वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) के उद्योग निकाय इंडियन वेंचर ऐंड ऑल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (आईवीसीए) ने आगामी केंद्रीय बजट में निजी क्रेडिट फंडों के लिए कर समानता और श्रेणी-3 एआईएफ के लिए स्पष्टता की मांग की है। उसने वित्त मंत्रालय को अपना मांग पत्र सौंपा है। इसमें एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था में निजी क्रेडिट फंडों के साथ कुछ हाइब्रिड और आर्बिट्रेज म्युचुअल फंड श्रेणियों की तुलना में कम अनुकूल व्यवहार है जबकि इनमें जोखिम समान ही होते हैं।
इसमें कहा गया है कि ये म्युचुअल फंड योजनाएं हेज वाली इक्विटी पोजीशन के एक छोटे हिस्से के कारण तकनीकी रूप से ‘इक्विटी-ओरिएंटेड’ की श्रेणी में आती हैं और इन पर 12.5 फीसदी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ और 20 फीसदी अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर की सुविधा है। दूसरी ओर, निजी क्रेडिट एआईएफ और डेट एआईएफ तथा डेट म्युचुअल फंड पर नियमित आय के रूप में करीब 39 फीसदी की उच्चतम सीमांत दर से कर लगता है।
ज्ञापन में कहा गया है, यह असंतुलन गलत कारणों से निवेश प्रवाह को नया आकार दे रहा है। निवेशक, विशेष रूप से एचएनआई, केवल कर फायदे के लिए आर्बिट्रेज और हाइब्रिड फंडों का रुख कर रहे हैं।
एसोसिएशन ने एआईएफ, म्युचुअल फंड और बॉन्ड जैसे ऋण साधनों में समान कर दरों के साथ ‘समान अवसर’ की मांग की है। उसका सुझाव है कि डेरिवेटिव पोजीशन को ध्यान में रखते हुए ‘इक्विटी-ओरिएंटेड फंड’ में वास्तविक शुद्ध इक्विटी एक्सपोजर की गणना की जाए।
श्रेणी-3 एआईएफ में लॉन्ग-ओनली इक्विटी फंड और क्वांटिटेटिव और डेरिवेटिव रणनीतियां शामिल होती हैं। एसोसिएशन का कहना है कि आयकर अधिनियम में इन योजनाओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।
आईवीसीए ने कहा कि श्रेणी-3 के अधिकांश एआईएफ ट्रस्ट के रूप में हैं और उन्हें निजी-ट्रस्ट कराधान नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है जबकि ये नियम संस्थागत इन्वेस्टमेंट व्हीकल के लिए नहीं बनाए गए थे। आईवीसीए का कहना है, इससे भ्रम, मुकदमेबाजी और कई मामलों में दो बार कर लगने का जोखिम होता है – एक बार फंड स्तर पर और दूसरी बार निवेशकों के हाथों में।
सितंबर 2025 तक एआईएफ में कुल प्रतिबद्धताएं 15.05 लाख करोड़ रुपये थीं जबकि कुल निवेश 6.11 लाख करोड़ रुपये था। बाजार नियामक के आंकड़ों के अनुसार इसमें से श्रेणी-3 एआईएफ में 2.92 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धताएं और 1.97 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
आईवीसीए के एक प्रवक्ता ने कहा, निर्धारित ट्रस्टों के रूप में व्यवहार और अधिकतम सीमांत दरों जैसे मुद्दों पर सतत मार्गदर्शन की आवश्यकता है ताकि निवेशकों को कराधान के बारे में पहले पता चले और ये एकसमान हों। आयकर ढांचे के तहत सरल कानूनी मान्यता दोहरे कराधान का जोखिम कम कर सकती है, और अनावश्यक विवाद घट सकते हैं।