facebookmetapixel
‘हमें अमेरिकी बनने का कोई शौक नहीं’, ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप की बात को ठुकराया, कहा: हम सिर्फ ‘ग्रीनलैंडर’Bonus Issue Alert: अगले हफ्ते दो कंपनियां अपने निवेशकों को देंगी बोनस शेयर, रिकॉर्ड डेट फिक्सDMart Q3 Results: Q3 में मुनाफा 18.28% बढ़कर ₹855 करोड़ के पार, रेवेन्यू ₹18,100 करोड़ पर पहुंचाभारत पहुंचे US के नए राजदूत गोर,कहा: वापस आकर अच्छा लग रहा, दोनों देशों के सामने कमाल के मौकेCorporate Action: स्प्लिट-बोनस-डिविडेंड से बढ़ेगी हलचल, निवेशकों के लिए उत्साह भरा रहेगा अगला हफ्ताIran Protest: निर्वासित ईरानी शाहपुत्र पहलवी का नया संदेश- विरोध तेज करें, शहरों के केंद्रों पर कब्जे की तैयारी करें350% का तगड़ा डिविडेंड! 5 साल में 960% का रिटर्न देने वाली कंपनी का निवेशकों को जबरदस्त तोहफाSuzuki ने उतारा पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर e-Access, बुकिंग हुई शुरू! जानें कीमत65 मौतें, 2311 गिरफ्तारी के बाद एक फोन कॉल से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज….आखिर ईरान में हो क्या रहा है?US Visa: अमेरिकी वीजा सख्ती ने बदला रुख, भारतीय एग्जीक्यूटिव्स की भारत वापसी बढ़ी

बाजार पूंजीकरण का नया रिकॉर्ड

Last Updated- December 11, 2022 | 4:31 PM IST

बेंचमार्क सेंसेक्स अपनी सर्वकालिक ऊंचाई से भले ही 2.4 फीसदी पीछे हो लेकिन बीएसई में सूचीबद्ध‍ सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। गुरुवार के बंद भाव पर बीएसई में सूचीबद्ध‍ 4,776 फर्मों का बाजार पूंजीकरण 280.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया और इस तरह से उसने 17 जनवरी को दर्ज 280 लाख करोड़ रुपये के पिछली ऊंचाई को पीछे छोड़ दिया।
निफ्टी मिडकैप 100 अपनी सर्वकालिक ऊंचाई से अभी 5.4 फीसदी पीछे है, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 20 फीसदी से ज्यादा नीचे है। इसके बावजूद भारत का बाजार पूंजीकरण नई ऊंचाई पर पहुंचने में कामयाब रहा। इसकी आंशिक वजह इस साल बड़ी कंपनियों मसलन एलआईसी (एमकैप 4.4 लाख करोड़ रुपये), अदाणी विल्मर (95,091 करोड़ रुपये और डेलिवरी (40,627 करोड़ रुपये) की सूचीबद्ध‍ता हो सकती है।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, एमकैप के सर्वकालिक स्तर पर पहुंचने की मुख्य वजह एलआईसी की सूचीबद्ध‍ता है, जिसने इसमें इजाफा किया है। मैं इस तेजी से बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं हूं, जो काफी तेज रही है। मैं निवेशकों को मुनाफावसूली का सुझाव देता रहा हूं, खास तौर से जिन्होंने पिछले दो महीने में प्रवेश किया है। कुछ गंभीर वैश्विक अवरोध व बढ़त को लेकर चिंता हैं। भारत लंबी अवधि में बेहतर करेगा लेकिन अल्पावधि में वह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होगा। हमारा हर पड़ोसी आर्थिक मसले से जूझ रहा है, जिसकी आंच हमें प्रभावित कर सकती है। साथ ही कंपनियों की आय की रफ्तार अभी तक बहुत बेहतर नहीं रही है। ये चीजें सितंबर तिमाही में भी समान रह सकती हैं क्योंकि काफी फर्में इन्वेंट्री नुकसान से जूझ रही है।
ऑटोमोबाइल व स्टेपल जैसे क्षेत्र की कंपनियों ने सालाना आधार पर बेहतर प्रदर्शन किया है, ऐसे में इन कंपनियों ने भी बाजार पूंजीकरण में इजाफा किया है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एमडी व सीईओ धीरज रेली ने कहा, हालिया बढ़ोतरी को उत्साहजनक आर्थिक आंकड़ों, जिंस की कीमतों में नरमी, घटती महंगाई आदि से भी सहारा मिला है। एफपीआई की तरफ से दोबारा खरीदारी शुरू होने से भी मदद मिली है। जून 2022 के निचले स्तर से बिना किसी गिरावट के उछाल ज्यादातर निवेशकों की उम्मीदों से परे रही है। वैश्विक गिरावट के बीच भारतीय बाजारों की सापेक्षिक मजबूती में ये चीजें प्रतिबिंबित हुई है। कुछ शेयर हालांकि अपने-अपने हालिया ऊंचाई से काफी नीचे हैं, लेकिन ये सामान्य चीजें हैं। निवेशक अब ​निफ्टी के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने की व्यग्रता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इस साल 17 जून के निचले स्तर से बेंचमार्क सूचकांकों में 17 फीसदी से ज्यादा की उछाल आई है। भारत स्थानीय मुद्रा के लिहाज से पिछले दो महीने में सबसे अच्छा प्रदर्शन वाला अहम बाजार रहा है।

First Published - August 19, 2022 | 9:52 AM IST

संबंधित पोस्ट