भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार लाने के लिए स्वतंत्र निदेशकों (independent directors) की क्षमता निर्माण हेतु पेशेवर संस्थाओं, उद्योग और शैक्षणिक जगत के साथ मिलकर एक ज्वाइंट पहल शुरू करेगा। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को यह जानकारी दी। CII कॉर्पोरेट गवर्नेंस शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, पांडेय ने प्रभावी शासन में मौजूद कमियों पर प्रकाश डाला।
पांडेय ने कहा, “हम जो बढ़ती हुई स्थिति देख रहे हैं, वह इरादे या नियमों में कमी नहीं, बल्कि उनके सही क्रियान्वयन में गैप है। बोर्ड अच्छी तरह गठित हैं, लेकिन हमेशा समान रूप से प्रभावी नहीं होते। जानकारी उपलब्ध है, लेकिन उस पर हमेशा गहराई से विचार नहीं किया जाता। स्वतंत्रता कागजों पर मौजूद है, लेकिन वह हमेशा स्वतंत्र सोच में बदल नहीं पाती।”
उन्होंने आगे स्वतंत्र निदेशकों से जिम्मेदारी लेने, जवाबदेही के साथ सहयोग करने और समाधान तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल अनुपालन (compliance) तक सीमित नहीं रहना चाहिए और न ही सिर्फ प्रबंधन पर उंगली उठाने पर ध्यान देना चाहिए।
Also Read: SIP के दम पर MF इंडस्ट्री मजबूत, AUM लगातार तीसरे फाइनैंशियल ईयर में 20% बढ़ा
पांडेय ने कहा, “अब चर्चा इस बात से आगे बढ़नी चाहिए कि बोर्ड में कौन बैठा है, और इस पर ध्यान देना चाहिए कि वहां पहुंचने के बाद वे कितनी प्रभावी तरीके से योगदान दे पा रहे हैं।”
उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एचडीएफसी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अतानु चक्रवर्ती के ‘नैतिकता और मूल्यों’ में असंगति का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफे के बाद बैंक में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जांच पड़ताल हो रही है।
सेबी चेयरमैन ने स्वतंत्र निदेशकों से केवल जानकारी (information) तक सीमित न रहकर उसे समझने और उससे अंतर्दृष्टि (insight) निकालने की दिशा में आगे बढ़ने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ डेटा की समीक्षा ही नहीं, बल्कि उसके निहितार्थ को समझना, रचनात्मक असहमति (constructive dissent) को प्रोत्साहित करना और केवल अनुपालन-आधारित चर्चा से आगे बढ़कर मूल्य-आधारित संवाद करना शामिल होना चाहिए, जिसमें आचरण, दीर्घकालिक स्थिरता और वित्तीय प्रदर्शन—सभी पर ध्यान दिया जाए।
उन्होंने स्वतंत्र निदेशकों से यह भी आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग करें, ताकि समय पर जरूरी संकेत बोर्ड तक पहुंचाए जा सकें।
Also Read: Retirement Funds: सेबी के यू-टर्न के बाद क्या करें निवेशक? पैसा लगाएं या बचें
डिस्क्लोजर, बोर्ड स्ट्रक्चर और जवाबदेही तंत्र में हुए सुधारों का जिक्र करते हुए पांडेय ने कहा कि सेबी ने सूचना असमानता (information asymmetry) को कम करने के लिए समय-समय पर और घटनाओं के आधार पर होने वाले खुलासों (disclosures) को मजबूत किया है। इसके साथ ही, स्पष्ट मटेरियलिटी थ्रेशोल्ड और समय-सीमा तय की गई है, तथा बोर्ड की स्वतंत्रता और समितियों की निगरानी को भी मजबूत किया गया है।
पांडेय ने कहा, “इन कदमों ने एक मजबूत आधार जरूर तैयार किया है, लेकिन केवल मजबूत आधार होने से प्रभावी परिणाम अपने आप सुनिश्चित नहीं हो जाते।”