बजट

Budget decoded: सरकार की योजना आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को कैसे प्रभावित करती है?

केंद्रीय बजट में कमाई, खर्च और उधारी की रूपरेखा तय की जाती है, जिससे टैक्स दरों, लोन की ब्याज दरों, निवेश रिटर्न और घरों की भविष्य की आर्थिक योजना प्रभावित होती है

Published by
अमित कुमार   
Last Updated- January 26, 2026 | 5:18 PM IST

केंद्र सरकार का सालाना बजट हर साल सुर्खियां बटोरता है, लेकिन ये सिर्फ टैक्स बढ़ाने या घटाने की घोषणा नहीं होता। असल में ये सरकार का पूरा पैसों का प्लान है, जिसमें बताया जाता है कि पैसे कहां से आएंगे, कहां खर्च होंगे और अगर कमी पड़ी तो कैसे पूरी की जाएगी। घर चलाने वालों के लिए ये समझना जरूरी है, क्योंकि इसी से पता चलता है कि टैक्स क्यों बदलते हैं, लोन की ब्याज दरें क्यों ऊपर-नीचे होती हैं और लंबे समय में नौकरियां और कमाई के मौके कैसे बनते हैं।

बजट में दो मुख्य हिस्से होते हैं: कमाई और खर्च। कमाई में टैक्स, लाभांश और दूसरी आय शामिल होती है, जबकि खर्च में सैलरी, सब्सिडी से लेकर सड़कें और स्कीम तक सब आते हैं। अगर खर्च कमाई से ज्यादा हुआ तो सरकार उधार लेकर काम चलाती है। ये सारा खेल घर की मासिक बजट की तरह ही है, बस बड़ा स्तर पर।

कमाई और उधार का खेल: ब्याज दरों पर असर

बजट का कमाई वाला हिस्सा सबसे अहम है, क्योंकि इसी से तय होता है कि सरकार के पास कितना पैसा है। इंडियाP2P और इक्विराइज की फाउंडिंग मेंबर नेहा जुनेजा कहती हैं कि कमाई बताती है सरकार कितना कमा रही है और अगर खर्च ज्यादा हुआ तो उधार से भरपाई। ज्यादा उधार का मतलब है कि बाजार में पैसों की मांग बढ़ जाती है, जिससे ब्याज दरें ऊपर चढ़ती हैं। सरकार कंपनियों और आम लोगों के साथ पैसों के लिए मुकाबला करती है।

इससे घरेलू लोन महंगे हो सकते हैं, जैसे घर या कार का लोन। लेकिन अच्छी बात ये कि फिक्स्ड डिपॉजिट, बॉन्ड और दूसरे निवेश पर रिटर्न बेहतर मिल सकता है। कुल मिलाकर, कमाई और उधार का बैलेंस पूरे साल की ब्याज दरों को सेट करता है, जो बचत और कर्ज लेने के फैसलों पर असर डालता है। अगर सरकार ज्यादा उधार लेगी तो आपकी EMI बढ़ सकती है, लेकिन सेविंग्स पर ज्यादा कमाई भी हो सकती है।

Also Read: Budget 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को टैक्स में राहत की उम्मीद, पॉलिसीधारकों को मिल सकता है सीधा फायदा!

खर्च का तरीका: रोजमर्रा vs लंबी प्लानिंग

खर्च के मामले में बजट दो तरह के हिस्सों में बंटा होता है: रेवेन्यू और कैपिटल। रेवेन्यू खर्च वो है जो सिस्टम को चालू रखता है, जैसे कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, सब्सिडी और ब्याज का भुगतान। वहीं कैपिटल खर्च लंबे समय की चीजें बनाता है, जैसे सड़कें, रेलवे, घर और शहरों का विकास।

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के डायरेक्टर हृषिकेश पालवे बताते हैं कि ज्यादा कैपिटल खर्च तुरंत फायदा नहीं दिखाता, लेकिन ये कमाई की स्थिरता बढ़ाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसा लगाने से उत्पादकता सुधरती है, कई सेक्टरों में नौकरियां बनती हैं और ट्रांसपोर्ट-कॉम्यूटिंग के खर्च घटते हैं। घरों के लिए इसका मतलब है कि बजट का खर्च मिक्स तय करता है कि ग्रोथ कंजम्पशन से आएगी या निवेश से। इससे मध्यम अवधि में नौकरियां और कमाई की संभावनाएं बनती हैं। अगर सरकार रोड और रेल पर ज्यादा खर्च करेगी तो ट्रांसपोर्ट सस्ता होगा, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनेगी।

टैक्स और घर की जेब: छोटे बदलाव का बड़ा फर्क

बजट भले बड़ा स्तर पर हो, लेकिन ये सीधे घर की जेब पर असर डालता है, खासकर टैक्स और खर्च करने लायक पैसों के जरिए। पालवे कहते हैं कि पहले इनकम टैक्स स्लैब्स में बदलाव से सालाना 24 लाख रुपये कमाने वालों की टैक्स दर 2-2.5 फीसदी कम हुई। ये बड़ा बदलाव नहीं लगता, लेकिन इससे घरों को ज्यादा लचीलापन मिला – बचत बढ़ाने, लोन पहले चुकाने या महंगाई से निपटने में।

अगर मैरिड कपल्स के लिए जॉइंट टैक्स रिटर्न जैसी स्कीम आई तो टैक्स और बच सकता है। कुल मिलाकर, बजट के फैसले घर की मासिक आय को प्रभावित करते हैं, जिससे प्लानिंग आसान होती है। टैक्स कम होने से हाथ में ज्यादा पैसा आता है, जो छोटे-मोटे सपनों को पूरा करने में मदद करता है।

Also Read: Budget 2026: भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी को इस साल के बजट से क्या चाहिए?

भविष्य के मौके: स्किल्स और कमाई की राह

बजट सिर्फ आज की बात नहीं करता, बल्कि कल की कमाई के रास्ते भी दिखाता है। WACE इंडिया की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर फैजा मिर्जा कहती हैं कि एजुकेशन, ग्लोबल एकेडमिक कोलैबोरेशन और स्किल प्रोग्राम्स पर पैसा लगाना लोगों की कमाने की क्षमता बढ़ाता है। इंटरनेशनल एक्सपोजर, स्किल ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स को एजुकेशन में जोड़ने से इंडिया का ह्यूमन कैपिटल मजबूत होता है, जो लंबे समय में स्थिर कमाई लाता है।

ये आवंटन युवाओं के लिए नए दरवाजे खोलते हैं, जैसे बेहतर जॉब्स या बिजनेस के मौके। अगर बजट में स्किल डेवलपमेंट पर फोकस है तो आने वाले सालों में नौकरियां बढ़ेंगी, जो घरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगी।

बजट पढ़ने का स्मार्ट तरीका: हेडलाइंस से आगे सोचें

लोग अक्सर बजट को सिर्फ बड़ी घोषणाओं से देखते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये गलती है। पालवे चेताते हैं कि शॉर्ट-टर्म फायदों पर जल्दबाजी न करें। बजट को पॉलिसी का रोडमैप समझें कि पैसा कैसे आएगा, कहां जाएगा और कैसे मैनेज होगा। इससे घर अपनी बचत, कर्ज और लंबे लक्ष्यों को अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ सकते हैं। सही समझ से बजट घर की फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा बन जाता है।

First Published : January 26, 2026 | 4:29 PM IST