facebookmetapixel
Advertisement
नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय लापता, 547 पहुंची मृतकों की संख्या; भारत ने भेजी राहत और बचाव टीमAGM टलने के बाद टाटा संस को कंपनी रजिस्ट्रार से मिली राहत, लेकिन साल के आखिर तक पूरी करनी होगी बैठकआगामी बजट की कवायद शुरू! वित्त मंत्रालय ने मंगवाए संशोधित अनुमान, 12 अक्टूबर से होंगी प्री-बजट बैठकें‘एस्सेल समूह ने 45,000 में से चुकाए 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज’, आरोपों के बीच सुभाष चंद्रा ने किया दावाइंडिगो ने सर्वम AI में लगाया पैसा, विमानन क्षेत्र में बढ़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालक्या पटरी पर लौट आया वोडाफोन आइडिया? लगातार छठे महीने बढ़े ग्राहक, 20 करोड़ के करीब पहुंचा आंकड़ाहिमालय में नई झील का खतरा: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बनी 20 हेक्टेयर की झील, निचले इलाकों पर अलर्टभारत-कनाडा का 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार $50 अरब पहुंचाने का लक्ष्य, वित्त मंत्री सीतारमण ने किया ऐलानजुलाई में सुस्त पड़ी औद्योगिक विकास की रफ्तार, IIP दर घटकर 6.7% पर पहुंची; मैन्‍युफैक्‍चरिंग की रफ्तार धीमीभारत-अमेरिका में हुआ बड़ा रक्षा सौदा, भारतीय सेना के लिए खरीदी जाएंगी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें

RBI कैलेंडर बदलाव: कम अवधि वाले बॉन्ड की यील्ड घटने की उम्मीद

Advertisement

ट्रेजरी बिल इश्यू में कमी से घट सकती है कम अवधि वाले बॉन्डों की यील्ड

Last Updated- May 20, 2024 | 11:33 PM IST
Government Bonds

बाजार के हिस्सेदारों का कहना है कि मंगलवार को कम अवधि वाले सरकार के बॉन्ड का यील्ड कम हो सकता है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ट्रेजरी बिल के लिए संशोधित कैलेंडर जारी करने की घोणणा के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है। चालू साल में 22 जून से 26 जून की अवधि के अद्यतन कार्यक्रम में ट्रेजरी बिल इश्यूएंस में 60,000 करोड़ रुपये की कमी किया जाना भी शामिल है।

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘इश्युएंस की राशि घटी है। इसका मतलब यह है कि नकदी नहीं कम की जाएगी और यह अब व्यवस्था में आएगी। इसकी वजह से कम अवधि के बॉन्डों की यील्ड कम होगी।’ उन्होंने कहा, ‘हम उम्मीद कर रहे हैं कि कम अवधि के बॉन्डों के यील्ड में करीब 6 आधार अंक की गिरावट आएगी।’

शुक्रवार को 5 साल के गवर्नमेंट बॉन्ड का यील्ड 7.09 प्रतिशत पर बंद हुआ था। बाजार हिस्सेदारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह कदम यील्ड में तेज बदलाव करने के लिए है। एक अन्य सरकारी बैंक से जुड़े डीलर ने कहा, ‘अब तक यील्ड स्थिर रहा है।

रिजर्व बैंक चाहता है कि कम अवधि के बॉन्डों का यील्ड कम हो।’ उन्होंने कहा कि अब लंबी अवधि के लिए मांग देख सकते हैं। बाजार हिस्सेदारों का कहना है कि वैश्विक सूचकांक में भारतीय बॉन्डों को शामिल किए जान के पहले ट्रेडर्स इस समय दीर्घावधि बॉन्ड जमा कर रहे हैं, जिनकी 10 और 14 साल की मेच्योरिटी है।

एक अन्य सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘इस समय ध्यान 10 साल और 14 साल के दीर्घावधि बॉन्डों पर है क्योंकि बॉन्ड को सूचकांक में शामिल किए जाने के बाद पूंजी बढ़ने की संभावना है। कम अवधि के बॉन्डों की मांग नहीं है क्योंकि दर में कटौती की संभावना नहीं है।’

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल सितंबर से दर में कटौती शुरू किए जाने की संभावना है, वहीं ट्रेडर्स का कहना है कि दरें तय करने वाली समिति द्वारा मार्च 2025 से ही दर में कटौती की संभावना है। कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि अगले वित्त वर्ष (2025-26) की दूसरी छमाही में ही दर में कटौती की संभावना है।

Advertisement
First Published - May 20, 2024 | 11:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement