स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे औद्योगिक प्रकृति वाले राज्यों के मुख्यमंत्री हमेशा की तरह स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक मंच शिखर सम्मेलन में गए ही हैं, लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले असम और खनिज संपदा के धनी झारखंड की सरकारों के मुखिया का भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होना केंद्र और उसके उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों का दिलचस्प पहलू है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शुल्क से खासा नुकसान उठाने वाला आंध्र प्रदेश दावोस के जरिए अपने समुद्री उत्पादों के लिए बाजार तलाशेगा, वहीं झारखंड का प्रयास यहां अपने दुर्लभ खनिजों के लिए नए खरीदार खोजने पर रहेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री सचिवालय ने कहा, ‘सिंहभूम भूवैज्ञानिक बेल्ट में देश के कुछ सबसे समृद्ध लौह अयस्क, तांबा, कोयला, बॉक्साइट, यूरेनियम, चूना पत्थर और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार है।
ये ऐसी सामग्री हैं जो अब नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण, डिजिटल इन्फ्रा और रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए अपरिहार्य हो गई हैं।’ मुख्यमंत्री सोरेन इन दुर्लभ खनिजों के भविष्य में महत्त्व, खनन, प्रसंस्करण, पर्यावरण सुरक्षा आदि के बारे में अपनी सरकार के दृष्टिकोण पर बात करेंगे। दावोस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पूर्वोत्तर राज्य को पिछले पांच वर्षों में सर्वश्रेष्ठ आर्थिक विकास दर्ज करने वाले राज्य के रूप में चिह्नित दिया है।
सोरेन और शर्मा के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश सहित चार अन्य मुख्यमंत्री भी दावोस में होने वाले इस विश्व आर्थिक मंच में शामिल होंगे, साथ ही कर्नाटक, केरल, गुजरात और उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंत्री भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। कम से कम चार केंद्रीय मंत्रियों- अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद जोशी और के राममोहन नायडू के भी जाने की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रविवार को दावोस के लिए रवाना हो गए।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं के इस शिखर सम्मेलन के दौरान ‘क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है’ विषय सहित कई पैनल परिचर्चाओं में भाग लेने की उम्मीद है। उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी गुजरात के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। गुजरात का प्रतिनिधिमंडल सहयोग, पूंजी प्रवाह और भारत में गुजरात सरकार के माध्यम से निवेश की इच्छुक कंपनियों के लिए गिफ्ट सिटी की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करेगा।
व्यस्तता के कारण कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का जाना रद्द हो गया है। उनकी जगह भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एम बी पाटिल अन्य सदस्यों के साथ दावोस जाएंगे। पाटिल ने कहा कि पिछले साल फरवरी में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के बाद 11 महीनों में कर्नाटक ने कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये के कई नए औद्योगिक प्रस्ताव हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में निवेश की उम्मीद कर रही है।
आंध्र प्रदेश के नायडू रविवार को अपने मंत्रियों और अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्यूरिख के लिए रवाना हो गए। उनका सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वित्त और पर्यटन मंत्री के साथ बैठक करने का कार्यक्रम है। दावोस सम्मेलन में आंध्र का अलग मंडप होगा, जबकि अन्य राज्य ‘इंडिया पवेलियन’ में ही रहेंगे। केरल के उद्योग मंत्री पी राजीव अपने राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इनका पूरा जोर नॉलेज इकॉनमी, पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन सिद्धांतों तथा उच्च-तकनीक आधारित उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित करना रहेगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा है कि राज्य सरकार विश्व आर्थिक मंच शिखर सम्मेलन में अपने ‘तेलंगाना राइजिंग 2047’ विजन और राज्य को तीन लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को आक्रामक रूप से पेश करेगी।