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ERP लाइसेंस के लिए संघर्ष जारी, छोटे बाजार के बावजूद बड़ी कतार

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ERP License: SEBI ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों इक्रा, क्रिसिल और केयरऐज के स्वामित्व वाली इकाइयों को ईआरपी पंजीकरण दिया है।

Last Updated- May 16, 2024 | 11:05 PM IST
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करीब एक दर्जन इकाइयों ने या तो ईएसजी रेटिंग प्रोवाइडर (ERP) का लाइसेंस हासिल कर लिया है या फिर इसे हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। बाजार शैशवास्था में होने के कारण इस क्षेत्र में राजस्व का स्रोत सीमित नजर आ रहा है।

अभी तक बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों इक्रा, क्रिसिल और केयरऐज के स्वामित्व वाली इकाइयों को ईआरपी पंजीकरण दिया है। इसके अलावा वोटिंग एडवाइजरी फर्म स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज (SES) की इकाई एसईएस ईएसजी रिसर्च को भी पंजीकरण का सर्टिफिकेट मिल गया है।

प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म आईआईएएस की ईएसजी स्कोरिंग सहायक भी पंजीकरण हासिल करने की प्रक्रिया में है। वैश्विक दिग्गज एमएससीआई ईएसजी रेटिंग्स और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप को भी बाजार नियामक सेबी से पंजीकरण सर्टिफिकेट की प्रतीक्षा हैं।

पिछले साल सेबी ने ईएसजी स्कोरिंग मुहैया कराने वाली इकाइयों का नियामक के पास अनिवार्य तौर पर पंजीकरण कराने का निर्देश दिया था ताकि पारदर्शिता और मानक बरकरार रहे।

उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि ईआरपी दो मॉडल अपना सकते हैं : यूजर पे या इश्युअर पे। एक यूजर म्चुचुअल फंड, बैंक या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक हो सकता है जबकि इश्युअर एक सूचीबद्ध कंपनी होगी।

ईएसजी में निवेश ने विकसित दुनिया में बड़े पैमाने पर जोर पकड़ा है, लेकिन भारतीय बाजारों में ऐसा रुझान दिखना बाकी है। स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज (SES) के एमडी जे एन गुप्ता ने कहा कि शुरुआती उत्साह के बाद यहां बहुत ज्यादा कंपनियों के लिए गुंजाइश नहीं बनेगी क्योंकि इसके बहुत ज्यादा सबस्क्राइबर नहीं हैं।

भारत में सूचीबद्ध कंपनियों को ईएसजी रेटिंग हासिल करने की जरूरत नहीं होती। इस बीच अगर किसी फंड के लिए उन कंपनियों में निवेश करना अनिवार्य हो जिसका ईएसजी मानकों पर ज्यादा स्कोर हो तो वह किसी ईआरपी की सेवाएं ले सकता है।

भारत में ईएसजी स्कोर के लिए बहुत ज्यादा मांग नहीं है, लेकिन रेटिंग प्रदाताओं का कहना है कि वे इसे विकसित करने पर काम कर रहे हैं। साथ ही ज्यादा कंपनियां तथाकथित बिजनेस रिपोर्टिंग ऐंड सस्टैनिबिलिटी रिपोर्टिंग (बीआरएसआर) की ओर बढ़ रही हैं, लिहाजा उनकी सेवाओं की मांग जोर पकड़ेगी।

उद्योग के प्रतिभागियों का मानना है कि बेहतर आंकड़ों की उपलब्धता के साथ कंपनियां ज्यादा पूंजी आकर्षित करने में सक्षम होंगी।

इक्रा के कार्यकारी उपाध्यक्ष (बिजनेस डेवलपमेंट) और चीफ बिजनेस ऑफिसर एल. शिवकुमार ने कहा कि अभी भारत में शायद कुछ ही ईएसजी फंड होंगे लेकिन ईएसजी रेटिंग के लिए मांग वैश्विक फंडों की तरफ से बढ़ने वाली है। इनमें प्राइवेट इक्विटी फर्म भी शामिल हैं क्योंकि उनके लिए सस्टैनिबिलिटी अहम स्तंभ है। उनमें से कई फर्में सीएक्सओ के स्तर पर विशेष रूप से बनाए गए सस्टैनिबिलिटी ऑफिसर रखने पर जोर दे रही हैं।

बिजनेस के बने रहने के लिए उद्योग को अब लगता है कि वित्तीय आंकड़ों की तुलना में ईएसजी स्कोर या अतिरिक्त रिपोर्टिंग फंडामेंटल के लिहाज से अहम मानक है। कई का मानना है कि कंपनियों पर ऐसे स्कोर का जोर देने के लिए हितधारक या निवेशक होना चाहिए। सेबी की अनिवार्यताओं के मुताबिक यह रेटिंग भारत केंद्रित और यहां के नियामकों की तरफ से तय मानकों पर आधारित होगी।

रेटिंग प्रदाताओं ने कहा कि वे असूचीबद्ध फर्मो की ईएसजी स्कोर के प्रति दिलचस्पी बढ़ती हुई देख रहे हैं। हालांकि मौजूदा नियमों के तहत ईआरपी को असूचीबद्ध फर्मों की रेटिंग की इजाजत नहीं है।

केयरऐज ईएसजी (जिसने इश्युअर पे मॉडल चुना है) के सीईओ रोहित इनामदार ने कहा कि सेबी ने अगले साल से वैल्यू चेन डिस्क्लोजर अनिवार्य किया है। इसका मतलब 75 फीसदी अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम कंपनियों से है।

अगर वैल्यू चेन के साझेदार खुद ऐसे ईएसजी मानकों का खुलासा नहीं कर रहे हैं तो सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वैल्यू चेन के साझेदारों पर आधरित ईएसजी रिपोर्टिंग काफी मुश्किल हो जाएगी। अगर सेबी इसकी अनुमति देता है तो यह उनके लिए अच्छा होगा।

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First Published - May 16, 2024 | 10:33 PM IST

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