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म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में 10 साल में 6 गुना ग्रोथ, निवेशक इन स्कीम्स पर लगा रहे ज्यादा दांव

दिसंबर 2014 में जहां इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10.51 लाख करोड़ रुपये था, वह दिसंबर 2024 तक बढ़कर 66.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

Last Updated- February 04, 2025 | 12:51 PM IST
6 times growth in mutual fund industry in 10 years, investors are placing more bets on these schemes म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में 10 साल में 6 गुना ग्रोथ, निवेशक इन स्‍कीम्स पर लगा रहे ज्‍यादा दांव

Mutual Fund Growth: भारत में म्युचुअल फंड का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 10 वर्षों में ही म्युचुअल फंड इंडस्ट्री 6 गुना से ज्यादा बढ़ी है। इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) दिसंबर 2024 में 67 लाख करोड़ तक पहुंच गया। मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी की ‘व्हेयर द मनी फ्लो’ रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रोथ में इक्विटी फंड्स का दबदबा कायम रहा, जो कुल AUM का 60.19% है। दिसंबर तिमाही में म्युचुअल फंड्स में 198 हजार करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जिसमें एक्टिव इक्विटी और फ्लेक्सी कैप फंड्स प्रमुख रहे। हालांकि, थीमैटिक और अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेशकों की रुचि में गिरावट दर्ज की गई।

10 साल में 6 गुना बढ़ी म्युचुअल फंड इंडस्ट्री

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (MOAMC) की ‘व्हेयर द मनी फ्लो’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री ने पिछले 10 वर्षों में 6 गुना से अधिक की शानदार वृद्धि दर्ज की है। दिसंबर 2014 में जहां इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10.51 लाख करोड़ रुपये था, वह दिसंबर 2024 तक बढ़कर 66.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में सबसे बड़ा हिस्सा 60.19% के साथ इक्विटी फंड्स का है। इसके बाद 26.77% डेट फंड्स में, 8.58% हाइब्रिड फंड्स में और 4.45% अन्य निवेश विकल्पों में है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि निवेशकों की पहली पसंद अभी भी इक्विटी फंड्स बने हुए हैं।

निवेशक इन स्कीम्स पर लगा रहे ज्यादा दांव

दिसंबर तिमाही में म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने 198 हजार करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया, जिसमें सबसे अधिक योगदान इक्विटी फंड्स का रहा, खासतौर पर एक्टिव सेगमेंट में। इस तिमाही में 84 नई स्कीमें लॉन्च की गईं, जिनसे लगभग 24.8 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए। निवेशकों ने इन स्कीम्स पर लगाया दांव…

 

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इक्विटी फंड का दबदबा कायम

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने दिसंबर तिमाही में लगभग 199 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया। इसमें इक्विटी और डेट फंड्स का कुल योगदान क्रमशः 67% और 19% रहा। एक्टिव इक्विटी फंड्स ने करीब 105 हजार करोड़ रुपये के नेट इनफ्लो के साथ लीड किया, जबकि पैसिव इक्विटी फंड्स में 29 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया।

एक तरफ, एक्टिव डेट फंड्स में निवेशकों ने लगभग 47 हजार करोड़ का निवेश किया। वहीं दूसरी तरफ, पैसिव डेट फंड्स से उन्होंने लगभग 9 हजार करोड़ रुपये बाहर निकालें।

निवेशकों ने ब्रॉड बेस्ड फंड को प्राथमिकता दी

ब्रॉड बेस्ड फंड्स ने लगभग 69% मार्केट शेयर पर कब्जा किया और अधिकांश इक्विटी नेट इनफ्लो अपने नाम किया। एक्टिव ब्रॉड बेस्ड फंड्स की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 57% से बढ़कर 70% हो गई, जबकि पैसिव ब्रॉड बेस्ड फंड्स की हिस्सेदारी 90% से घटकर 66% पर आ गई।

एक्टिव इक्विटी में, थीमैटिक फंड्स के नेट इनफ्लो में पिछली तिमाही की तुलना में गिरावट आई और यह 14 हजार करोड़ रुपये पर आ गया।

पैसिव इक्विटी में, ब्रॉड बेस्ड फंड्स के इनफ्लो में आई गिरावट की भरपाई फैक्टर और सेक्टर फंड्स में बढ़े नेट इनफ्लो से हुई। इस तिमाही में फैक्टर फंड्स ने कुल नेट इनफ्लो का 22% और सेक्टर फंड्स ने 10% हिस्सा अपने नाम किया।

