facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

प्राइमेरी बाजारों से बही इस साल एफपीआई निवेश की हवा

सौभाग्य से देसी संस्थानों ने अपने निवेश से इनकी बिकवाली को झेल लिया है, जिससे शेयर बाजार में तेजी आई है।

Last Updated- December 08, 2024 | 10:30 PM IST
FPI

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के निवेश में पूरे साल उतार-चढ़ाव होता रहा। साल 2024 के 12 में से पांच महीनों में उन्होंने बिकवाली की है। नवंबर के अंत तक इस साल अब तक एफपीआई निवेशकों ने जमकर बिकवाली की है। मगर हालिया विदेशी निवेश में सुधार से यह साल लगातार दूसरा ऐसा हो सकता है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने खूब लिवाली की हो।

फिलहाल, इस साल अब तक एफपीआई निवेश 25,444 करोड़ रुपये है। प्राथमिक बाजारों में विदेशी निवेश मुख्य रूप से आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO), पात्र संस्थागत प्लेसमेंट (QIB) और राइट्स इश्यू के जरिये रिकॉर्ड 1.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

प्राथमिक बाजारों में एफपीआई निवेश का पिछला रिकॉर्ड साल 2021 में 78,164 करोड़ रुपये के साथ बना था। इस बीच, ऐसा लगता है द्वितीयक बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक संगठित तरीके से भारत में अपना निवेश कम कर रहे हैं और उन्होंने साल 2018 से भारतीय बाजार से अब तक 54,100 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।

सौभाग्य से देसी संस्थानों ने अपने निवेश से इनकी बिकवाली को झेल लिया है, जिससे शेयर बाजार में तेजी आई है। नतीजतन वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जून तिमाही के अंत तक नैशनल स्टॉक एक्सचेंज की सूचीबद्ध कंपनियों में एफपीआई की हिस्सेदारी गिरकर 12 साल के निचले स्तर 17.38 फीसदी पर आ गई।

First Published - December 8, 2024 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट