facebookmetapixel
Advertisement
प्लास्टिक पाइप बनाने वाली कंपनी के शेयर पर ब्रोकरेज बुलिश, कहा-खरीद लो; मिल सकता है 44% तक रिटर्नरक्षा मंत्रालय ने 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को दी मंजूरी, ₹3.6 लाख करोड़ के रक्षा सौदे पासCPI: जनवरी में खुदरा महंगाई 2.75% रही; सरकार ने बदला आधार वर्षGold Buying: 62% जेन जी और मिलेनियल्स की पहली पसंद बना सोना, म्यूचुअल फंड-एफडी-इक्विटी को छोड़ा पीछेHousing sale tier 2 cities: टियर-2 शहरों में भी खूब बिक रहे हैं महंगे मकानTCS का मार्केट कैप गिरा, ICICI बैंक ने पहली बार पार किया 10 ट्रिलियनNifty IT Stocks: 10 महीने के लो के पास IT स्टॉक्स, निवेशकों में बढ़ी चिंता; आखिर क्यों टूट रहा है सेक्टर?बैंकिंग सेक्टर में बड़ा मौका? एक्सिस डायरेक्ट ने बताए ये कमाई वाले स्टॉक्स, जान लें टारगेटभारत में डायबिटीज के लिए एक ही जांच पर ज्यादा निभर्रता जो​खिम भरी, विशेषज्ञों ने कहा- अलग HbA1c स्टैंडर्ड की जरूरतविदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में 3 साल में 31% की भारी गिरावट, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

SAT ने ट्रैफिकसोल के खिलाफ सेबी के आदेश को सही ठहराया

Advertisement

नियामक ने आईपीओ निवेशकों को रकम लौटाने का निर्देश दिया था

Last Updated- January 24, 2025 | 10:32 PM IST
SEBI

प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) ने शुक्रवार को ट्रै​फिकसोल आईटीएस टेक्नोलॉजिज के खिलाफ बाजार नियामक सेबी के आदेश को सही ठहराया। दिसंबर में बाजार नियामक ने ट्रैफिकसोल को उन निवेशकों को रकम लौटाने का निर्देश दिया था जिन्हें आईपीओ के तहत शेयर आवंटित किए गए थे। ट्रैफिकसोल का 45 करोड़ रुपये का आईपीओ बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर सितंबर 2024 में सूचीबद्ध होने वाला था। लेकिन आईपीओ में मिली रकम के इस्तेमाल और गलत खुलासों की शिकायतों के बाद इसे रोक दिया गया था। इस इश्यू को करीब 345 गुना आवेदन मिले थे। अक्टूबर 2024 में सेबी ने आदेश जारी किया था जिसके बाद इस मामले की विस्तृत जांच हुई।

दिसंबर के आदेश में सेबी ने थर्ड पार्टी वेंडर की संदिग्ध प्रकृति की ओर संकेत दिया था, जिससे ट्रैफिकसोल अपने आईपीओ की करीब 40 फीसदी रकम के जरिए सॉफ्टवेयर खरीदने जा रही थी। सेबी ने कहा कि थर्ड पार्टी वेंडर मुखौटा इकाई थी और आरोप लगाया कि कंपनी ने तब इस पर पर्दा डालने की कोशिश की जब वेंडर की जांच की गई। सेबी की शुरुआती जांच में पाया गया कि थर्ड पार्टी वेंडर ने तीन साल से ज्यादा समय से कंपनी मामलों के मंत्रालय के पास वित्तीय विवरण जमा नहीं कराया था और पिछले साल उसने कोई राजस्व अर्जित नहीं किया था जिसका वित्तीय विवरण जमा कराया गया था।

इसके अलावा वेंडर के पिछले तीन साल के वित्तीय विवरण पर सूचीबद्धता से कुछ दिन पहले एक ही दिन हस्ताक्षर किए गए थे। वेंडर का पंजीकृत कार्यालय भी बंद था और उसका जीएसटी रिटर्न खुलासा किए गए कारोबार से मेल नहीं खा सका।

Advertisement
First Published - January 24, 2025 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement