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भारत-जापान ने शुरू किया AI संवाद, दोनों देशों के तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई रफ्तार

भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल के तहत दोनों पक्ष आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र में संवाद का आयोजन करेंगे

Published by
अर्चिस मोहन   
Last Updated- January 16, 2026 | 10:50 PM IST

भारत और जापान ने आज आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर संवाद शुरू किया और इस वर्ष के आरंभ में महत्त्वपूर्ण खनिजों पर अपने संयुक्त कार्य समूह की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के बीच यहां हुए 18वें भारत-जापान रणनीतिक संवाद में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विचाराधीन परियोजनाओं की समीक्षा भी की।

भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल के तहत दोनों पक्ष आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र में संवाद का आयोजन करेंगे। भारत के विदेश सचिव और जापान के विदेश मामलों के उप मंत्री के नेतृत्व में ‘आर्थिक सुरक्षा संवाद’ का दूसरा दौर इसी साल की पहली छमाही में आयोजित किया जाएगा।

बैठक में जयशंकर ने कहा कि विश्व के अग्रणी लोकतंत्रों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और जापान के पास न केवल अवसर है, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को आकार देने का दायित्व और कर्तव्य भी है, और वर्तमान अनिश्चित वैश्विक स्थिति में यह और भी महत्त्वपूर्ण है कि हम साझा रणनीतिक लक्ष्यों की दिशा में मिलकर काम करें।

जयशंकर ने कहा, ‘आज आर्थिक सुरक्षा विशेष रूप से सर्वोपरि है। मेरा मानना है कि हमारे दोनों देश इसे अत्यधिक महत्त्व देते हैं, और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को जोखिम मुक्त करने के तरीके और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिम मुक्त करने के तरीके दोनों ही बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।’

बाद में  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों द्वारा स्वीकृत भारत-जापान ‘एआई संवाद’ एआई में हमारी भागीदारी को एक ठोस गति प्रदान करने का प्रयास होगा। यह संयुक्त सचिव-महानिदेशक स्तर पर आयोजित किया जाएगा और यह एक नई पहल है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान स्वीकृत यह एआई पहल, लार्ज लैंग्वेज मॉडल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और व्यवसायों एवं स्टार्टअप को समर्थन प्रदान करने में सहयोग को बढ़ावा देगी ताकि एक विश्वसनीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके।

दुर्लभ मृदा तत्त्वों और महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों पक्षों ने 2026 की शुरुआत में महत्त्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। भारत और जापान ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री की टोक्यो यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह की स्थापना पर सहमति व्यक्त की थी। जापान और भारत खनिज सुरक्षा साझेदारी, इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढांचा और क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहलों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। 

दोनों देशों ने अगस्त 2025 में खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। जापान और भारत ने आंध्र प्रदेश में टोयोटा त्सुशो के रेयर अर्थ रिफाइनिंग प्रोजेक्ट के माध्यम से अपने सहयोग को और गहरा किया है, जिसका उद्देश्य दुर्लभ मृदा पदार्थों के लिए एक स्थिर आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है।

मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा के अलावा दोनों मंत्रियों ने ऊर्जा, स्वास्थ्य और समुद्री सुरक्षा से निपटने के तरीकों पर भी बात की। जयशंकर ने कहा कि जापान के विदेश मंत्री और वह कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और साथ मिलकर काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जब आप पार्टी के मामले संभाल रहे थे तब भी हमारी दोस्ती कायम थी।’ उन्होंने क्रिकेट में मोटेगी की रुचि का भी जिक्र किया।

First Published : January 16, 2026 | 10:50 PM IST