बीते दिन जयपुर में इंटरनेशनल मटेरियल रिसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपोजिशन 2026 में मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) ने केंद्रीय बजट को लेकर बड़ी मांग रखी। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजय मेहता ने कहा कि स्क्रैप पर लगने वाला मौजूदा 18 प्रतिशत GST रेट इंडस्ट्री की ग्रोथ को रोक रहा है और बहुत सारे काम को अनऑर्गनाइज्ड तरीके से धकेल रहा है।
मेहता ने बताया कि इस हाई टैक्स की वजह से लोग कैश में ट्रांजेक्शन ज्यादा कर रहे हैं, जिससे स्क्रैप कलेक्शन का पहला स्तर ही फॉर्मल नहीं हो पा रहा। उन्होंने मांग की कि स्क्रैप पर GST को घटाकर सिर्फ 5 प्रतिशत किया जाए। इससे ऑर्गनाइज्ड सेक्टर को फायदा होगा और अनऑर्गनाइज्ड एकॉनमी में जाने वाली एक्टिविटी कम होगी।
मेहता ने ये भी कहा कि देश में स्क्रैप का करीब एक तिहाई हिस्सा रगपिकर्स, घरों और छोटे वर्कशॉप्स से आता है। इन लोगों को फॉर्मल इकोनॉमी में लाने के लिए कैश पेमेंट्स को हतोत्साहित करना होगा और यूपीआई जैसे डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने सरकार से अल्यूमिनियम स्क्रैप पर इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह हटाने की अपील की। साथ ही ई-वेस्ट, प्लास्टिक और टायर जैसे सेक्टर्स में एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) के नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही।
स्टील मिनिस्ट्री के जॉइंट सेक्रेटरी दयानिधान पांडे ने भी इवेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि भारत में स्क्रैप की उपलब्धता बढ़कर 36 मिलियन टन तक पहुंचने वाली है। देश अपनी क्रूड स्टील कैपेसिटी को 2030 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन करने की प्लानिंग कर रहा है। अभी स्क्रैप से सिर्फ 21 प्रतिशत क्रूड स्टील बनता है, जबकि ग्लोबल औसत करीब 31 प्रतिशत है। डिमांड तेजी से बढ़ेगी, इसलिए स्क्रैप को डीकार्बोनाइजेशन की स्ट्रैटेजी में अहम जगह मिलनी चाहिए।
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पांडे ने स्टील स्क्रैप रिसाइक्लिंग पॉलिसी, व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी और एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स व कंस्ट्रक्शन वेस्ट के लिए नए EPR नियमों का जिक्र किया। ये सब पॉलिसी सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करेंगी और फॉर्मल रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देंगी।
MRAI द्वारा आयोजित ये तीन दिन का इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस पॉलिसी मेकर्स, रिसाइक्लर्स और ग्लोबल एक्सपर्ट्स को एक साथ ला रहा है। यहां सस्टेनेबिलिटी, एनर्जी ट्रांजिशन और सर्कुलर इकोनॉमी पर खुलकर चर्चा हो रही है।