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आंध्र प्रदेश बनेगा ग्रीन एनर्जी का ‘सऊदी अरब’, काकीनाडा में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अमोनिया कॉम्प्लेक्स

प्रदेश के काकीनाडा में देश के पहले और दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया कॉम्प्लेक्स पर काम महत्त्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है

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शाइन जेकब   
Last Updated- January 16, 2026 | 10:52 PM IST

आंध्र प्रदेश अब ‘ग्रीन एनर्जी का सऊदी अरब’ बनने की दिशा में बढ़ रहा है। प्रदेश के काकीनाडा में देश के पहले और दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया कॉम्प्लेक्स पर काम महत्त्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। एएम ग्रीन द्वारा 10 अरब डॉलर की लागत से बनाए जा रहे इस निर्यात परिसर में शनिवार को पहला प्रमुख उपकरण स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना देश के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि पहली बार घरेलू स्तर पर उत्पादित ग्रीन एनर्जी मॉलिक्यूल्स यानी तरल या गैसीय रूप में नवीकरणीय ऊर्जा को यहां से वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाएगा।

निर्यात केंद्रों के रूप में शुरुआत में जर्मनी, जापान और सिंगापुर को लक्षित किया जाएगा। इससे भारत और विशेष रूप से दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा निर्यातक के रूप में मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।

आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने एक्स पर कहा, ‘आंध्र प्रदेश ग्रीन एनर्जी का सऊदी अरब बनने की दिशा में बढ़ रहा है। काकीनाडा से जर्मनी, सिंगापुर और जापान।’ एक सरकारी सूत्र ने कहा कि इस इकाई की क्षमता 15 लाख टन प्रति वर्ष है और इसका पहला चरण मार्च 2027 तक शुरू हो जाएगा। परियोजना का अंतिम चरण 2030 तक पूरा हो जाएगा। आंध्र के लिए यह योजना कितनी महत्त्वपूर्ण है और वैश्विक हरित ऊर्जा वैल्यू चेन में भारत की हैसियत क्या है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री कोनिडाला पवन कल्याण शनिवार को काकीनाडा परिसर में शनिवार को होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे।

एक सरकारी बयान में कहा गया है कि एएम ग्रीन परियोजना भारत में सबसे बड़े स्वच्छ-ऊर्जा निवेशों में से एक है। इस परियोजना के निर्माण के दौरान ही लगभग 8,000 नौकरियां पैदा होंगी। इसके अलावा यहां संचालन शुरू होने पर तथा नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, भंडारण और पोर्ट सेवाओं जैसे संबद्ध उद्योगों में बड़े पैमाने पर उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा होंगे।

बयान में कहा गया है कि यह परियोजना एक मौजूदा अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स  के ब्राउनफील्ड रूपांतरण के माध्यम से विकसित की जा रही है, जो देश की सबसे महत्त्वपूर्ण औद्योगिकी विकास कहानियों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है। यही नहीं, परियोजना यह भी दर्शाती है कि आंध्र प्रदेश में एक ही जगह स्वच्छ-ऊर्जा वैल्यू चेन  खड़ी करने की क्षमता है। 

इस परिसर में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) का उत्पादन, हाइड्रो भंडारण के जरिए चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन, ग्रीन अमोनिया विनिर्माण और वैश्विक बाजारों के लिए पोर्ट आधारित निर्यात ढांचा उपलब्ध है। एकीकृत इकाई में 7.5 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा, 1,950 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइजर  और चौबीसों घंटे 2 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध रहेगी, इसके साथ पंप हाइड्रो स्टोरेज भी है, जो आंध्र प्रदेश के पिन्नापुरम में भारत की पहली ऐसी परियोजना है।

एएम ग्रीन का यूनिपर (जर्मनी) सहित अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते हैं। इसके अलावा यह जापान और सिंगापुर की फर्मों के साथ भी बातचीत कर रहा है। इससे यह भारत से यूरोप और विस्तारित एशियाई बाजारों में हरित ऊर्जा के निर्यात का पहला उदाहरण होगा।

काकीनाडा से निर्यात होने वाली हरित अमोनिया का उपयोग विभिन्न देशों द्वारा स्वच्छ शिपिंग ईंधन, बिजली उत्पादन और हरित हाइड्रोजन परिवर्तन के लिए किया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। बयान में कहा गया है कि यह परियोजना एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 के अनुरूप है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में आंध्र प्रदेश की अग्रणी भूमिका को मजबूत करती है। सरकार ने कहा, ‘यह परियोजना सिर्फ एक औद्योगिक निवेश नहीं है, यह हरित ऊर्जा की दिशा में इसके इरादों को दर्शाती है। आंध्र प्रदेश भारत को स्वच्छ ऊर्जा निर्यात और वैश्विक जलवायु नेतृत्व के दौर में आगे ले जा रहा है।’

First Published : January 16, 2026 | 10:38 PM IST