म्युचुअल फंड

तेजी के बाद नए साल में अमेरिका फोक्स्ड फंड्स का कम रह सकता है जलवा

मौजूदा निवेशकों को पोर्टफोलियो में फेरबदल और बड़े शेयरों पर दांव कम करना चाहिए, नए निवेशकों के लिए दीर्घ अवधि के साथ क्रमिक ढंग से निवेश बेहतर रहेगा

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हिमाली पटेल   
Last Updated- December 25, 2025 | 10:35 PM IST

भारतीय परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के अमेरिकी बाजार पर केंद्रित म्युचुअल फंडों ने 2025 में निवेशकों को मोटा मुनाफा दिया है। एसऐंडपी 500 और नैसडैक जैसे मानक सूचकांकों ने पिछले एक साल में 16 से 20 प्रतिशत प्रतिफल (रिटर्न) दिए हैं। इनमें दिग्गज तकनीकी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से ताल्लुक रखने वाली कंपनियों का अहम योगदान रहा है। मगर नए साल यानी 2026 में निवेशकों को ऊंचे मूल्यांकन और अन्य अनिश्चितताओं से उत्पन्न जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल करने की जरूरत महसूस होगी।

साल 2025 में एआई से बाजार को दम

पिछले वर्ष में अमेरिकी बाजार में कुछ खास कंपनियों के शेयरों में अधिक तेजी दिखी। सूचकांकों में दर्ज तेजी एवं मुनाफे में मुट्ठी भर बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की दमदार हिस्सेदारी रही। एडलवाइस म्युचुअल फंड की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) राधिका गुप्ता कहती हैं,‘आय के मजबूत आंकड़े, बड़ी तकनीकी कंपनियों को एआई से मिले लाभ और दमदार अमेरिकी अर्थव्यवस्था से खूब ताकत मिली।’

आनंद राठी इंटरनैशनल वेंचर्स आईएफसी के निदेशक एवं सीईओ नितिन डोंगरे ने कहा कि डेटा केंद्रों, सेमीकंडक्टर और क्लाउड ढांचे में एआई और शीर्ष तकनीकी कंपनियों के निवेश से आय को लेकर माहौल उत्साहजनक हो गया।

वालट्रस्ट के मुख्य निवेश अधिकारी एवं संस्थापक अरिहंत बर्दिया कहते हैं, ‘खासकर तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों की आय शानदार और उम्मीद से अधिक रही। एआई की मदद से मिलने वाले लाभ महज अटकल न रहकर जमीनी स्तर पर स्पष्ट नजर आने लगे।’

कंपनियों की रणनीतियां भी कारगर साबित हुईं। अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के फंड प्रबंधक नचिकेता सावरीकर कहते हैं, ‘अमेरिकी कंपनियों ने लागत पर अंकुश रख कर बदलते आर्थिक हालात के अनुकूल स्वयं को ढाल लिया। प्रति शेयर आय वृद्धि अक्सर राजस्व वृद्धि की तुलना में ज्यादातर मौकों पर अधिक रही । प्रबंधन टीमों ने आय को लेकर स्पष्ट अनुमान दिए और उनमें से ज्यादातर सटीक निकले।’ इन सभी बातों से मूल्यांकन बढ़ता गया।

वृहद आर्थिक हालात भी सहायक साबित हुए। मुद्रास्फीति निचले स्तर पर रहने से मौद्रिक स्थिति सहज रहने की उम्मीद बढ़ गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सितंबर और दिसंबर के बीच तीन बार ब्याज दरों में कटौती की जिससे तेजी से चढ़ने वाले शेयरों के लिए छूट कम हो गईं। सख्त वित्तीय हालात के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी से दूर रही और रोजगार की स्थिति भी कमजोर नहीं हुई। कंपनियों द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद और वैश्विक पूंजी प्रवाह स्थिर रहने (विशेष रूप से पैसिव फंडों के माध्यम से) से शेयरों से रिटर्न बढ़ गया।

