बेंचमार्क सूचकांकों में शुक्रवार को 1.6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और इस तरह से उसने अपनी साप्ताहिक गिरावट को 4 फीसदी पर पहुंचा दिया, जो पांच महीने में सबसे ज्यादा है। हालिया गिरावट तब दर्ज हुई जब अमेरिकी सूचकांकों ने गुरुवार को साल 2020 के बाद अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में बढ़ोतरी के बीच सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की।
आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता, कीमतों में बढ़ोतरी और सख्त मौद्रिक नीति की व्यवस्था ने निवेशकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हुई है।
बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 2 फीसदी तक टूटा और उसके बाद कुछ नुकसान की भरपाई कर अंत मेंं 866 अंकों की गिरावट के साथ 54,835 पर बंद हुआ। दूसरी ओर निफ्टी 271 अंकों की गिरावट के साथ 16,411 अंक पर कारोबार की समाप्ति की।
अमेरिका की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों को शामिल करने वाला नैसडेक कम्जोजिट इंड़ेकक्स गुरुवार को 5 फीसदी टूट गया था, जो जून 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। एसऐंडपी 500, 3.5 फीसदी टूटा जबकि डाउ में 3.1 फीसदी का नुकसान दर्ज हुआ। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुक्रवार को 5,517 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि देसी संस्थागत निवेशकों ने 3,015 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बुधवार को फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरोंं मेंं 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो 22 साल में सबसे ज्यादा है लेकिन भविष्य में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना को खारिज किया।
फेड के आश्वासन से राहत भरी तेजी देखने को मिली। हालांकि सेंटिमेंट खराब हो गया क्योंकि निवेशकों ने सख्त मौद्रिक नीति, कंपनियों के लाभ में संभावित गिरावट और कीमत बढ़ोतरी को लेकर पडऩे वाले असर का आकलन शुरू कर दिया।
यूक्रेन युद्ध के कारण जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी और चीन में कोविड जैसे हालात भी निवेशकों के सेंंटिमेंट पर असर डाल रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें इस हफ्ते 8 फीसदी बढ़ी और यह 115.4 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। क्रूड की कीमतें तब बढ़ी जब यूरोपियन यूनियन ने छह महीने में रूस से तेल आयात समाप्त करने की योजना का ऐलान किया। मार्च के बाद ब्रेंट क्रूड ने एक के बाद दूसरे हफ्ते साप्ताहिक बढ़त दर्ज की।
बैंक ऑफ इंगलैंड ने गुररुवार को चेतावनी दी थी कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था मंदी मेंं चली जाएगी। ब्रिटिश केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर 1 फीसदी कर दी, जो 13 साल का सर्वोच्च स्तर है।
सख्त मौद्रिक स्थिति से बॉन्ड बाजारोंं में बिकवाली देखने को मिली। 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल नवंबर 2018 के बाद के सर्वोच्च स्तर 3.09 फीसदी पर कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों ने इस पर चिंता जताई कि आखिर केंद्रीय बैंक के कदम महंगाई पर लगाम कस सकते हैं या नहीं।
अल्फानीति फिनटेक के संस्थापक यू आर भट्ट ने कहा, ये आपूर्ति के मसले हैं। मैं नहीं मानता कि ब्याज दरों मेंं बढ़ोतरी आपूर्ति से संबंधित महंगाई के मामले का निपटारा कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक कुछ नहींं कर सकता क्योंकि महंगाई बढ़ चुकी है। ऐसे में उन्होंंने अपना काम कर दिया है। मुझे लगता है कि अभी बाजार सीमित दायरे में कारोबार करेगा। एफपीआई ने काफी बिकवाली की है, लेकिन देसी निवेशकों ने इसकी जरूरत से ज्यादा भरपाई कर दी।