Budget 2026: म्युचुअल फंड इंडस्ट्री आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में डेट म्युचुअल फंड्स पर लॉन्ग-टर्म इंडेक्सेशन बेनिफिट फिर से लागू करने की सरकार से मांग कर रही है। यह मांग पिछले दो बजटों में किए गए उन बदलावों के बाद सामने आई है, जिनसे म्युचुअल फंड्स और अन्य कैपिटल मार्केट निवेशों के टैक्सेशन ढांचे में बड़े बदलाव आए हैं।
निवेश पर टैक्स आमतौर पर मुनाफे पर लगाया जाता है, यानी खरीद कीमत और बिक्री कीमत के अंतर पर। इंडेक्सेशन की मदद से आप खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं। इसके लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) का इस्तेमाल किया जाता है।
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स को केंद्र सरकार हर साल भारत के आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के जरिए जारी करती है। यह इंडेक्स पिछले साल की महंगाई में हुई बढ़ोतरी को दर्शाता है। पहले डेट म्युचुअल फंड में निवेश पर इंडेक्सेशन का लाभ मिलता था।
2023 में सरकार ने अधिकांश डेट म्युचुअल फंड्स पर मिलने वाला लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) और इंडेक्सेशन का लाभ हटा दिया था। इसके बाद बजट 2024 में कैपिटल गेन टैक्स, इंडेक्सेशन और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से जुड़े नियमों में और बदलाव किए गए। इसके परिणामस्वरूप अब डेट फंड्स से होने वाला अधिकांश मुनाफा (निवेश अवधि चाहे जितनी भी हो) निवेशक के सामान्य इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आ गया है।
उद्योग संगठन AMFI का कहना है कि इन बदलावों से कंजर्वेटिव इन्वेस्टर्स, खासकर वरिष्ठ नागरिक, निराश हुए हैं, जो स्थिर आय के लिए डेट फंड्स पर निर्भर रहते हैं। AMFI के मुताबिक, LTCG इंडेक्सेशन बेनिफिट हटाए जाने का असर साफ दिखा है और पिछले तीन वर्षों में डेट म्युचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
अगर आप स्थिर रिटर्न या नियमित आय के लिए डेट म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो बजट 2024 के बाद से टैक्स के कारण आपके पोस्ट-टैक्स रिटर्न पर असर पड़ा है।
AMFI ने लंबी अवधि के डेट फंड्स के लिए इंडेक्सेशन लाभ दोबारा लागू करने की मांग की है। इंडेक्सेशन में महंगाई को जोड़कर खरीद मूल्य तय किया जाता है, जिसके बाद कैपिटल गेन टैक्स लगता है। इंडेक्सेशन न होने पर महंगाई के कारण बढ़ी रकम पर भी टैक्स देना पड़ता है, जिससे वास्तविक रिटर्न घट जाता है।
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डेट फंड्स पर पोस्ट-टैक्स रिटर्न बढ़ता है, जिससे ये अन्य लॉन्ग-टर्म एसेट्स की तुलना में अधिक आकर्षक बनते हैं।
रिटायरमेंट सेविंग्स को कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में चैनल करता है, जिससे रिटायर्ड और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्थिर आय सुनिश्चित होती है।
कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करता है, कंपनियों और सरकार को ज्यादा फंडिंग फ्लेक्सिबिलिटी देता है।
लॉन्ग-टर्म फिक्स्ड-इनकम सेविंग को प्रोत्साहित करता है और घरेलू बचत को वित्तीय बनाने में मदद करता है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है।