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Rights Issue: राइट्स इश्यू को आकर्षक बनाने का प्रस्ताव, SEBI को साधना होगा संतुलन

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि समयसीमा में कमी स्वागतयोग्य है लेकिन कुछ प्रस्ताव इश्यू की गुणवत्ता के साथ समझौता हो सकते हैं।

Last Updated- August 21, 2024 | 9:41 PM IST
Sebi extends futures trading ban on seven agri-commodities till Jan 2025

बाजार नियामक सेबी ने राइट्स इश्यू की समयसीमा को मौजूदा चार महीने से घटाकर एक महीने से भी कम करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। बाजार में इसकी प्रशंसा हो रही है, लेकिन कुछ चिंता भी है। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि निवेश बैंक की नियुक्ति की जरूरत समाप्त करने से अनुचित और खराब गुणवत्ता वाले डिस्क्लोजर आ सकते हैं, साथ ही हितों के टकराव भी हो सकते हैं।

सूचीबद्ध कंपनियों (listed companies) के लिए रकम जुटाने के अन्य साधनों के मुकाबले राइट्स इश्यू को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए सेबी ने मंगलवार को राइट्स इश्यू के ढांचे में कई बदलावों का प्रस्ताव किया है। इन नियमों को अंतिम रूप तब दिया जाएगा जब नियामक को फीडबैक मिल जाएगा और इससे कंपनियों की अल्पावधि में पूंजी जुटाने की योजना में बदलाव नहीं आएगा।

खेतान लीगल एसोसिएट्स में पार्टनर संगीता झुनझुनवाला ने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए बताई गई समय सीमा घटाने के कदम से डिस्क्लोजर की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और भ्रामक तथा गलत जानकारी का जोखिम बढ़ा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस कदम का लक्ष्य बिना नियामकीय अड़चन के इश्यू लाने वाली कंपनियों को समय पर नकदी उपलब्ध कराना है। हालांकि मंजूरी आधारित से सूचना आधारित प्रक्रिया में जाते समय निवेशकों के हितों को भी सुरक्षित रखना होगा।

अभी मर्चेंट बैंकरों को एक्सचेंजों व सेबी के पास फाइलिंग के लिए ड्यू डिलिजेंस, पेशकश का मसौदा पत्र तैयार करना और दस्तावेज बनाने होते हैं। बाजार नियामक की योजना इनमें से कुछ कदमों से बाहर निकलने या भूमिका शेयर बाजारों को सौंपने की है जिससे से उसकी जिम्मेदारी घट जाएगी।

सिंघानिया ऐंड कंपनी में पार्टनर कुणाल शर्मा ने कहा कि निवेशकों का जोखिम उस समय बढ़ सकता है जब मर्चेंट बैंकर स्वतंत्र रूप से ड्यू डिलिजेंस नहीं करें क्योंकि वे इस प्रक्रिया में अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हैं। इश्यू लाने वाली कंपनी के पास अपने दम पर ड्यू डिलिजेंस की व्यवस्था नहीं भी हो सकती है जिससे गलतियां हो सकती हैं।

शर्मा ने कहा कि शेयर बाजारों और डिपॉजिटरीज की तरफ से आवेदन की पुष्टि और आवंटन के आधार को अंतिम रूप देने में हितों का टकराव हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ये इकाइयां पुष्टि और आवंटन दोनों में शमिल होती हैं तो वे निवेशकों से पहले अपने या इश्यू वाली कंपनियों के हितों को प्राथमिकता दे सकती हैं। हालांकि मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति की जरूरत समाप्त करना समयसीमा में कमी लाने के लिहाज से अहम है।

सेबी के चर्चा पत्र के मुताबिक मर्चेंट बैंकर ड्यू डिलिजेंस और विस्तृत पेशकश दस्तावेज तैयार करने में करीब 50-60 दिन का समय लेते हैं। सेबी ने ड्यू डिलिजेंस प्रमाणपत्र की जरूरत और नियामक के पास दस्तावेज का मसौदा जमा कराने की जरूरत समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।

First Published - August 21, 2024 | 9:41 PM IST

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