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सेबी की चेतावनी: शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव से बढ़ रहा जोखिम, 10 में से 9 ट्रेडर्स को हो रहा नुकसान

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बाजार नियामक का लंबी अवधि के डेरिवेटिव अनुबंधों पर जोर, नकदी बाजार के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने पर भी विचार

Last Updated- July 17, 2025 | 9:37 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य (डब्ल्यूटीएम) अनंत नारायण जी ने गुरुवार को आगाह किया कि घरेलू इ​क्विटी डेरिवेटिव कारोबार में शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव का दबदबा बढ़ रहा है जिसके नतीजे बुरे भी हो सकते हैं। सीआईआई मार्केट कॉन्क्लेव में बोलते हुए सेबी के अ​धिकारी ने कहा, ‘लंबी अवधि के डेरिवेटिव के विपरीत इंडेक्स ऑप्शंस में एक्सपायरी डे ट्रेडिंग जैसे शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव साधन पूंजी निर्माण में बाधक बन सकते हैं।’

सेबी सट्टेबाजी से जुड़े शॉर्ट-टर्म सौदों को कम करने के लिए इक्विटी डेरिवेटिव की अवधि और परिपक्वता बढ़ाने और नकद बाजार कारोबार को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार कर रहा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बाजार नियामक वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) सेगमेंट में उन्माद रोकने के लिए कई कदम उठा रहा है। इनमें वीकली इंडेक्स एक्सपायरी की संख्या सीमित करना भी शामिल है। इसका एक कारण हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्में हैं जो बाजार पर आक्रामक दांव लगाने के लिए जानी जाती हैं। डेरिवेटिव ट्रेडिंग नियमों में सख्ती नवंबर 2024 में शुरू हुई। इस वजह से दोनों एक्सचेंजों के सूचकांकों पर कारोबार प्रभावित हुआ और शेयर ब्रोकरों के राजस्व पर भी दबाव पड़ा।

नारायण ने कहा, ‘हम मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों, ब्रोकरों और अन्य मध्यस्थों की संभावित चिंताओं को समझते हैं जिनका राजस्व इन अल्पाव​धि डेरिवेटिव वॉल्यूम पर काफी हद तक निर्भर करता होगा। लेकिन हम सबको खुद से ही पूछना होगा, क्या यह सब टिकाऊ है?’

उन्होंने कहा कि एक्सपायरी दिन में ऑप्शन कारोबार से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है और इससे अटकलबाजी का कारोबार बढ़ने से संभावित रूप से मूल्य निर्माण में भरोसा कमजोर हो सकता है। नारायण का कहना है कि इंडेक्स ऑप्शन में कारोबार अक्सर नकदी बाजार में कारोबार के 350 गुना या इससे ऊपर पहुंच जाता है।

सेबी के हाल के अध्ययन से पता चला है कि एफऐंडओ सेगमेंट में 10 में से 9 कारोबारियों को नुकसान हुआ और वित्त वर्ष 2025 में उन्होंने 1.01 लाख करोड़ रुपये का कुल नुकसान दर्ज किया।

नियामक ने कहा कि आंखें खोल देने वाला खुदरा घाटा इतनी बड़ी राशि है जो या तो सही निवेश और पूंजी निर्माण में जा सकती थी। नियामक का कहना है कि मौजूदा ढांचा किसी भी हितधारक के लिए टिकाऊ एवं अनुकूल नहीं है।

बाजार नियामक ने निवेशकों का व्यापक सर्वेक्षण भी शुरू किया है। इसमें 90,000 परिवारों को उनकी जोखिम जागरूकता के आधार पर शामिल किया गया है। निष्कर्ष के आधार पर सेबी वि​भिन्न भाषाओं में एक आउटरीच प्रोग्राम तैयार करेगा। नारायण ने बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ियों पर भी चिंता जताई।

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First Published - July 17, 2025 | 9:27 PM IST

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