प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत की इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनियां सरकार से कह रही हैं कि पीएम ई-ड्राइव स्कीम में सब्सिडी को मार्च 2026 के बाद भी जारी रखा जाए। उनका डर है कि अगर ये मदद अचानक बंद हो गई तो अगले कुछ समय में ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। हालांकि, लंबे समय में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ही बढ़ेंगे, इस पर सबका भरोसा है।
कंपनियों का कहना है कि सब्सिडी से आगे का खर्च कम लगता है, जो कीमत देखने वाले ग्राहकों के लिए बहुत मायने रखता है। साथ ही, आगे की नीति साफ होनी चाहिए ताकि फैक्टरियां बढ़ाई जा सकें, डीलर ज्यादा लगाए जा सकें और पार्ट्स देश में ही बनाए जा सकें।
जुपेरिया ऑटो के सीईओ आयुष लोहिया ने बताया कि सब्सिडी ने खासतौर पर नए ग्राहकों को इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है। अगर ये इंसेंटिव खत्म हुए तो छोटे समय में मांग थोड़ी धीमी पड़ सकती है। लोग अभी भी पेट्रोल वाली बाइक से तुलना करते हैं। उनके हिसाब से सब्सिडी हटने पर स्कूटर की सड़क पर आने वाली कीमत 6,000 से 12,000 रुपये तक बढ़ सकती है। बैटरी महंगी होने और दूसरे नियमों के खर्च की वजह से कंपनियां ये बोझ ज्यादा नहीं उठा पाएंगी। लोहिया ने ये भी कहा कि थोड़े समय के लिए सब्सिडी बढ़ाना प्रोडक्शन प्लानिंग में आसानी देगा, लेकिन FY26 के बाद मीडियम टर्म की क्लियर पॉलिसी चाहिए ताकि बड़े निवेश हो सकें।
Also Read: India-EU FTA के बाद यूरोप आने वाली कारें होंगी सस्ती, 110% से घटकर 40% हो जाएगा इंपोर्ट टैक्स
ईवियम स्मार्ट मोबिलिटी के फाउंडर और सीईओ समीर मोइदिन का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका मानना है कि सब्सिडी का असर हर तरह के ग्राहक पर एक जैसा नहीं पड़ता। जो लोग रिटेल में जल्दबाजी में खरीदते हैं, उन पर असर ज्यादा होता है। लेकिन फ्लीट चलाने वाले, बड़े ऑफिस या ज्यादा दूरी तय करने वाले लोग अपटाइम, सर्विस की पहुंच और कुल खर्च देखते हैं। उनके अनुसार, बिना सब्सिडी के भी बिक्री रुकती नहीं, बस ग्राहक ज्यादा सोच-विचार करके फैसला लेते हैं। जो ब्रांड अच्छे डीलर और फ्लीट प्रोग्राम में मजबूत हैं, उनकी डिमांड स्थिर रहती है। इससे पता चलता है कि मार्केट अब परिपक्व हो रहा है।
जेलियो ई-मोबिलिटी के को-फाउंडर कुणाल आर्य ने कहा कि इलेक्ट्रिक दोपहिया का कुछ हिस्सा पहले से ही बिना सेंट्रल सब्सिडी के चल रहा है। स्लो-स्पीड वाले वाहन FAME जैसी स्कीम में नहीं आते और सिर्फ अपनी किफायत व चलाने के कम खर्च से बाजार में टिके हैं। आर्य ने सुझाव दिया कि बजट 2026 में इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट मिले। इससे टियर-2, टियर-3 शहरों और गांवों में वाहन सस्ते होंगे और सब्सिडी पर लंबे समय तक निर्भरता कम होगी।
ओबेन इलेक्ट्रिक की फाउंडर मधुमिता अग्रवाल ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया। इलेक्ट्रिक वाहन तैयार होने पर सिर्फ 5% जीएसटी लगता है, लेकिन कच्चे माल पर 18%। इससे कंपनियों का कैपिटल फंसता है और प्रोडक्शन महंगा पड़ता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को खास इंसेंटिव मिलने चाहिए। ये सेगमेंट देश के दोपहिया मार्केट का करीब 70% है, लेकिन अभी बहुत कम इलेक्ट्रिक हो पाया है। 2030 के इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्य पूरे करने के लिए ये जरूरी है।
Also Read: Budget decoded: सरकार की योजना आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को कैसे प्रभावित करती है?
पीएम ई-ड्राइव स्कीम सितंबर 2024 में शुरू हुई थी। इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए 1,772 करोड़ रुपये रखे गए हैं। स्कीम के तहत हर स्कूटर पर 10,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है, जो 1 लाख से कम कीमत वाले औसत स्कूटर के दाम का 10% से ज्यादा है। पूरी स्कीम की राशि 1.1 लाख करोड़ रुपये है, जो दोपहिया, तीनपहिया, ट्रक, बस और चार्जिंग स्टेशन को कवर करती है। दोपहिया के लिए सब्सिडी मार्च 2026 तक है, लेकिन ट्रक और बस के लिए इसे मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।