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सुरक्षित निवेश और कम सप्लाई: क्यों सोने की कीमत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है?

भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार की अनिश्चितता और अमेरिकी फेड की दरों में कटौती की उम्मीद से सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है

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अभिजित कुमार   
Last Updated- January 26, 2026 | 5:58 PM IST

आजकल लाखों लोग सोना खरीद रहे हैं, चाहे वो शादी के लिए ज्वेलरी हो, लंबी बचत का तरीका या फिर अनिश्चितता से बचने का सहारा। लेकिन इन दिनों सोने का दाम इतना डरावना हो गया है कि हर कोई हैरान है। परिवार वाले शादी की खरीदारी सोच रहे हैं, तो निवेशक रोजाना के रेट पर नजर रखे हुए हैं। सोने ने पहली बार 5 हजार डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा छुआ है, और 2025 में ये 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। ये तेजी दुनिया की राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक अस्थिरता और निवेशकों के बदलते रुझान की वजह से हो रही है। बाजार में हलचल मची हुई है, और सोना अब हर किसी की जुबान पर है।

राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नीतियां सोने की चमका का कारण

दुनिया में जहां-तहां तनाव बढ़ रहा है, और ये सीधे सोने के दाम पर असर डाल रहा है। अमेरिका और नाटो के बीच ग्रीनलैंड को लेकर खींचतान चल रही है, जिससे बाजार में अनिश्चितता फैल गई है। लोग ऐसे में सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर भाग रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को धमकी दी है कि अगर वो चीन के साथ कोई व्यापार समझौता करता है, तो उस पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। ये बातें व्यापार नीतियों को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं।

सोने की ये रैली यूक्रेन और गाजा में चल रहे युद्धों से शुरू हुई, जो निवेशकों के मन में अब भी भारी हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो के खिलाफ कदम उठाए हैं, जो वैश्विक अस्थिरता को और हवा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में निवेशक सोने की शरण लेते हैं, क्योंकि इसे अनिश्चितता के दौर में ‘सुरक्षित आश्रय’ माना जाता है। ये सब मिलकर सोने को ऊपर की ओर धकेल रहे हैं।

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अनिश्चितता में सोना क्यों बन जाता है निवेशकों का सहारा?

सोना एक ऐसा निवेश है जो ‘सुरक्षित बंदरगाह’ की तरह काम करता है। इसका मूल्य किसी सरकार या कंपनी की आर्थिक स्थिति या कर्ज पर निर्भर नहीं करता, जैसे बॉन्ड या शेयर होते हैं। ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक, सोना रखना मतलब किसी और के कर्ज से दूर रहना। शेयर में कंपनी की परफॉर्मेंस गिरेगी, तो नुकसान होगा, लेकिन सोने में ऐसा नहीं। ये अनिश्चित दुनिया में विविधता लाने का बढ़िया तरीका है।

इसी वजह से सोना 1979 के बाद का अपना सबसे मजबूत सालाना लाभ दर्ज कर रहा है। निवेशक उन संपत्तियों से दूर जा रहे हैं जो नीतिगत झटकों या बाजार की अस्थिरता से प्रभावित हो सकती हैं। जब दुनिया में उथल-पुथल मचती है, तो सोना चमकने लगता है, और लोग इसे पकड़ लेते हैं।

ब्याज दरें और महंगाई सोने को और आकर्षक बना रही हैं

ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने के दाम को सहारा दे रही हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल दो बार अपनी मुख्य ब्याज दर में कटौती करने वाला है, जैसा कि बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है। जब दरें कम होती हैं, तो सरकारी बॉन्ड जैसे संपत्तियों से रिटर्न घट जाता है। ऐसे में सोना, जो कोई ब्याज नहीं देता, फिर भी ज्यादा आकर्षक लगने लगता है। अभी अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ रहा है, और महंगाई सामान्य से ऊपर है, जिससे निवेशक सोने को सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पिछले साल उन्होंने सैकड़ों टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। ये अमेरिकी डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश है, जो सोने की मांग को स्थिर रख रही है। निवेशकों की खरीदारी के साथ ये ट्रेंड सोने को मजबूती दे रहा है।

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सोने की सीमित उपलब्धता और सांस्कृतिक मांग

सोने की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण उसकी भौतिक कमी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल बताता है कि अब तक दुनिया में करीब 2 लाख 16 हजार 265 टन सोना खोदा गया है, जो तीन-चार ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल भर सकता है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि जमीन के नीचे अभी 64 हजार टन बाकी है, लेकिन आने वाले सालों में उत्पादन स्थिर हो जाएगा।

मांग की बात करें, तो सांस्कृतिक और मौसमी फैक्टर भी अहम हैं। भारत में दिवाली जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय घरों में 3.8 ट्रिलियन डॉलर का सोना है, जो देश की जीडीपी का लगभग 89 फीसदी है। चीन, जो सोने का सबसे बड़ा बाजार है, लूनर न्यू ईयर के आसपास ज्यादा खरीदारी करता है, जहां इसे सौभाग्य से जोड़ा जाता है।

First Published : January 26, 2026 | 5:58 PM IST