Stock Market Fall: केंद्रीय बजट 2026 से ठीक एक दिन पहले शेयर बाजार में बेचैनी साफ दिखाई दी। शुक्रवार, 30 जनवरी को निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और मुनाफावसूली शुरू कर दी। नतीजा यह हुआ कि बाजार लाल निशान में डूब गया। कमजोर वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की घबराहट और बढ़ा दी।
कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव दिखा। बीएसई सेंसेक्स एक समय 625 अंक तक टूटकर 81,941 के निचले स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी 200 अंक गिरकर 25,218 तक फिसल गया। दोपहर बाद थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 348 अंक गिरकर 82,219 पर और निफ्टी 109 अंक टूटकर 25,309 पर कारोबार कर रहा था।
बड़े शेयरों में गिरावट के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप शेयर हल्की कमजोरी में रहे, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में मामूली मजबूती दिखी। इससे साफ हुआ कि निवेशक इस वक्त बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।
बजट से एक दिन पहले बाजार का डर मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX उछल गया। यह करीब 5 फीसदी बढ़कर 14 के स्तर तक पहुंच गया। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक आने वाले ऐलानों को लेकर काफी अनिश्चित हैं और जोखिम लेने से बच रहे हैं।
निवेशकों की चिंता सिर्फ बजट तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर सख्त बयानबाजी ने वैश्विक व्यापार को असहज कर दिया है।
देश के भीतर भी तस्वीर आसान नहीं है। अप्रैल से नवंबर के बीच सरकार का वित्तीय घाटा अनुमान से ज्यादा रहा है और टैक्स कलेक्शन में भी कमजोरी आई है। ऐसे में बाजार को डर है कि इस बार बजट में बड़े लोकलुभावन ऐलान शायद न हों।
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एशिया के शेयर बाजारों में भी शुक्रवार को बेचैनी दिखी। हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2 फीसदी टूट गया। चीन, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बाजारों में भी कमजोरी रही। अमेरिका के बाजारों के फ्यूचर्स भी दबाव में दिखे।
इस बीच एक और चिंता यह है कि अमेरिका में जल्द ही नए फेडरल रिजर्व चेयर के नाम का ऐलान हो सकता है। माना जा रहा है कि नए चेयर का रुख सख्त हो सकता है, जिससे ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आ रहा है। कमाई की रिकवरी में देरी, रुपये की कमजोरी और शेयरों के ऊंचे दाम विदेशी निवेशकों को डरा रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में भारतीय बाजार ज्यादा आकर्षक नहीं है।
जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने भी भारत में निवेश घटा दिया है। UBS और बर्नस्टीन जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्में भी सतर्क हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2025 में विदेशी निवेशकों ने करीब 18.9 अरब डॉलर के शेयर बेचे, जबकि जनवरी 2026 में ही करीब 4 अरब डॉलर की बिकवाली हो चुकी है।
शुक्रवार को सबसे बड़ा झटका मेटल और आईटी शेयरों को लगा। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 5 फीसदी तक टूट गया। हिंदुस्तान कॉपर, नाल्को, वेदांता, हिंदुस्तान जिंक, हिंडाल्को और एनएमडीसी जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट आई।
आईटी सेक्टर में भी इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और विप्रो जैसे बड़े नाम दबाव में रहे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। ईरान से जुड़े तनाव और अमेरिका में तेल भंडार घटने से ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
तेल की यह तेजी भारत के लिए चिंता का संकेत है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की लागत पर दबाव आ सकता है।