सकारात्मक लेकिन नाजुक परिदृश्य

साल 2026 के लिए भी परिदृश्य ठीक लग रहा है मगर सतर्कता तो होगी। रिटर्न थोड़ा कम रह सकता है और हाल के वर्षों में बाजार में दर्ज तेजी केवल एआई से जुड़ी कंपनियों तक सीमित न रहकर दूसरे क्षेत्रों में दिख सकती है। गुप्ता कहते हैं,‘कमाई में थोड़ी कमी आ सकती है मगर रफ्तार बनी रहने की संभावना है।’ पिछले तीन वर्षों की तेज वृद्धि के बाद बाजार में गिरावट का दौर शुरु हो सकता है जिससे 2025 के मुकाबले हालात अधिक नाजुक रह सकते हैं।

उत्पादकता से जुड़े लाभ

एआई के दमखम से उत्पादकता के स्तर पर मिल रहे लाभ 2026 में बाजार को मजबूती दे सकते हैं मगर यह तब होगा जब तकनीकी कंपनियां अपने निवेश से फायदा उठाने में आगे रहेंगी। अमेरिका की बड़ी कंपनियों की आय मजबूत रहने के अनुमान भी बाजार को ताकत दे सकते हैं। अमेरिकी बाजारों की गहराई, कारोबारी लेन-देन और नवाचार के दम पर होने वाला वैश्विक पूंजी प्रवाह से भी फायदा मिलेगा।
बर्दिया कहते हैं,‘डेटा केंद्रों, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और एआई हार्डवेयर में बड़ी कंपनियों की तरफ से भारी भरकम निवेश अगले कई वर्षों के लिए व्यापक स्तर पर वृद्धि मजबूत रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।’एक स्थिर या सहज नीतिगत माहौल धारण और मजबूत करेंगे बशर्ते मुद्रास्फीति नियंत्रित रहे।

मूल्यांकन और अन्य जोखिम

ऊंचे मूल्यांकन (खासकर दिग्गज तकनीकी शेयरों के) किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ रहे हैं। एआई से ताल्लुक रखने वाले कारोबार आय कम रहने से अस्थिर हो सकते हैं। बर्दिया कहते हैं,‘मुट्ठी भर बड़े तकनीकी शेयरों में अत्यधिक निवेश आय में गिरावट या नियामक हस्तक्षेपों के जोखिम का कारण बन सकता है।’

अगर एआई ढांचे में भारी भरकम निवेश उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दे पाए तो दुनिया भर के बाजारों में तेज गिरावट आ सकती है। एआई ढांचे के भीतर चक्रीय निवेश ने भी चिंता बढ़ा दी है। निकट अवधि के मुद्रास्फीति से जुड़े जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। डोंगरे कहते हैं,‘अर्थव्यवस्थाओं में एआई से जुड़े भारी भरकम निवेश, शुल्क एवं जवाबी शुल्क के कारण या आपूर्ति व्यवस्था में बाधा आने से मुद्रास्फीति भड़क सकती है। इससे ब्याज दरें लंबी अवधि तक ऊंचे स्तरों पर बनी रहने का जोखिम खड़ा हो सकता है।’

भू-राजनीतिक और व्यापार जोखिम, विशेष रूप से अमेरिका-चीन तनाव और सेमीकंडक्टरों और दुर्लभ-मृदा खनिजों की आपूर्ति में व्यवधान बाजार में बिकवाली की आग भड़का सकते हैं। सावरीकर कहते हैं,‘श्रम बाजार में नरमी के संकेत दिख रहे हैं जिसका असर उपभोक्ताओं की धारणा पर हो सकता है।’ व्यापक मंदी से आय को नुकसान होगा। बाजार की बनावट से जुड़े जोखिम जैसे भीड़-भाड़ वाले व्यापार, निष्क्रिय प्रवाह और आक्रामक रणनीतियां तनाव के दौरान बिकवाली और बढ़ा सकते हैं।

