फेड के अगले चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नामांकन ने बाजारों, खासकर कीमती धातुओं के क्षेत्र को चौंका दिया। अमेरिका की बोफा ग्लोबल रिसर्च में वरिष्ठ अमेरिकी अर्थशास्त्री आदित्य भावे ने पुनीत वाधवा को एक ईमेल इंटरव्यू में बताया कि नवंबर में अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से उन्हें उम्मीद है कि व्यापार नीति में वृद्धि के लिहाज से ज्यादा सहायक रुख अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा से भारत के वृद्धि परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता कम हुई है। उनसे बातचीत के अंश:
भारत पर आपका क्या नजरिया है?
हमारे भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि भारतीय बाजार (निफ्टी सूचकांक) पहले से ही दीर्घावधि मूल्यांकन के ऊपरी दायरे में कारोबार कर रहा है और इसलिए मूल्यांकन वृद्धि/रेटिंग में बढ़त की सीमित संभावना है। रणनीतिकारों की राय में अब रिटर्न आय वृद्धि पर निर्भर करेगा, जो वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 14 फीसदी हो सकती है। निफ्टी ने वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 में मध्यम एक अंक की आय वृद्धि दर्ज की। इसलिए, वर्ष के अंत (दिसंबर 2026) तक 13 फीसदी की तेजी का अनुमान है।
अगले 12 महीनों में भारत में आय वृद्धि कैसी रहेगी?
भारत ने पिछले साल कई बाहरी झटकों का सामना किया। भारत में हमारे अर्थशास्त्रियों ने आंकड़े के बेहतर होने के बाद हाल में अपने अनुमानों को बेहतर किया है। अब वे वित्त वर्ष 2027 में 6.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में निजी खपत लगातार 7 प्रतिशत से ऊपर बढ़ेगी, हालांकि निवेश से जुड़े खर्च में कमी आने की संभावना है। हाल में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा से भारत के विकास दृष्टिकोण को लेकर अनिश्चितता कम हुई है। हमारी भारत की टीम को अगले 12 महीनों में आरबीआई से और कटौती की उम्मीद नहीं है, जब तक कि जीडीपी सीरीज में बदलाव के बाद वृद्धि में कुछ कमजोरी न आए।
चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक हालात के बीच 2026 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था कैसी रहेगी?
हम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी हैं। हम 2026 में 2.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं। हमारे आशावाद के पांच कारण हैं। पहला, ओबीबीबीए (वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट), जो पिछली गर्मियों में पारित हुआ था, से कंज्यूमर और पूंजीगत खर्च प्रोत्साहन के माध्यम से इस साल जीडीपी वृद्धि में 0.3-0.4 प्रतिशत अंक की तेजी आ सकती है। दूसरा, फेड द्वारा पिछले साल की गई 75 आधार अंक की कटौती का असर आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था में दिखेगा। तीसरा, नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव होने हैं, ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि व्यापार नीति विकास के लिए अधिक सहायक साबित होगी। चौथा, एआई से संबंधित निवेश इस साल ठोस गति से बढ़ना जारी रह सकता है। पांचवां, पिछले साल में सरकार के शट डाउन से 2026 में जीडीपी वृद्धि होनी चाहिए।
क्या आपको लगता है कि वैश्विक वित्तीय बाजार, खासकर कीमती धातुओं ने फेड चेयरमैन के नामांकन पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी?
केविन वार्श के नॉमिनेशन पर बाजार की प्रतिक्रिया से हम हैरान थे। फेड पॉलिसी दरों पर उनका हालिया रुख नरम रहा है। हालांकि उन्होंने फेड की बैलेंस शीट पर अपना सख्त रुख बनाए रखा है, लेकिन बैंकिंग डीरेगुलेशन में बड़े बदलाव के बिना 6.6 लाख करोड़ डॉलर की बैलेंस शीट को छोटा करना बहुत मुश्किल होगा। फिर भी, कमी की गुंजाइश बहुत कम है। हमें उम्मीद नहीं है कि वार्श पॉलिसी दरों या बैलेंस शीट को लेकर असल में सख्त रहेंगे।