म्युचुअल फंड

Budget 2026: सरकार हो राजी तो म्युचुअल फंड बनेंगे बुढ़ापे का सहारा, NPS जैसे ही टैक्स फायदे मिलने की उम्मीद

AMFI ने अपने बजट प्रपोजल में सरकार से मांग की है कि म्युचुअल फंड्स को ऐसे पेंशन-फोक्स्ड स्कीम लॉन्च करने की अनुमति मिले, जिनमें नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे टैक्स लाभ मिलें

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अंशु   
Last Updated- January 27, 2026 | 7:23 PM IST

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को लगातार अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस बजट से म्युचुअल फंड इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें हैं, क्योंकि एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने 27 मांगों की एक लंबी-चौड़ी फेहरिस्त सरकार के सामने रखी है। इन्हीं में से एक अहम मांग है कि म्युचुअल फंड्स को भी NPS की तरह पेंशन-फोकस्ड स्कीम्स शुरू करने की अनुमति दी जाए और उन पर भी वैसी ही टैक्स छूट लागू की जाए।

MF ला सकेंगे NPS की तरह पेंशन-फोकस्ड स्कीम्स

AMFI ने अपने बजट प्रपोजल में सरकार से मांग की है कि म्युचुअल फंड्स को ऐसे पेंशन-फोक्स्ड स्कीम लॉन्च करने की अनुमति मिले, जिनमें नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे टैक्स लाभ मिलें। इसे म्युचुअल फंड लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम (MFLRS) कहा जा रहा है।

VSRK कैपिटल के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल ने कहा कि पेंशन-स्टाइल म्युचुअल फंड स्कीम्स, वॉलंटरी रिटायरमेंट अकाउंट और डेट-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम जैसे रिटायरमेंट- फोक्स्ड उपायों पर दिया गया जोर वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने और समझदारी भरे निवेश व्यवहार की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।

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MFLRS क्यों जरूरी है?

AMFI का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए निवेशकों को सिर्फ एक ही फ्रेमवर्क में निवेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि रिटायरमेंट के लिए टैक्स छूट वाले निवेश विकल्प तलाश रहे निवेशकों के पास मुख्य रूप से NPS ही एकमात्र बड़ा विकल्प उपलब्ध है।

NPS की ही तरह EEE टैक्स ट्रीटमेंट की मांग

AMFI के इस प्रस्ताव की सबसे खास बात यह है कि म्युचुअल फंड लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम (MFLRS) में निवेश पर ट्रिपल ई (EEE) टैक्स ट्रीटमेंट देने की मांग की गई है। इसका मतलब है– निवेश करते समय टैक्स में छूट, निवेश से होने वाले रिटर्न पर टैक्स में राहत और रिटायरमेंट के वक्त रकम निकालने पर भी टैक्स में छूट दी जाए।

यह फ्रेमवर्क NPS और EPF की तरह होगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी (Employee) और नियोक्ता (Employer), दोनों के योगदान पर अलग-अलग टैक्स डिडक्शन की सुविधा दी जाए, ठीक उसी तरह जैसे फिलहाल सेक्शन 80CCD के तहत उपलब्ध है।

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निवेशकों को क्या होगा फायदा?

MFLRS से म्युचुअल फंड्स के जरिए रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा मिल सकता है। इससे रिटायरमेंट प्लानिंग में ज्यादा लचीलापन मिलेगा और निवेशकों को म्युचुअल फंड की पारदर्शिता के साथ प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट का लाभ मिलेगा। यह उन निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है, जिन्हें NPS की शर्तें बहुत ज्यादा सख्त या सीमित लगती हैं।

अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो रिटायरमेंट की योजना बनाने वाले निवेशकों के लिए NPS और EPF के अलावा एक नया, बेहतर और ज्यादा लचीला निवेश विकल्प सामने आ सकता है।

First Published : January 27, 2026 | 7:23 PM IST