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डीमैट म्युचुअल फंड निवेश होगा आसान: SWP-STP के लिए SEBI की नई सुविधा से बदलेगा खेल

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अगर आप म्युचुअल फंड यूनिट्स को डीमैट फॉर्म में रखते हैं, तो नियमित निकासी या ट्रांसफर को मैनेज करना जल्द ही काफी आसान हो सकता है

Last Updated- February 09, 2026 | 6:54 PM IST
mutual fund

अगर आप म्युचुअल फंड यूनिट्स को डीमैट फॉर्म में रखते हैं, तो नियमित निकासी या ट्रांसफर को मैनेज करना जल्द ही काफी आसान हो सकता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रस्ताव दिया है कि निवेशकों को डीमैट खातों में रखी म्युचुअल फंड यूनिट्स के लिए सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) और सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के लिए स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन सेट करने की अनुमति दी जाए। फिलहाल यह सुविधा केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) मोड में रखी यूनिट्स के लिए उपलब्ध है।

निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?

अभी जो निवेशक म्युचुअल फंड को डीमैट फॉर्म में रखते हैं, उन्हें हर SWP या STP लेनदेन के लिए अलग-अलग निर्देश देने पड़ते हैं, जो समय लेने वाला और असुविधाजनक हो सकता है।

अगर सेबी का प्रस्ताव लागू होता है, तो डीमैट निवेशक यह कर सकेंगे:

  • म्युचुअल फंड से ऑटोमैटिक निकासी (SWP) के निर्देश सेट करना
  • अलग-अलग स्कीमों के बीच ऑटोमैटिक ट्रांसफर (STP) शेड्यूल करना
  • बार-बार मैनुअल रिक्वेस्ट देने की जरूरत से बचना

आसान शब्दों में कहें तो डीमैट के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश करना बैंक के ऑटो-डेबिट या SIP जितना आसान हो सकता है।

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क्यों जरूरी है यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा निवेशक ब्रोकर्स और स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए डीमैट खातों में म्युचुअल फंड रखने लगे हैं। हालांकि, SWP और STP जैसी सुविधाएं पारंपरिक म्युचुअल फंड खातों की तुलना में अब तक सीमित रही हैं।

क्या है सेबी का मकसद?

डीमैट होल्डिंग्स तक स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन की सुविधा बढ़ाकर सेबी का मकसद-

  • निवेश को आसान बनाना।
  • परिचालन संबंधी झंझट कम करना।
  • डीमैट म्युचुअल फंड निवेश को SOA आधारित निवेश के बराबर लाना।
  • निवेशकों और मध्यस्थों, दोनों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।

किसे होगा फायदा?

यह बदलाव खास तौर पर इन लोगों के लिए फायदेमंद होगा-

  • वे रिटायर्ड लोग जो नियमित आय के लिए SWP का इस्तेमाल करते हैं।
  • वे निवेशक जो धीरे-धीरे इक्विटी और डेट फंड के बीच निवेश शिफ्ट करते हैं।
  • वे फाइनेंशियल प्लानर जो सिस्टमैटिक तरीके से पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग करते हैं।

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कैसे लागू होगा यह बदलाव?

सेबी ने इस बदलाव को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

पहला चरण- 

निवेशक यूनिट आधारित SWP/STP के लिए मैंडेट दर्ज करा सकेंगे।

निर्देश डिपॉजिटरी या स्टॉक एक्सचेंज के सदस्यों के जरिए दिए जा सकेंगे।

लेनदेन स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर पूरा होगा।

इसके लिए सिस्टम में बहुत कम बदलाव की जरूरत पड़ेगी।

दूसरा चरण-

SWP/STP के निर्देश रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) के जरिए प्रोसेस किए जाएंगे। निवेशकों को ज्यादा लचीले विकल्प मिल सकते हैं, जैसे:

  • राशि आधारित SWP/STP
  • मुनाफे (एप्रिसिएशन) के आधार पर निकासी
  • स्विंग STP स्ट्रक्चर

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अब आगे क्या होगा?

सेबी ने इस प्रस्ताव पर 26 फरवरी तक आम लोगों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद फाइनल फ्रेमवर्क नोटिफाई किया जा सकता है। अगर यह लागू होता है, तो डीमैट में रखे म्युचुअल फंड और पारंपरिक म्युचुअल फंड खातों के बीच एक बड़ा ऑपरेशनल अंतर खत्म हो जाएगा, जिससे लंबी अवधि का निवेश और ज्यादा सुविधाजनक बन सकता है।

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First Published - February 9, 2026 | 6:54 PM IST

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