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करेंसी डेरिवेटिव्स पर बोले RBI के डिप्टी गवर्नर, कहा- हो रहा था नियमों का दुरुपयोग

निवेशकों की चिंता को देखते हुए रिजर्व बैंक ने गुरुवार को भारतीय रुपये से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स (ईटीसीडी) संबंधी मानकों को 3 मई तक टालने का फैसला किया था।

Last Updated- April 05, 2024 | 10:22 PM IST
RBI Deputy Governor spoke on currency derivatives, said rules were being misused करेंसी डेरिवेटिव्स पर बोले RBI के डिप्टी गवर्नर, कहा- हो रहा था नियमों का दुरुपयोग
मौद्रिक नीति जारी होने के बाद मुंबई स्थित भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्यालय में शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में उपस्थित गवर्नर शक्तिकांत दास और डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन, माइकल देवब्रत पात्र, एम. राजेश्वर राव और टी. रवि शंकर

एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाले करेंसी डेरिवेटिव्स के हाल के मानकों का समर्थन करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र ने कहा कि बाजार के कुछ हिस्सेदार दस्तावेजी साक्ष्य की जरूरत से छूट दिए जाने के नियम का दुरुपयोग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंतर्निहित निवेश को कम दिखाने की कवायद गलत और नियमों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि विदेशी विनिमय जोखिम प्रबंधन को लेकर रिजर्व बैंक की नीति हाल के वर्षों में स्थिर रही है और इसमें बदलाव न करने का रुख अपनाया गया है। साल 2008 में जब एक्सचेंज ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स (ईसीटीडी) की शुरुआत की गई थी तो उसका कामकाज विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत होता था। फेमा के नियमों में साफतौर पर कहा गया है कि ईटीसीडी को खासकर हेजिंग के मकसद से तैयार किया गया है, जो अंतर्निहित निवेश की अनिवार्यता का संकेत देता है।

पात्र ने कहा, ‘2014 में राहत देकर रिजर्व बैंक ने कारोबार सुगमता बढ़ाने की को​शिश की थी। अंतर्निहित निवेश अभी भी जरूरी है, लेकिन 1 करोड़ तक के एक्सपोजर के मामले में दस्तावेजी साक्ष्य अनिवार्य नहीं था। उसके बाद अगले कुछ साल में यह सीमा बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी गई, जिससे बाजार के कारोबार को प्रोत्साहन मिले और बाजार के आकार में बढ़ोतरी हो। लेकिन अहम बात है कि यह सिर्फ हेजिंग के लिए है और अंतर्निहित निवेश अनिवार्य जरूरत है।’

पात्र ने कहा, ‘दिसंबर 2023 की मौद्रिक नीति की घोषणा में की गई प्रतिबद्धता के पालन के लिए 5 जनवरी 2024 को सर्कुलर जारी किया गया। इसमें हमने कहा है कि विभिन्न शर्तें बिखरी हुई हैं। हम उन्हें एक प्रमुख दिशानिर्देश में इकट्ठा करेंगे और 24 जनवरी के सर्कुलर में ऐसा किया गया। सामान्य तरीके से इसमें जोर दिया गया है कि 2014 से जो चल रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं है। अब कुछ बाजार हिस्सेदार इसकी गलत व्याख्या कर रहे थे कि दस्तावेजी छूट से राहत दिए जाने का मतलब यह था कि कोई अंतर्निहित निवेश की जरूरत नहीं है, जबकि ऐसा नहीं था। और इसकी वजह से कानून का उल्लंघन हो रहा था।’

निवेशकों की चिंता को देखते हुए रिजर्व बैंक ने गुरुवार को भारतीय रुपये से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स (ईटीसीडी) संबंधी मानकों को 3 मई तक टालने का फैसला किया था। मानक शुक्रवार से लागू होने वाले थे। अब रुपये में होने वाले करेंसी कॉन्ट्रैक्ट का कारोबार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसई में होगा, जिसमें अंतर्निहित निवेश की जरूरत होगी। हालांकि ट्रेडर्स को 10 करोड़ डॉलर तक के अंतर्निहित निवेश में पोजिशन लेने के लिए साक्ष्य देने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उन्हें निवेश के अस्तित्व की पुष्टि करनी होगी।

डिप्टी गवर्नर पात्र की बात आगे बढ़ाते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात पर जोर दिया कि रिजर्व बैंक की पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि अंतर्निहित निवेश की अनिवार्यता हमेशा से मुख्य पहलू रहा है। उन्होंने हाल में सर्कुलर जारी किए जाने की वजह साफ की।

उन्होंने कहा, ‘कल (गुरुवार) के सर्कुलर या उसके पहले कोई बदलाव नहीं हुआ है। रिजर्व बैंक की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह नीति कई वर्षों से मौजूद थी। यह कुछ ऐसा है, जिसे हर बाजार हिस्सेदार जानता है।’

First Published - April 5, 2024 | 10:22 PM IST

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