विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने फरवरी के दूसरे पखवाड़े में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों से 5,993 करोड़ रुपये की निकासी की। लिहाजा, इस क्षेत्र से उनकी कुल निकासी 16,949 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। यह जुलाई 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। बिकवाली इस बढ़ती चिंता के बीच हुई कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कारण होने वाला व्यवधान भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के कारोबारी मॉडल को उलट सकता है और उनकी लाभप्रदता पर दबाव डाल सकता है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के एक नोट में कहा गया है, हम वित्त वर्ष 2027-28ई में आईटी सेवा उद्योग के राजस्व में 3 से 3.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। नवाचार की तीव्र रफ्तार, प्रमुख एआई प्रयोगशालाओं द्वारा सॉफ्टवेयर विकास को स्वचालित करने पर ध्यान देने, डेवलपर समुदाय के इसे बड़े पैमाने पर अपनाने और उद्यमों के बीच एआई-फर्स्ट की मानसिकता के कारण गिरावट के ऊपरी सीमा तक पहुंचने की ज्यादा संभावना लगती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आईटी शेयर काफी गिर गए। निफ्टी आईटी इंडेक्स फरवरी में 19.5 फीसदी फिसल गया, जो वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान सितंबर 2008 में आई 21 फीसदी औंधे मुंह होने के बाद इसमें सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
निफ्टी आईटी क्षेत्र की कंपनियों का बाजार पूंजीकरण इस माह 18.7 फीसदी घटा और यह 31.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर 25.53 लाख करोड़ रुपये रह गया। एआई के कारण होने वाले व्यवधान की आशंकाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब भारतीय आईटी कंपनियां पहले से ही धीमी आय वृद्धि से जूझ रही थीं।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक जी. चोकालिंगम ने कहा, एआई बड़ा ढांचागत बदलाव है। एआई के इस खतरे से पहले भी भारतीय आईटी कंपनियां एक अंक में राजस्व वृद्धि दर्ज कर रही थीं। वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) ने पहले ही उनके राजस्व का कुछ हिस्सा छीनना शुरू कर दिया था। अगर उद्योग 12-13 फीसदी की दर से बढ़ रहा होता तो घबराने का कोई कारण नहीं होता।
उन्होंने कहा कि निवेशक तेजी से उन क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं, जिनको मजबूत घरेलू मांग से लाभ हो रहा है। चोकालिंगम ने कहा, निवेशक घरेलू मांग से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता देंगे, खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के बाद। आईटी शेयरों में निवेश कम करना समझदारी भरा कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र का प्रदर्शन व्यापक सूचकांकों की तुलना में कमजोर रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि एआई को अपनाने में तेजी के साथ परियोजनाओं पर तैनात कर्मचारियों की संख्या के आधार पर पारंपरिक बिलिंग मॉडल कमजोर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, परियोजना में शामिल लोगों की संख्या पर आधारित पारंपरिक बिलिंग मॉडल धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। इससे राजस्व और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। निवेशक एआई के प्रभाव को पूरी तरह से समझने और यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि कौन सी कंपनियां एआई का लाभ उठाकर वृद्धि में गिरावट से बच सकती हैं। इस प्रक्रिया में दो से चार तिमाही और लग सकती हैं।
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली ऐसे समय हुई जब एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में मजबूती के साथ शुद्ध खरीदारी की। उन्होंने फरवरी 2026 में 22,615 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक निवेश और सितंबर 2024 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
इस माह के दौरान एफपीआई ने 12,135 करोड़ रुपये के पूंजीगत सामान, 8,418 करोड़ रुपये के वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयर और 5,638 करोड़ रुपये के धातु एवं खनन क्षेत्र के शेयर खरीदे। आईटी क्षेत्र के अलावा एफपीआई ने उपभोक्ता सेवाओं (4,172 करोड़ रुपये) और तुरंत खपत उपभोक्ता वस्तुओं (1,951 करोड़ रुपये) में भी खासी बिकवाली की।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते और अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 करने के फैसले के बाद विदेशी निवेशकों ने शुद्ध खरीदारी की। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को जोखिम से बचने के लिए मजबूर कर दिया है। इस महीने विदेशी निवेशकों ने अब तक लगभग 21,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं।