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विनिवेश की राह होगी आसान

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सार्वजनिक उपक्रमों को स्वामित्व में बदलाव के बावजूद सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों से छूट जारी रहेगी

Last Updated- January 04, 2023 | 12:04 AM IST
investment

सरकार सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) नियम से छूट एक खास अव​धि के लिए जारी रख सकती है। इस दौरान यदि सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण हो जाता है अथवा उसके स्वामित्व में बदलाव होता है तो भी यह छूट जारी रहेगी। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। नए नियम के प्रभावी होने से आईडीबीआई बैंक को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से छूट जारी रहेगी भले ही उसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी क्यों न बेच दें।

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक सूचीबद्धता मानदंडों में एक नई धारा जोड़ी है। इन मानदंडों के तहत सभी सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता को अनिवार्य किया गया है। इसका उल्लेख प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अ​धिनियम 1957 में किया गया है। वित्त मंत्रालय के आ​र्थिक मामलों के विभाग की ओर से जारी अ​धिसूचना में कहा गया है, ‘इस नियम का उद्देश्य छूट की वैधता को एक निर्दिष्ट अव​धि के लिए जारी रखना है, भले ही ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों के नियंत्रण में बदलाव ही क्यों न हो जाए।’

नया संशोधन 2 जनवरी से प्रभावी हो गया है। यह सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों पर लागू होगा और इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि उसमें सरकार की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर कितनी हिस्सेदारी है। इससे पहले सरकार ने कहा था कि वह सार्वजनिक उपक्रमों को न्यूनतम शेयरधारिता प्रावधानों से छूट को जारी रख सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘यह एक ऐसा प्रावधान है जो सरकार के संभावित नीतिगत विनिवेश को रफ्तार देगा।’

अ​धिकारी ने कहा कि इस नियम से सार्वजनिक उपक्रमों के लिए ​स्थिति कहीं अ​धिक साफ होगी और यह सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करेगा। सरकार फिलहाल आईडीबीआई बैंक, ​शिपिंग कॉरपोरेशन, कंटेनर कॉरपोरेशन स​हित कई सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। जहां तक आईडीबीआई बैंक का सवाल है तो एलआईसी ने 2019 में आईडीबीआई बैंक में नियंत्रणयोग्य हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया था। आईडीबीआई बैंक में एलआईसी की 49.24 फीसदी और सरकार की 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है। इन दोनों को​ मिलाकर कुल शेयर हिस्सेदारी 94.72 फीसदी हो जाती है जबकि सार्वजनिक शेयरधारिता महज 5.28 फीसदी है।

अ​धिकारियों ने बताया कि सरकार नए खरीदार को एक नि​श्चित समय के भीतर न्यूनतम शेयरधारिता मानदंडों को पूरा करने का अवसर प्रदान करेगी। पिछले महीने सरकार ने आईडीबीआई बैंक के लिए प्रारं​भिक बोली जमा कराने की अंतिम समय-सीमा को 7 जनवरी तक बढ़ा दिया था। सफल बोलीदाता को आम शेयरधारकों से 5.28 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए खुली पेशकश लानी होगी।

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First Published - January 3, 2023 | 10:34 PM IST

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