India-EU FTA: भारत और 27 देशों के ग्रुप यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत कपड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ कारों और वाइन पर आयात शुल्क में कटौती की संभावना है। इस समझौते के संपन्न होने की घोषणा 27 जनवरी को दिल्ली में की जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि इस समझौते में कई सेवा क्षेत्रों के नियमों में ढील दिए जाने की भी उम्मीद है। भारत ने अपने श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे कपड़ा, चमड़ा, परिधान, रत्न एवं आभूषण और हस्तशिल्प के लिए शून्य-शुल्क पहुंच पर जोर दिया है। भारत द्वारा यूके, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए पिछले व्यापार समझौतों में भी यह एक प्रमुख मांग रही है जिसे स्वीकार किया गया है।
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दूसरी ओर, यूरोपीय यूनियन अपने ऑटोमोबाइल और वाइन सहित मादक पेय पदार्थों के लिए शुल्क में कटौती की मांग कर रहा है। भारत ने ब्रिटेन के साथ अपने व्यापार समझौते में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए कोटा-आधारित रियायतें दी हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों में वाइन को शामिल किया गया है। भारत ने ऑस्ट्रेलियाई वाइन को 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से शुल्क रियायतें प्रदान की हैं।
पिछले साल सितंबर में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि यूरोपीय यूनियन के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता घरेलू ऑटो उद्योग के लिए निर्यात बढ़ाने और यूरोपीय दिग्गजों के साथ नयी साझेदारी के बड़े अवसर प्रदान करेगा। मई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत, दोनों पक्षों के बीच कोटा के तहत ऑटोमोटिव आयात पर शुल्क 100 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया जाएगा।
भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के मामले में, आयात शुल्क में अगले 10 से 15 वर्षों की अवधि में कटौती की जाएगी। भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को 18 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद एफटीए के संपन्न होने की घोषणा करने वाले हैं। यह बातचीत 2007 में शुरू हुई थी।
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यूरोपीय संघ में भारतीय सामानों पर औसत शुल्क 3.8 फीसदी है, लेकिन श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर यह लगभग 10 फीसदी है। वहीं, यूरोपीय संघ के सामानों पर भारत का औसत शुल्क 9.3 फीसदी है, जिसमें ऑटोमोबाइल (35.5 फीसदी) और रसायनों पर उच्च शुल्क शामिल है।
भारत मादक पेय पदार्थों पर 100-125 फीसदी शुल्क लगाता है। संवेदनशील कृषि मुद्दों को इस सौदे से बाहर रखा गया है। यूरोपीय संघ अपने बीफ, चीनी और चावल बाजार को लेकर सुरक्षात्मक रहा है, जबकि भारत ने अपने डेयरी और कृषि क्षेत्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से बचाया है ताकि छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित न हो।
(PTI इनपुट के साथ)