भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए साल की शुरुआत मुश्किल भरी रही क्योंकि महंगे मूल्यांकन, कमजोर रुपये और टेक्नॉलजी पर दबाव ने जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि सबसे बुरा समय अब बीत चुका है और वे अच्छी गुणवत्ता वाले बैंकिंग, ऑटो, रक्षा और फार्मा शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।
मिरे ऐसेट शेयरखान में रिटेल रिसर्च के प्रमुख सोमिल मेहता ने कहा, ‘अल्पावधि में सीमित (ऊपर की ओर) कारकों के बावजूद, निवेशकों को धीरे-धीरे, (आक्रामक रूप से नहीं) निवेश शुरू करना चाहिए। हालांकि वैश्विक जोखिम पूरी तरह से कम नहीं हुए हैं, लेकिन नकारात्मकता का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही तय है।’ उन्होंने कहा कि कई जगहों पर मूल्यांकन सुस्त पड़ गया है और धीरे-धीरे निवेश करना एक समझदारी वाली रणनीति है।
सेंसेक्स 1 फरवरी को 79,899.42 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल 1 दिसंबर के 86,159 के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर से 7.3 प्रतिशत (6,259.58 अंक) नीचे था। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक इस साल 5 जनवरी को बनाए गए 26,373 के अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर से 6.8 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप अपने ऊंचे स्तरों से 8.8 प्रतिशत से 18.15 प्रतिशत तक गिर गए।
सेंसेक्स अपने हाल के निचले लेवल से 3.5 प्रतिशत ऊपर आ गया है, जबकि निफ्टी 50 बुधवार तक 3.87 फीसदी ऊपर था। निफ्टी मिडकैप अपने निचले स्तर से 7.5 प्रतिशत नीचे है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 5.3 प्रतिशत ऊपर है।
एएसके प्राइवेट वेल्थ के मुख्य निवेश अधिकारी और इक्विटी परामर्श प्रमुख विनय जयसिंह ने कहा, ‘पिछले 18 महीनों में भारतीय मुद्रा की कीमत में लगभग 10 फीसदी की गिरावट के साथ, भारतीय बाजार विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए अब आकर्षक लगने लगे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘रुपया स्थिर रह सकता है, जैसा कि 97.8 के रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट में दिखा है, जिसका मतलब है कि रुपये की वैल्यू कम है। 717 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (6 फरवरी, 2026 तक), इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील और भारतीय उद्योग जगत की तीसरी तिमाही की अच्छी कमाई से पता चलता है कि सबसे बुरा समय बीत चुका है।’
विश्लेषकों का कहना है कि पूरी तरह से नकदी पर बैठे रहना शायद सबसे अच्छी स्ट्रैटेजी न हो और निवेशकों को रुक-रुक कर पैसा लगाते रहना चाहिए और धीरे-धीरे पोजीशन बनानी चाहिए।
संविति कैपिटल के निदेशक एवं मुख्य अधिकारी (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस) प्रभाकर कुडवा ने कहा कि टॉप 250 मार्केट-कैप से नीचे के शेयरों में सबसे तेज गिरावट आई है जिससे मूल्यांकन ज्यादा आकर्षक हो गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘निवेशक उन क्षेत्रों और थीम पर ध्यान दे सकते हैं जिन्हें व्यापार करार से सीधे फायदा हो, क्योंकि अनुकूल व्यापार शर्तों से जुड़ी कंपनियों के राजस्व और मार्जिन प्रोफाइल में काफी बढ़ोतरी हो सकती है।’मिरे ऐसेट शेयरखान के सोमिल मेहता लार्जकैप एवं कुछ मिडकैप को पसंद कर रहे हैं और स्मॉलकैप को लेकर सतर्क हैं। वे डिफेंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स, सरकारी बैंकों, पावर और फार्मा को लेकर सकारात्मक हैं।
उनका कहना है कि इन क्षेत्रों को मजबूत नीतिगत स्पष्टता, लंबे समय के सरकारी खर्च और बेहतर होती बैलेंस शीट से मदद मिल रही है। एमके इन्वेस्टमेंट मैनेजर के फंड प्रबंधक और शोध प्रमुख कश्यप जावेरी ने कहा कि ऑटो और ऑटो एंसिलरीज, कैपिटल गुड्स और कुछ फार्मा कंपनियां विजेता के तौर पर उभर सकती हैं।