भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद विश्लेषकों के लिए सबसे पसंदीदा शेयर के तौर पर अपनी जगह पक्की कर ली है। इस सरकारी बैंक की कमाई ने बाजार के अनुमानों को अच्छे खासे अंतर से पीछे छोड़ दिया है। लगातार तीसरी तिमाही में एसबीआई की मुख्य कमाई प्राइवेट बैंकों से बेहतर रही है। इस कारण भी कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने शेयर पर अनुमान और कीमत लक्ष्य बढ़ा दिए हैं।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज़ ने वित्त वर्ष 26-28 के लिए कमाई का अपना अनुमान 2 से 4 फीसदी बढ़ा दिया है और कीमत लक्ष्य बढ़ाकर 1,225 रुपये कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज ने भी वित्त वर्ष 27 के लिए अपनी कमाई का अनुमान 3 फीसदी और वित्त वर्ष 28 के लिए 4.3 फीसदी बढ़ा दिया है। उसने वित्त वर्ष 27 के लिए रिटर्न ऑन ऐसेट (आरओए) और रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) क्रमशः 1.1 फीसदी और 15.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।
ब्रोकरेज ने भी शेयर कार कीमत लक्ष्य बढ़ाकर 1,300 रुपये कर दिया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार एसबीआई के शेयर को ट्रैक करने वाले 49 विश्लेषकों में से 42 ने इसे खरीद की रेटिंग दी है।
एक्सचेंजों में एसबीआई के शेयर की कीमत नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 7.8 फीसदी बढ़ी और इंट्राडे ट्रेडिंग में 1,150 रुपये प्रति शेयर के नए सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। शेयर ने जून 2024 के बाद से एक दिन में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की।
शनिवार को भारतीय स्टेट बैंक ने अब तक का सबसे ज्यादा 21,028 करोड़ रुपये का तिमाही लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 24.5 फीसदी ज्यादा है। इसकी शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) पिछले साल की तुलना में 9 फीसदी बढ़कर 45,190 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) 2 आधार अंक बढ़कर 2.99 फीसदी पर पहुंच गया।
हालांकि, टैक्स रिफंड पर ब्याज को समायोजित करने के बाद मुख्य एनआईएम तिमाही आधार पर 1 आधार अंक कम हो गया। प्रबंधन को उम्मीद है कि आरबीआई के हालिया नियामकीय दिशानिर्देश से रीट्स और विलय व अधिग्रहण फाइनैंसिंग में उधारी के मौके खुलेंगे। इससे पहले से ही मजबूत कॉरपोरेट फंडिंग और बढ़ेगी। जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने अपनी खरीद की रेटिंग बरकरार रखी और कीमत लक्ष्य 1,140 रुपये से बढ़ाकर 1,250 रुपये कर दिया।
एसबीआई की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार जारी रहा। इसमें सकल और शुद्ध फंसे कर्ज में तिमाही आधार पर 3 आधार अंक की कमी आई। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां और शुद्ध एनपीए अनुपात में भी तिमाही आधार पर क्रमशः 15 आधार अंक और 3 आधार अंक का सुधार हुआ और यह 1.57 फीसदी और 0.39 फीसदी रहा। विश्लेषकों ने बताया कि कई सालों में एसबीआई की यह सबसे अच्छी परिसंपत्ति गुणवत्ता में से एक थी।