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प्रवर्तकों के पुनर्वर्गीकरण में छूट देगा सेबी!

Last Updated- December 14, 2022 | 8:57 PM IST

खुद को समान्य शेयरधारक के तौर पर दोबारा वर्गीकृत किए जाने की इच्छा रखने वाले सूचीबद्ध कंपनियों के प्रवर्तकों के लिए अब ऐसा करना मुमकिन हो सकता है। बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को मौजूदा पुनर्वर्गीकरण प्रक्रिया में नरमी का प्रस्ताव किया है।
बाजार नियामक ने कहा है कि पात्रता की सीमा 10 फीसदी से 15 फीसदी की जा सकती है। अभी किसी कंपनी में 10 फीसदी से कम हिस्सेदारी रखने वाले प्रवर्तक ही खुद को सार्वजनिक शेयरधारक के तौर पर दोबारा वर्गीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
सेबी ने कहा है, जिन प्रवर्तकों का कंपनी की रोजाना की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं है और शेयरधारिता 15 फीसदी से कम है, वे खुद को प्रवर्तक की सूची से बाहर रखने का विकल्प चुन सकते हैं और वह भी अपनी शेयरधारिता मेंं कमी लाए बिना।
साथ ही शेयरधारकों के पुनर्वर्गीकरण के अनुरोध और इस प्रस्ताव पर विचार के लिए बोर्ड बैठक के बीच का अंतर तीन महीने से घटाकर एक महीने करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे पुनर्वर्गीकरण की प्रक्रिया को छोटा करने में मदद मिलेगी।
सेबी का प्रस्ताव है कि पुनर्वर्गीकरण के मानदंडों को नरम किया जा सकता है अगर यह सरकारी या किसी नियामकीय निकाय के आदेश के अनुपालन के तहत हो रहा हो। अभी इस तरह की छूट सिर्फ आईबीसी के मामलों में ही दी जाती है।
इसके अलावा नियामक का प्रस्ताव है कि नियम मेंं नरमी लाई जा सकती है अगर पुनर्वर्गीकरण खुली पेशकश के आधार पर हो। हालांकि सेबी ने कहा है कि मौजूदा प्रवर्तकों के दोबारा वर्गीकरण के इरादे का खुलासा पेशकश वाले पत्र में करना होगा।
सेबी ने कहा है कि जहां पुराने प्रवर्तकों को खोजना मुश्किल है या वे सहयोग नहींं कर रहे हैं उन्हें आम शेयरधारक के तौर पर दोबारा वर्गीकृत किया जा सकता है। हालांकि सूचीबद्ध इकाई को बताना हो गा कि प्रवर्तक से संपर्क की कोशिश की गई और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रवर्तक का नियंत्रण नहीं है।
इस बीच, सेबी ने खुलासा की अनिवार्यता को सख्त बनाने का भी प्रस्ताव किया है। नियामक ने कहा है कि प्रवर्तक समूह की श्रेणी में आने वाली इकाइयों का नाम शेयरधारिता के आंकड़े मेंं करना होगा, चाहे उसके पास कोई शेयर न हो।
सेबी ने विभिन्न प्रस्तावों पर 24 दिसंबर तक आम लोगों से टिप्पणी मांगी है। कई इकाइयों ने सेबी से संपर्क कर मौजूदा ढांचे में मुश्किलों की बात कही थी। नियामक मामले दर मामले के आधार पर मौजूदा अनिवार्यताओं में छूट दे रहा है। सेबी ने कहा है कि नए प्रस्ताव से काफी मदद मिलेगी।
मौजूदा प्रावधान के तहत सूचीबद्ध इकाइयों के निदेशक मंडल को प्रवर्तक के पुनर्वर्गीकरण के अनुरोध का विश्लेषण करना होता है और उसे मंजूरी के लिए बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखना होता है।

First Published - November 23, 2020 | 11:39 PM IST

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