भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश के दो सबसे नए एक्सचेंजों एनसीडीईएक्स और एमएसई को इक्विटी डेरिवेटिव में ट्रेडिंग शुरू करने से रोक दिया है और उनसे कहा है कि वे पहले अपना शेयर-ट्रेडिंग कारोबार खड़ा करें। दो नियामकीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सेबी का फैसला भारत के तेजी से बढ़ते इक्विटी डेरिवेटिव बाजार को लेकर जारी सतर्कता को दर्शाता है, जिसमें प्रीमियम अब कैश मार्केट का लगभग दोगुना है, जबकि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में यह 2 से 3 फीसदी है। नियामक द्वारा एक्सचेंजों को डेरिवेटिव शुरू करने से रोकने के निर्देश की खबर पहले नहीं आई है।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद भारत का एनएसई सबसे सक्रिय डेरिवेटिव एक्सचेंज बना हुआ है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के डेटा के अनुसार उसका दुनिया भर में कारोबार वाले इंडेक्स ऑप्शंस अनुबंधों में 70 फीसदी से अधिक का योगदान है।
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग में वॉल्यूम कम करने में मदद के लिए ट्रांजेक्शन टैक्स बढ़ा दिए। अध्ययनों से पता चला है कि 90 फीसदी रिटेल निवेशकों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में नुकसान होता है।
पहले सूत्र ने कहा, ‘सेबी चाहता है कि कैश इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव के लॉन्च के बीच कम से कम छह महीने का अंतर हो। एक्सचेंजों को तब तक डेरिवेटिव लॉन्च करने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि बाजार नियामक इस बात से संतुष्ट न हो जाए कि एक लिक्विड कैश मार्केट मौजूद है।’
सूत्र ने कहा कि नियामक नहीं चाहता कि नए खिलाड़ी पहले कैश मार्केट स्थापित किए बिना डेरिवेटिव ट्रेडिंग को बढ़ावा दें। दूसरे सूत्र ने कहा, ‘एक्सचेंजों को डेरिवेटिव लॉन्च करने की अनुमति मिलने से पहले पर्याप्त नकदी बाजार की भागीदारी, तरलता और कीमत निर्धारण का प्रदर्शन करना होगा।’ सेबी और एनसीडीईएक्स ने इस संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। एनसीडीईएक्स और एमएसई ने 2025 में इक्विटी में अपने विस्तार और टेक्नॉलजी को अपग्रेड करने के लिए पूंजी जुटाई थी।