टेक-ऑटो

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की लंबी छलांग, यूरोप को होने वाले एक्सपोर्ट में 37% की भारी बढ़ोतरी

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लक्ष्य वित्त वर्ष 31 तक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का मूल्य 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है

Published by
सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- January 27, 2026 | 10:50 PM IST

भारत से यूरोप को होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में पिछले साल की तुलना में 37 प्रतिशत बढ़कर 11.79 अरब डॉलर हो गया। इसमें स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक थी। इलेक्ट्रॉनिक्स से अधिक निर्यात की जाने वाली जिंसों में इंजीनियरिंग सामान और पेट्रोलियम उत्पाद ही थे। 

ऐपल को अमेरिका की तरह ईयू में शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता है। भारत में असेम्बल किए गए आईफोन मुख्य तौर पर नीदरलैंड भेजे जाते थे और वहां से आईफोन का वितरण पूरे क्षेत्र में होता था। हालांकि इस स्थिति में नाटकीय बदलाव आया है। दरअसल ऐपल ने अप्रैल और नवंबर 2025-26 (वित्त वर्ष 26) में भारत से भेजे जाने वाली खेप के बड़े हिस्से को अब अमेरिका से भेजना शुरू कर दिया। इससे भारत से ईयू को निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में कमी आई।

इसका परिणाम यह हुआ कि अमेरिका से आईफोन का निर्यात वित्त वर्ष 26 के अप्रैल से नवंबर के दौरान तीन गुना बढ़कर 12.7 अरब डॉलर हो गया। आईफोन के निर्यात में गिरावट आने के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने ईयू को निर्यात बढ़ाने की महत्त्वाकांक्षी योजना को कायम रखा है।

इंडियन सेलुलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू के अनुसार ‘यह समझौता भारत के घरेलू उत्पादन पर आधारित पैमाने से हटकर वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ निर्यात-उन्मुख एकीकरण की ओर बदलाव के अनुरूप है।’ मोहिंद्रू कहते हैं कि आईसीईए ने मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के कारोबार को वर्तमान स्तर से वर्ष 2030-31 (वित्त वर्ष 31) तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाने की योजना तैयार कर ली है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लक्ष्य वित्त वर्ष 31 तक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का मूल्य 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

First Published : January 27, 2026 | 10:50 PM IST