म्युचुअल फंड

Gold-Silver ETF में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट, डॉलर मजबूत होने से निवेशकों में घबराहट

कोटक म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने कहा, बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना था, जिसमें लगभग 0.30 फीसदी की वृद्धि हुई

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- January 30, 2026 | 10:45 PM IST

भारत में गोल्ड और सिल्वर के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में शुक्रवार को सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट हुई। हाल के महीनों में काफी तेजी आने के बाद कीमती धातुओं की कीमतों में यह नरमी आई है। इस श्रेणी के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ में एनएसई पर 10.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 2007 में लॉन्च हुई इस योजना में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है।

अन्य लोकप्रिय गोल्ड ईटीएफ, एचडीएफसी व आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के ईटीएफ एनएसई पर क्रमशः 8.8 फीसदी और 9.5 फीसदी नीचे आ गए। देसी ईटीएफ में गिरावट दुनिया भर में शुक्रवार को कीमती धातुओं में हुई बिकवाली के बाद देखी गई। हाजिर सोने की कीमत कारोबार के दौरान 8 फीसदी तक घट गई और यह 5,000 डॉलर से नीचे आ गई थी। हालांकि बाद में सोने में नुकसान की कुछ भरपाई हुई।

चांदी से संबंधित ईटीएफ शेयरों में गिरावट और भी तेज थी। अधिकांश ईटीएफ सत्र के अंत तक 20 फीसदी से अधिक गिर गए। वैश्विक बाजार में हाजिर चांदी की कीमतें दिन के दौरान 17 फीसदी से अधिक गिरकर 95 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर पर पहुंच गईं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का एक कारण डॉलर का मजबूत होना है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद के लिए नामित किए जाने से पहले हुआ है। इस घोषणा से अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है। उन्होंने कहा कि मुनाफावसूली के कारण भी गिरावट में तेजी आई।

कोटक म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने कहा, बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना था, जिसमें लगभग 0.30 फीसदी की वृद्धि हुई। इससे सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा। निवेशकों को भी लगा कि हालिया तेजी जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है और टिकाऊ नहीं है। इस कारण ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की गई। इसके अलावा, शेयर बाजार में कमजोरी ने सोने और चांदी सहित अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी बिकवाली को बढ़ावा दिया।

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मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल के कमोडिटीज विश्लेषक मानव मोदी ने कहा, हालांकि कीमती धातुओं में तेजी के पीछे के मूलभूत कारक बरकरार हैं। लेकिन निवेशकों को सोने और चांदी के ईटीएफ में निवेश करते समय सतर्क दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

First Published : January 30, 2026 | 10:02 PM IST