलाइन इंश्योरेंस रिफंड स्कैम में 2.36 करोड़ रुपये गंवा दिए। ठगों ने नवंबर 2024 में व्हाट्सएप के जरिए उनसे संपर्क किया और खुद को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI), नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) जैसे नियामक संस्थानों के अधिकारी बताए। उन्होंने सात बंद हो चुके इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम का रिफंड देने का वादा किया। शुरुआती प्रोसेसिंग फीस चुकाने के बाद, पीड़ित को अलग-अलग बहानों से कई और भुगतान करने को कहा गया। जब मई 2025 तक कोई रिफंड नहीं मिला, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने शिकायत दर्ज की।

नेशनल इंश्योरेंस डे: जानें विभिन्न प्रकार की ठगी और बचाव के तरीके

रिकवरी स्कैम

ठग लोग बंद हो चुकी पॉलिसी के बोनस या मेच्योरिटी राशि वापस दिलाने के झूठे वादे करते हैं। वे लीक हुए पॉलिसी डेटा का इस्तेमाल करते हैं और इंश्योरेंस एजेंट बनकर लोगों को लुभाते हैं।

EY फॉरेंसिक एंड इंटेग्रिटी सर्विसेज – फाइनेंशियल सर्विसेज के पार्टनर विक्रम बब्बर कहते हैं, “कभी-कभी वे गलत तरीके से बेची गई पॉलिसी के प्रीमियम रिफंड दिलाने का वादा करते हैं।”

इंश्योरेंस देखो के B2B2C बिजनेस वाइस प्रेसिडेंट और हेड पंकज गोयनका बताते हैं, “ठग विभिन्न बहानों से पैसे मांगते हैं। वे कानूनी, टैक्स या प्रशासनिक कारणों के लिए भुगतान मांगते हैं।”

इंश्योरेंस समाधान की को-फाउंडर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर शिल्पा अरोड़ा कहती हैं, “कभी-कभी वे पीड़ितों को यह कहकर नई पॉलिसी खरीदने के लिए मनाते हैं कि रिकवरी की राशि केवल सक्रिय पॉलिसी में ही जमा हो सकती है।”

एडधास लीगल से जुड़े एडवोकेट और पार्टनर यथार्थ रोहिला कहते हैं, “वास्तव में, ये ऑफर किसी इंश्योरेंस कंपनी से जुड़े नहीं होते। पैसे लेने के बाद ठग गायब हो जाते हैं।”

नकली पॉलिसी स्कैम

ठग असली एजेंट या ब्रोकर बनकर नकली पॉलिसी बेचते हैं। वे जाली डॉक्यूमेंट, वेबसाइट और हेल्पलाइन का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे भरोसेमंद लगें। प्रीमियम व्यक्तिगत UPI ID या बैंक खातों में लिया जाता है, और पीड़ितों को पॉलिसी नंबर और QR कोड के साथ नकली डॉक्यूमेंट मिलते हैं।

गोयनका कहते हैं, “ठग भरोसेमंद संस्थानों का नाम लेकर विश्वास जीतते हैं। वे दबाव बनाते हैं कि ऑफर सीमित समय के लिए है।”

लॉर्ड्स मार्क इंश्योरेंस ब्रोकिंग सर्विसेज चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अनीता उपाध्याय कहती हैं, “पीड़ितों को बहुत बाद में पता चलता है कि पॉलिसी नकली है, जब वे क्लेम करने की कोशिश करते हैं।”

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प्रीमियम डायवर्शन फ्रॉड

यह तब होता है जब कोई एजेंट, अकेले या इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी के साथ मिलकर, प्रीमियम को पॉलिसी जारी करने के बजाय अन्य कामों में इस्तेमाल करता है।

आनंद राठी इंश्योरेंस ब्रोकर्स से जुड़े विभव कुमार कहते हैं, “यह धोखाधड़ी तब होती है जब प्रीमियम नकद में लिया जाता है और एजेंट को ग्राहक का भरोसा होता है।”

सावधान रहने के संकेत

बॉम्बे हाई कोर्ट के साइबर क्राइम एडवोकेट प्राशांत माली कहते हैं, “ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए। अगर आपको अनचाहे ईमेल, SMS या कॉल आते हैं, जो पॉलिसी रद्द होने या जुर्माने से बचने के लिए तुरंत भुगतान करने को कहते हैं, तो सावधान रहें।”

उपाध्याय असामान्य रिटर्न या बोनस से सावधान रहने की सलाह देती हैं। अरोड़ा कहती हैं, “कोई भी जीवन इंश्योरेंस प्रोडक्ट प्रति वर्ष 5-6 प्रतिशत से अधिक गारंटीड रिटर्न नहीं देता।” माली असामान्य रूप से कम प्रीमियम वाले ऑफर से सावधान रहने की चेतावनी देते हैं।

रोहिला दबाव बनाने वाली रणनीतियों, जैसे सीमित समय के ऑफर, से सतर्क रहने को कहते हैं। बब्बर कहते हैं, “सोशल इंजीनियरिंग फ्रॉड में, ठग डर या लालच का इस्तेमाल करते हैं।”

प्रतिष्ठित बीमा कंपनियां कभी भी व्यक्तिगत खातों में पैसे ट्रांसफर करने, ओटीपी मांगने या गोपनीयता की मांग नहीं करतीं। कुमार कहते हैं, “वास्तविक बीमा भुगतान हमेशा बीमा कंपनी के आधिकारिक बैंक खाते में या अधिकृत पेमेंट गेटवे के जरिए किए जाते हैं।”

अंत में, फोन पर बीमा खरीदने से बचें। अरोड़ा कहती हैं, “हमेशा विक्रेता से व्यक्तिगत रूप से मिलें, उनकी साख जांचें, और उनका IRDAI लाइसेंस देखें।”

First Published - June 27, 2025 | 8:49 PM IST

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