वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को लगातार अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में आने वाला यह बजट ऐसे वक्त पेश हो रहा है, जब भारत ने 7.4 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक बढ़ोतरी दर्ज की है। ट्रंप टैरिफ का खौफ और दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में इस बजट में राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल डिसिप्लिन) बनाए रखने, सुधारों को आगे बढ़ाने और सबको साथ लेकर विकास पर जोर दिए जाने की उम्मीद है।
लेकिन इस सब के बीच बात करते हैं बजट बनाने की पीछे की पूरी कहानी की। बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि इसके पीछे महीनों की मेहनत, रणनीति और बारीक प्लानिंग होती है। जब 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद में बजट 2026 पेश करेंगी, तब भले सबकी नजर उनपर पर होगी, लेकिन इसकी असली तैयारी पहले ही पूरी हो चुकी होगी। मंत्रालयों में देर रात तक जलती लाइटें, फाइलों पर लगातार चर्चा और हर लाइन पर मंथन, यही बजट की असली तस्वीर होती है।
इस बार भी बजट को अंतिम रूप देने का काम दिन-रात चल रहा है। संसद में पेश होने से पहले कई बड़े फैसले और प्रस्ताव तैयार करने में सीनियर ब्यूरोक्रेट्स की एक बड़ी टीम जुटी हुई है। ये अफसर अलग-अलग विभागों से आते हैं और बजट बनाने में हर एक की अहम भूमिका होती है। आइए जानते हैं बजट 2026 की तैयारी में जुटे इन प्रमुख अफसरों के बारे में।
वी अनंत नागेश्वरन जनवरी 2022 से भारत सरकार के 18वें मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं। उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक रहेगा। वे हर साल इकोनॉमिक सर्वे तैयार करते हैं, जो बजट से ठीक पहले संसद में पेश किया जाता है। उनकी टीम बजट के लिए कई अहम जानकारियां देती है, जिनमें आने वाले साल की आर्थिक बढ़ोतरी का अनुमान, खेती, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की स्थिति और वैश्विक आर्थिक जोखिम शामिल हैं। इसके अलावा वे वित्त मंत्री को आर्थिक सुधार, राजकोषीय नीति और कुल मिलाकर फाइनेंशियल प्लानिंग पर सलाह देते हैं।
अनुराधा ठाकुर 1994 बैच की IAS अधिकारी हैं और हिमाचल प्रदेश कैडर से आती हैं। वे डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स की प्रमुख हैं और बजट से जुड़े सभी दस्तावेज तैयार कराने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। इसी वजह से उन्हें बजट की मुख्य आर्किटेक्ट माना जाता है। 1 जुलाई 2025 को पद संभालने के बाद यह उनका पहला बजट होगा। खास बात यह है कि वे इस विभाग का जिम्मा संभालने वाली पहली महिला IAS अधिकारी हैं।
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अरविंद श्रीवास्तव बजट में टैक्स से जुड़े सभी प्रस्तावों की जिम्मेदारी संभालते हैं। बजट भाषण का बड़ा हिस्सा इन्हीं के विभाग से आता है। इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स जैसे डायरेक्ट टैक्स से लेकर GST और कस्टम ड्यूटी जैसी इंडायरेक्ट टैक्स तक, सभी इनके दायरे में आते हैं। 1994 बैच के IAS अधिकारी श्रीवास्तव इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से फाइनेंस में MSc किया है।
सरकार का पैसा कहां और कैसे खर्च हो, इसकी निगरानी वुमलुनमंग वुअलनाम करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि सार्वजनिक धन का सही इस्तेमाल हो। सब्सिडी को बेहतर ढंग से लागू करने, केंद्रीय योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है। बजट घाटे को काबू में रखने की जिम्मेदारी भी काफी हद तक इन्हीं पर होती है।
एम नागराजू डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के सेक्रेटरी हैं। यह विभाग फाइनेंशियल इनक्लूजन और सोशल सिक्योरिटी योजनाओं पर काम करता है। पब्लिक सेक्टर बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और पेंशन सिस्टम इसी विभाग के तहत आते हैं। क्रेडिट को बढ़ावा देना, डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज का विस्तार करना और सरकारी वित्तीय संस्थानों की स्थिरता बनाए रखना इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
अरुणिश चावला डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी हैं। बजट 2026-27 में डिसइन्वेस्टमेंट और प्राइवेटाइजेशन से जुड़े प्रस्तावों की कमान इन्हीं के हाथ में है। सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर नॉन-टैक्स रेवेन्यू जुटाना और पब्लिक एसेट्स से बेहतर वैल्यू निकालना, साथ ही फिस्कल जरूरतों और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना इनकी बड़ी जिम्मेदारी है।
1990 बैच के IAS अधिकारी के मोसेस चलाई मणिपुर कैडर से हैं और फिलहाल डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज के सेक्रेटरी हैं। सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) के कैपिटल एक्सपेंडिचर पर नजर रखना, बजट फंड्स के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना, एसेट मोनेटाइजेशन और इन कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की मॉनिटरिंग उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल है।