ब्रॉड-बेस्ड सेगमेंट में फ्लेक्सी कैप को बढ़त

निवेशकों ने एक्टिव फ्लेक्सी कैप और मिड कैप फंड्स को प्राथमिकता दी, जिसमें प्रत्येक ने लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो प्राप्त किया। निवेशकों ने लार्ज कैप में अपने आवंटन के लिए मुख्य रूप से पैसिव फंड्स को चुना, जिससे इस कैटेगरी में लगभग 84% नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि, इसमें मामूली गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेश का रुझान मिड कैप और स्मॉल कैप सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो गया।

थीमैटिक सेगमेंट: कंजंप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों की पहली पसंद

कुल मिलाकर थीमैटिक म्युचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो 17 हजार करोड़ रुपये से घटकर 14 हजार करोड़ रुपये रह गया। इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा निवेश कंजंप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ, जिसमें 4.5 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

पैसिव थीमैटिक फंड्स में कैपिटल मार्केट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और पर्यटन (Tourism) जैसे नए थीम का उभार देखा गया।

कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी फंड्स का दबदबा, टारगेट मैच्योरिटी फंड्स में बड़ा आउट फ्लो

कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी फंड्स ने कुल नेट फ्लो में लगभग 37 हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया और इनफ्लो में अपना दबदबा बनाया। इसके बाद कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स ने करीब 6 हजार करोड़ रुपये और गिल्ट फंड्स ने लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का नेट फ्लो प्राप्त किया। वहीं, टारगेट मैच्योरिटी फंड्स ने लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का नेट आउट फ्लो दर्ज किया।

लिक्विड फंड्स में जोरदार इनफ्लो, मनी मार्केट फंड्स की हिस्सेदारी घटी

कुल मिलाकर, लिक्विड फंड्स ने लगभग 41% नेट फ्लो में योगदान दिया, जो 15 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहा। इसके बाद लो ड्यूरेशन और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन कैटेगरी ने क्रमशः 7.5 हजार करोड़ रुपये और 7 हजार करोड़ रुपये का इनफ्लो प्राप्त किया।

आमतौर पर, निवेशक शॉर्ट टर्म में अतिरिक्त नकदी पार्क करने के लिए 1 साल की मैच्योरिटी तक वाले डेट फंड्स का उपयोग करते हैं, जिससे इनफ्लो और आउटफ्लो में उतार-चढ़ाव बना रहता है। मनी मार्केट फंड्स के नेट इनफ्लो की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 27% से घटकर 9% हो गई।

हाइब्रिड कैटेगरी में मल्टी एसेट फंड्स बना लीडर

मल्टी एसेट फंड्स ने हाइब्रिड कैटेगरी में लीड किया और कुल नेट इनफ्लो का 48% हिस्सा हासिल किया। इसके बाद बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स ने 25% का योगदान दिया।

इक्विटी सेविंग्स फंड्स के नेट इनफ्लो की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 26% से घटकर 15% हो गई, जबकि एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स की हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 12% हो गई।

 

अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेशकों की रुचि कम

अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश काफी कम रहा, क्योंकि RBI ने इन स्कीम्स में नए निवेश पर सीमाएं लगाई हुई हैं। एक्टिव और पैसिव ब्रॉड-बेस्ड फंड्स दोनों में 0.1 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया। वहीं, निवेशकों ने पैसिव थीमैटिक अंतरराष्ट्रीय फंड्स से 0.3 हजार करोड़ रुपये निकाले।

म्युचुअल फंड निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने में सक्षम

मोतीलाल ओसवाल AMC के MD और CEO प्रतीक अग्रवाल ने कहा, “भारत की म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने तेजी से ग्रोथ की है, जिसकी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब करीब 67 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि देश की आर्थिक प्रगति और बढ़ती वित्तीय साक्षरता (financial literacy) का नतीजा है।

यह ग्रोथ दिखाता है कि म्युचुअल फंड उद्योग निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है और साथ ही देश के फाइनैंशियल इकोसिस्टम को भी मजबूत बना रहा है। भविष्य में इस विकास को बनाए रखने के लिए इनोवेशन, तकनीक और अनुकूलित निवेश समाधान (tailored investment solutions) अहम भूमिका निभाएंगे।

First Published - February 4, 2025 | 12:51 PM IST

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