म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने लगातार तीसरे वित्त वर्ष में एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) में 20 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की, जबकि इस दौरान इक्विटी बाजारों ने पिछले छह वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन दिया। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में उद्योग का एवरेज AUM 81.5 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 67 लाख करोड़ रुपये से 21 फीसदी ज्यादा है।
बेंचमार्क इंडेक्स FY26 के दौरान दबाव में रहे। निफ्टी 50 में 5.1 फीसदी की गिरावट आई, जबकि सेंसेक्स 7.1 फीसदी फिसला, जो महामारी प्रभावित FY20 के बाद उनका सबसे खराब प्रदर्शन रहा। व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिक्स रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.9 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 6 फीसदी गिर गया।
कुल मिलाकर बाजार पूंजीकरण (MCap) लगभग 412 लाख करोड़ रुपये पर लगभग स्थिर रहा, जो 2 जनवरी 2026 को करीब 481 लाख करोड़ रुपये के हाई से नीचे आ गया था।
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उतार-चढ़ाव के बावजूद, AUM में मजबूत वृद्धि म्युचुअल फंड उद्योग की बढ़ती मजबूती को दर्शाती है, जिसे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार स्थिरता का एक अहम आधार माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसका श्रेय सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से लगातार हो रहे निवेश और गैर-इक्विटी योजनाओं में बढ़ती निवेशकों की रुचि को जाता है, जिसने कमजोर इक्विटी रिटर्न के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया।
क्वांटम म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर जिमी पटेल ने कहा, “अच्छी बात यह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह वृद्धि हुई है, क्योंकि निवेशक काफी हद तक स्थिर रहे और एसआईपी इनफ्लो बरकरार रहा। सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) जैसे सेगमेंट से भी अतिरिक्त सहारा मिला है।”
FY26 के दौरान गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ी। सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल और हालिया मजबूत रिटर्न ने नए निवेशकों को आकर्षित किया। इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को इन अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय फंड कैटेगरीज की ओर मोड़ा। इस बढ़ती दिलचस्पी ने जनवरी में चरम पर पहुंचते हुए दोनों सेगमेंट में कुल निवेश को रिकॉर्ड 33,500 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया।
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इक्विटी, डेट और कमोडिटी में एक साथ निवेश करने वाले मल्टी-एसेट फंड्स में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। इस कैटेगरी ने मजबूत प्रदर्शन के चलते वर्ष के पहले 11 महीनों में 60,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हासिल किया।
हालांकि अन्य कैटेगरीज में निवेश बढ़ा, लेकिन पिछले वर्ष इक्विटी फंड में निवेश की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई। FY26 में फरवरी तक इक्विटी फंड में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया, जो FY25 के मुकाबले करीब 27 फीसदी कम है। अस्थिर बाजारों ने एकमुश्त (लंपसम) निवेश को प्रभावित किया और नए फंड लॉन्च की गति को भी धीमा कर दिया।
फिर भी, SIP के जरिए निवेश लगातार बढ़ता रहा, जिसने उद्योग के AUM पर मार्क-टू-मार्केट नुकसान के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद की।
हाल ही में मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज ने HDFC AMC पर अपनी रिपोर्ट में कहा, “उद्योग की संरचना मजबूत बनी हुई है। अस्थिर दौर में रिटेल AUM ज्यादा स्थिरता प्रदान करता है, जबकि संस्थागत निवेश ज्यादा चक्रीय (cyclical) होता है और बाजार की चाल के प्रति ज्यादा संवेदनशील रहता है।”