कमा सकते हैं आंशिक मुनाफा

दीर्घकालिक निवेशकों को निवेश बनाए रखना चाहिए मगर अमेरिकी शेयर अपने वास्तविक आवंटन की तुलना में असमान रूप से चढ़े हैं तो पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करना सही रणनीति होगी। एआई पर निर्भर और बड़े शेयरों में सोच-समझकर और मौका देख कर मुनाफा कमाने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

घरेलू म्युचुअल फंडों के जरिये अमेरिका में निवेश करने वाले निवेशकों को पूरी तरह बाहर निकलने पर ठीक से सोचना चाहिए। बर्दिया कहते हैं,‘मौजूदा समय में विदेशी निवेश की तय सीमाओं को देखते हुए दोबारा निवेश कर पाना संभव नहीं हो सकता। वैकल्पिक उदार प्रेषण योजना (एलआरएस) छोटे निवेशकों के लिए बोझिल हैं और अधिक फायदेमंद साबित नहीं हो रहा है।’

क्रमिक एवं व्यवस्थित निवेश

नए निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार से पूरी तरह से बचना उचित नहीं है। जियोजित इन्वेस्टमेंट के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार कहते हैं,‘अमेरिका दुनिया में सभी कंपनियों के कुल मुनाफे में लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा रखता है। यह हिस्सेदारी 2017 में 33 प्रतिशत थी।’ अमेरिकी बाजार दुनिया की कई सबसे नई और नकदी कमाने वाली कंपनियों का जमावड़ा बना हुआ है।

लैडरअप ऐसेट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक राघवेंद्र नाथ का कहना है,‘अमेरिकी शेयरों में निवेश से तकनीक, स्वास्थ्य नवाचार और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कदम रखने का अवसर मिलता है। भारतीय बाजारों में इनसे जुड़े अधिक अवसर उपलब्ध नहीं हैं।’

अमेरिकी बाजारों में निवेश से घरेलू बाजार के प्रति अधिक झुकाव और इससे जुड़े जोखिम भी कम हो जाते हैं। विजयकुमार कहते हैं,‘इस साल भारतीय बाजार के कमजोर प्रदर्शन से एक महत्त्वपूर्ण सबक यह मिला है कि निवेशकों को दुनिया के दूसरे बाजारों में भी दांव खेलना चाहिए।’ अमेरिकी बाजार में निवेश रुपये में गिरावट से सुरक्षा भी देता है। नए निवेशकों को वर्तमान मूल्यांकन पर आक्रामक एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए। नाथ ने कहा ‘उन्हें निवेश में गुणवत्ता और विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए लंबी अवधि के लक्ष्य के साथ चरणबद्ध रूप से दांव लगाने का विकल्प चुनना चाहिए।’कम से कम 7 से10 वर्षों का निवेश लक्ष्य रखा जाए तो बेहतर है।

नए निवेशकों को वास्तविक उम्मीदों के साथ उतरना चाहिए। मनीफ्रंट के सह-संस्थापक एं सीईओ मोहित गंग कहते हैं,‘2025 में दर्ज 15 से 18 प्रतिशत रिटर्न दीर्घकालिक औसत से अधिक है। रुपये में कुछ सुधार होने की सूरत में अमेरिकी डॉलर में 8 से10 प्रतिशत दीर्घ अवधि में अधिक वास्तविक लगता है।’
निवेशकों को अंतरिम सुधारों के लिए भी तैयार रहना चाहिए और मुद्रा जोखिम को समझना चाहिए। मजबूत रुपया रिटर्न कम कर सकता है। गंग के अनुसार अधिकांश निवेशकों के लिए इक्विटी पोर्टफोलियो का लगभग 10-25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाजारों में आवंटित करना ठीक रहेगा। अधिक जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक यह हिस्सा 20-25 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।

First Published : December 25, 2025 | 10:32 PM IST