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Startup India के 10 साल: भारत का स्टार्टअप तंत्र अब भी खपत आधारित बना हुआ, आंकड़ों ने खोली सच्चाई

देश की आधे से अधिक यूनिकॉर्न उपभोक्ता और रिटेल के साथ-साथ वित्तीय सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि एंटरप्राइज और कोर टेक में इनकी संख्या बहुत सीमित है

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शिखा चतुर्वेदी   
Last Updated- January 16, 2026 | 10:43 PM IST

स्टार्टअप इंडिया पहल का 16 जनवरी को एक दशक पूरा हो गया है। इस उद्यम आधारित पहल के प्रति जागरूकता, प्रोत्साहन और विकास के मद्देनजर देश में हर वर्ष इस दिन को नैशनल स्टार्टअप डे के रूप में मनाया जाता है। दस साल के इस सफर को देखें तो प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के मोर्चे पर स्टार्टअप तंत्र का सीमित विस्तार हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में से केवल 1.5 प्रतिशत आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में हैं। यह आंकड़ा प्रमुख एंटरप्राइज-ग्रेड टेक्नॉलजीज यानी सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और सिस्टम में इसके अपेक्षाकृत कम विस्तार को दर्शाता है।

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देश की आधे से अधिक यूनिकॉर्न उपभोक्ता और रिटेल के साथ-साथ वित्तीय सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि एंटरप्राइज और कोर टेक में इनकी संख्या बहुत सीमित है। इसके विपरीत अमेरिका की यूनिकॉर्न तंत्र में उद्यमिता और प्रौद्योगिकी से जुड़ी फर्मों का बोलबाला है।

सबसे अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप आईटी, सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। फूड डिलिवरी क्षेत्र आकर्षक लग सकता है, लेकिन इस क्षेत्र में काम करने वाली स्टार्टअप की संख्या के मामले में यह पांचवें स्थान पर है। देश भर में स्टार्टअप क्षेत्र में 69 यूनिकॉर्न कंपनियां हैं और इस मामले में भारत पूरे विश्व में तीसरे नंबर पर आता है, लेकिन अमेरिका और चीन के साथ देखें तो यह अंतर बहुत ज्यादा है।

First Published : January 16, 2026 | 10:43 PM IST