facebookmetapixel
Advertisement
हेल्थकेयर में AI का बढ़ता दायरा: रिपोर्ट के अनुसार ‘रिमोट मॉनिटरिंग’ होगा विकास का अगला बड़ा जरियारिकॉर्ड हाई पर कॉपर की कीमतें, बाजार खुलते ही 4% दौड़ा ये PSU शेयर; निवेशक क्या करें?बढ़ते ट्रेड तनाव के बीच कनाडा-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में खटास, वाइन और डेयरी समेत कई सेक्टर प्रभावित40% तक चढ़ सकते हैं ये 5 Insurance Stocks! HDFC Life से LIC तक ब्रोकरेज ने दिए बड़े टारगेटमहंगे चिप की मार! सैमसंग इंडिया ने 100 कर्मचारियों को निकाला, दिवाली बाद फिर हो सकती है छंटनीनवंबर में आ सकता है जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO, अगले हफ्ते से विदेशी निवेशकों को साधने की तैयारीIPO बाजार में बनेगा रिकॉर्ड! 30 साल बाद एक ही दिन खुलेंगे 6 इश्यू, ₹4,386 करोड़ जुटाने की तैयारीPF खाता धारकों के लिए बड़ी राहत: अब घर बैठे मोबाइल से निपटाएं अपने काम, उमंग ऐप पर UAN एक्टिवेट करना हुआ बेहद आसान25% प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग! फिर 10% तक फिसला दीपा ज्वेलर्स का शेयर, चेक करें ताजा भावप्रासोल केमिकल्स आईपीओ आज से खुला, ₹55 का GMP; 8% लिस्टिंग गेन का अनुमान, जानिए निवेश करना चाहिए या नहीं

Nifty Smallcap 100 Index: स्मॉलकैप का जलवा बरकरार, लगातार 11वें दिन उछाल

Advertisement

Nifty Smallcap 100 Index: 27 फरवरी को बाजार नियामक सेबी ने छोटी कंपनियों में संभावित बुलबुले को लेकर पैदा होने वाले जोखिम को लेकर चेताया था।

Last Updated- April 05, 2024 | 9:32 PM IST
NSE deepfake video

Nifty Smallcap 100 Index: स्मॉलकैप शेयरों के प्रदर्शन की माप के लिए व्यापक तौर पर ट्रैक किए जाने वाले निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में शुक्रवार को लगातार 11वें कारोबारी सत्र में बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह बढ़ोतरी बाजार में बुलबुले को लेकर नियामकीय चेतावनी के बावजूद निवेशकों के आशावाद की वापसी का संकेत देता है। यह सूचकांक 0.84 फीसदी की बढ़त के साथ 16,355 पर पहुंच गया जो 7 फरवरी के बाद का सबसे ऊंचा बंद स्तर है जबकि बेंचमार्क निफ्टी-50 बिना मामूली बदलाव के साथ बंद हुआ।

19 मार्च के बाद से निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है और इस तरह से उसने निफ्टी-50 इंडेक्स के मुकाबले उम्दा प्रदर्शन किया है क्योंकि निफ्टी-50 में इस दौरान महज 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले इंडेक्स सितंबर 2023 में लगातार 11 दिन चढ़ा था।

27 फरवरी को बाजार नियामक सेबी ने छोटी कंपनियों में संभावित बुलबुले को लेकर पैदा होने वाले जोखिम को लेकर चेताया था। इस चेतावनी के बाद इंडेक्स में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी और कई छोटी कंपनियों के शेयर 20 फीसदी से ज्यादा टूट गए थे।

बाजार में हालांकि इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि क्या और गिरावट के कारण कंपनियां मंदी के बाजार में प्रवेश कर जाएगी लेकिन इनमें अचानक और तेज उछाल देखने को मिली और निफ्टी स्मॉलकैप 100 अब 7 फरवरी के अपने सर्वोच्च बंद स्तर 16,566 अंक से महज 1.3 फीसदी पीछे है।

नए आशावाद को सहारा

इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी. चोकालिंगम ने कहा कि इस सेगमेंट में गुणवत्ता वाले कई शेयर 15-20 फीसदी टूट चुके हैं। ऐसे में निवेशकों ने दोबारा प्रवेश के लिए इन्हें आकर्षक पाया। उन्होंने कहा कि बाजार में तेजी के सामान्य हालात ने भी इसे दोबारा बेहतरी की ओर लौटने में मदद की है।

उन्होंने कहा कि कई संस्थानों ने भारत की आर्थिक वृद्धि और अन्य आर्थिक आंकड़ों के अनुमान को अपग्रेड किया है, मसलन बैंकिंग क्षेत्र के लिए क्रेडिट की वृद्धि। देसी व विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश में भी मजबूती है। हमें देखना है कि क्या फंडामेंटल पर यह रफ्तार उचित है। अगर ऐसा नहीं है तो हम कुछ समय बाद एक और गिरावट देख सकते हैं।

हालिया तेजी में निफ्टी स्मॉलकैप 100 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयर मोटे तौर पर कमोडिटी और बुनियादी ढांचा कंपनियों के थे। 19 मार्च से (जब इंडेक्स निचले स्तर से सुधरने लगा था) नालको ने सबसे ज्यादा 30 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है जिसके बाद 28 फीसदी की बढ़त के साथ एनसीसी का स्थान है। एनबीसीसी इंडिया, आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और हिंदुस्तान कॉपर में भी 23-23 फीसदी से ज्यादा की उछाल आई है।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यू आर भट्ट ने कहा कि मूल्यांकन को लेकर चिंता और इस सेगमेंट में गड़बड़ी के बावजूद तिमाही नतीजों का इस पर असर नहीं पड़ेगा। स्मॉलकैप में खुदरा निवेशकों का निवेश है और इनमें आम तौर पर उनके ब्रोकरों आदि की सिफारिशों से तेजी आती है। इसके अलावा कुछ शेयरों को लेकर पर्याप्त सकारात्मक खबरें आती हैं, जैसे कि कंपनी को बड़ा ऑर्डर मिलना आदि। ऐसे में इनके कारण स्मॉलकैप में संभावना को लेकर निवेशकों का आशावाद बना रहता है।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 80 फीसदी उछला है। तेज वृद्धि के कारण न सिर्फ नियामक बल्कि विश्लेषकों ने भी चेतावनी जारी की हैं क्योंकि इनमें बढ़ोतरी दोबारा रेटिंग की बदौलत हुई है, न कि आय में वृद्धि के कारण। पिछले महीने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के नोट में इसे रेखांकित किया गया था कि कैसे इक्विटी का मूल्यांकन असहज होने लगा है क्योंकि बढ़ी कीमतें आय में वृद्धि के मुताबिक नहीं हैं।

Advertisement
First Published - April 5, 2024 | 9:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement