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अगली मंदी में 90% तक गिर सकते हैं कुछ शेयर: शंकर शर्मा

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शंकर शर्मा ने लालची बैंकरों और अति-पूंजीकृत कंपनियों पर लगाया आरोप

Last Updated- May 07, 2024 | 6:10 PM IST
Share Market

प्रसिद्ध निवेशक शंकर शर्मा ने भारत के मौजूदा तेजी वाले बाजार (बुल मार्केट) में एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि लालची मर्चेंट बैंकर और ऑपरेटर कंपनियों को उनकी जरूरत से ज्यादा पैसा जुटाने के लिए उकसा रहे हैं। इससे कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाएगा जो भविष्य में उनके लिए समस्या बन सकता है।

शंकर शर्मा ने यह भी चेतावनी दी है कि अति-पूंजीकृत ( over capitalisation) कंपनियों के शेयर आने वाली मंदी में 90% तक गिर सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बाजार के अच्छे दौर में कंपनियां अपने वास्तविक जरूरतों से ज्यादा पैसा जुटा लेती हैं। उन्हें इस लालच में फंसाने में मर्चेंट बैंकर और ऑपरेटर भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि कंपनियों पर भारी कर्ज का बोझ बढ़ जाता है।

शर्मा का कहना है कि जब बाजार मंदी की ओर जाता है तो अति-पूंजीकृत कंपनियों के शेयरों में 90% तक की गिरावट आ सकती है। इत्तेफाक की बात है कि भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी 50 में भी मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। साथ ही मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों वाले सूचकांकों में भी 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली जिसने व्यापक बाजारों में बिकवाली को बढ़ावा दिया.

बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX इंडेक्स इस महीने सिर्फ चार कारोबारी सत्रों में ही 35% तक चढ़ गया है, जबकि अप्रैल में इसमें मामूली 0.30% की बढ़त देखी गई थी। विश्लेषकों का मानना है कि शेयर बाजारों में गिरावट के पीछे कई वजह हैं। इनमें भारतीय कंपनियों के शेयरों की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली, चुनाव से पहले की अनिश्चितता और कंपनियों के पिछले तिमाही के मिले-जुले नतीजे शामिल हैं।

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First Published - May 7, 2024 | 6:10 PM IST

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