टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में स्थिर रहा। उसने राजस्व और मार्जिन में मामूली बढ़त हासिल की। लेकिन ब्रोकरेज फर्मों के बीच इस बात पर मतभेद बने हुए हैं कि भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा निर्यात कंपनी निरंतर वृद्धि की राह पर अग्रसर है या अभी भी अनिश्चित वैश्विक परिवेश के बीच असमान मांग से जूझ रही है।
विश्लेषकों की टिप्पणियों में एक समान बात यह है कि कंपनी का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और मार्जिन स्थिर हैं। लेकिन व्यापक मांग में तेजी की संभावना अभी भी सीमित है। बीएसई पर टीसीएस के शेयर 1.33 फीसदी बढ़कर 3,279 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। लेकिन अंत में 0.72 फीसदी के इजाफे के साथ 3,263 रुपये पर बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 0.3 फीसदी गिरकर 83,627.69 पर बंद हुआ।
टीसीएस ने तीसरी तिमाही में 7.51 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया, जो स्थिर मुद्रा में पिछली तिमाही की तुलना में 0.8 फीसदी ज्यादा है और बाजार की उम्मीदों से थोड़ा अधिक है। नोमू रा ने कहा कि प्रदर्शन ब्लूमबर्ग के अनुमान से बेहतर रहा, लेकिन प्रमुख बाजारों में मौसमी नरमी के कारण अंतरराष्ट्रीय कारोबार में वृद्धि पिछली तिमाही की तुलना में 0.4 फीसदी ही रही।
उत्तर अमेरिका में तिमाही आधार पर केवल 0.1 फीसदी की वृद्धि हुई। ब्रिटेन में 1.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। टीसीएस का सबसे बड़ा वर्टिकल बीएफएसआई तिमाही आधार पर 0.4 फीसदी घट गया जिससे ग्राहकों के खर्च में निरंतर सतर्कता का पता चलता है।
इन चुनौतियों के बावजूद परिचालन के मोर्चे पर प्रदर्शन स्थिर रहा। समायोजित परिचालन लाभ मार्जिन 25.2 फीसदी रहा, जो तिमाही आधार पर सपाट है और अधिकांश अनुमानों से ज्यादा है। ब्रोकरेज फर्मों ने मार्जिन में इस स्थिरता का श्रेय उत्पादकता में बढ़त, परिचालन दक्षता, पिरामिड ऑप्टिमाइजेशन और अनुकूल मुद्रा उतार-चढ़ाव को दिया, जिससे वेतन वृद्धि और ऊंची बिक्री, सामान्य एवं प्रशासनिक व्यय में वृद्धि का प्रभाव कम करने में मदद मिली।
मोतीलाल ओसवाल ने तिमाही को सुरक्षित बताया और कहा कि जारी निवेशों के बावजूद मार्जिन उम्मीद से बेहतर बने रहे। सिस्टमैटिक्स ने भी इस बात पर जोर दिया कि रणनीतिक पहलों पर खर्च जारी रहने के बावजूद दक्षता में सुधार के कराण मार्जिन काफी हद तक बरकरार रहा। लाभप्रदता पर एकमुश्त लागत का प्रभाव पड़ा। नोमुरा के अनुसार प्रति शेयर आय (ईपीएस) में सालाना आधार पर करीब 14 फीसदी की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण भारत के नए श्रम कानूनों के प्रावधान हैं।
इस तिमाही के दौरान टीसीएस ने उच्च ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण देनदारियों के लिए 2,130 करोड़ रुपये, पुनर्गठन के लिए 250 करोड़ रुपये और कानूनी दावों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। अधिकांश ब्रोकरेज फर्मों ने इन्हें गैर-आवर्ती मद माना। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च और एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने समायोजित लाभ पर ध्यान दिया है। उसने कहा कि अगर असाधारण मदों को हटा दें तो भी निहित आय रुझान स्वस्थ बने हुए हैं।
सौदों की रफ्तार एक और ऐसा क्षेत्र था, जिस पर व्यापक सहमति थी। टीसीएस का कुल अनुबंध मूल्य (टीसीवी) तीसरी तिमाही में 9.3 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9 फीसदी कम है और जिसका बुक-टू-बिल अनुपात करीब 1.2 गुना है। इस तिमाही में बीएफएसआई सेगमेंट में एक बड़ी डील हुई जबकि पिछले बारह महीनों में सौदे पिछले वर्ष की तुलना में थोड़े ज्यादा रहे।
नोमुरा ने कहा कि सौदों की अच्छी संभावना और पहली से तीसरी तिमाही तक मांग में क्रमिक सुधार प्रबंधन के इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं कि कैलेंडर वर्ष 2026 पिछले साल से बेहतर होगा। लेकिन उसने चेतावनी दी कि अभी इसे स्पष्ट वृद्धि में तब्दील होना है।
मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने सौदों की गति को उचित बताया, लेकिन सौदों के समय को लेकर अस्थिरता जारी रहने की आशंका जताई। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि कम समय में पूरे होने वाले सौदे और उच्च वार्षिक अनुबंध मूल्य (एसीवी) का बेहतर मिश्रण, विशेष रूप से एआई-आधारित परियोजनाओं में, सतत सुधार का प्रमुख संकेतक होगा।
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एक प्रमुख सकारात्मक पहलू के रूप में उभरी। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग और सिस्टमैटिक्स रिसर्च ने बताया कि एआई सेवाओं से सालाना आय 1.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो स्थिर मुद्रा के संदर्भ में क्रमिक रूप से 17 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्शाती है।
मूल्यांकन पर ब्रोकरेज फर्मों के विचार अलग-अलग थे। नोमुरा ने वृद्धि की अगुआई और मार्जिन में संभावित वृद्धि की सीमित संभावना का हवाला देते हुए 3,300 की लक्षित कीमत के साथ तटस्थ रेटिंग बरकरार रखी। लेकिन मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने स्थिर निष्पादन, सौदों की स्पष्टता और मार्जिन में मजबूती को देखते हुए 4,400 रुपये की लक्षित कीमत के साथ खरीद की रेटिंग दोहराई।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग, सेंट्रम ब्रोकिंग और सिस्टमैटिक्स रिसर्च ने भी एआई की बढ़ती लोकप्रियता और आकर्षक मूल्यांकन को देखते हुए खरीद रेटिंग बरकरार रखी है। फिर भी, टीसीएस को स्थिर प्रदर्शन करने वाली कंपनी के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन ब्रोकरेज फर्मों में इस बात पर मतभेद हैं कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच वह कितनी जल्दी निरंतर वृद्धि नेतृत्व की स्थिति में लौट सकती है।